रोडवेज की नई पदोन्नति नीति की तैयारी, अभी रूट पर नहीं चलने वालों का रोक रहे वेतन
पांच साल तक रूट पर नौकरी करने वाले परिचालक ही बनेंगे एटीआई
जयपुर। राजस्थान रोडवेज में सहायक यातायात निरीक्षक (एटीआई) बनने की राह अब और कठिन होने जा रही है। रोडवेज प्रशासन परिचालकों की पदोन्नति को सीधे बस संचालन से जोड़ने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार वही परिचालक एटीआई पद के लिए वे पात्र होंगे, जिन्होंने पांच चर्ष तक नियमित रूट पर नौकरी की हो। परिचालक को एक वर्ष में कम से कम 36 हजार और पांच साल में 1.80 लाख कि.मी. बस संचालन अनिवार्य होगा। रोडवेज में लंबे समय से बड़ी संख्या में परिचालक विभिन्न सिफारिशों के आधार पर डिपो और कार्यालयों में तैनात हैं। इसका सीधा असर बस संचालन व्यवस्था पर पड़ रहा है। वर्तमान में रोडवेज करीब 3400 बसों का संचालन कर रहा है, जबकि उपलब्ध परिचालकों की संख्या लगभग 3700 है। वीक ऑफ, स्वास्थ्य कारणों और कार्यालयी तैनाती के चलते नियमित रूट संचालन के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं मिल पा रहा।
बस सारथी व सिविल डिफेंस से चल रहा काम
रोडवेज प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत बस सारथियों और सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों की सेवाएं लेनी पड़ रही हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए छह माह पहले प्रत्येक परिचालक के लिए प्रति माह 3 हजार किलोमीटर बस संचालन की अनिवार्यता लागू की गई थी। अब प्रशासन इसे पदोन्नति की पात्रता से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सूत्रों के अनुसार रोडवेज मुख्यालय जल्द ही इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर रोडवेज बोर्ड की बैठक में मंजूरी के लिए प्रस्तुत करेगा। प्रस्ताव लागू होने पर केवल वही परिचालक पदोन्नति की दौड़ में शामिल होंगे, जिन्होंने नियमित रूप से फील्ड में कार्य किया होगा।
परिचालक की नियुक्ति वाहन कार्य के लिए
परिचालक पद की नियुक्ति रोडवेज के वाहन पर कार्य करने के लिए होती है। मेडिकल अनफिट परिचालकों को छोड़कर बाकी सभी परिचालकों को रूट पर नौकरी करने से रोडवेज को राजस्व मिलने के साथ ही आमजन को सुविधा मिलेगी।
सर्वेश्वर शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष राजस्थान परिवहन निगम मंत्रालयिक संघ

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