धर्म की आड़ में छिपे अपराधियों का पर्दाफाश, पुलिस की कार्रवाई से खुलासा
आश्रमों और गौशालाओं में बदलते रहे पहचान
जयपुर। किसी ने भगवा पहन लिया, किसी ने माथे पर तिलक लगा लिया। कोई मंदिर में घंटियां बजाने लगा तो किसी ने गौशाला में गायों की सेवा को अपनी नई पहचान बना लिया। कोई कालसर्प दोष की पूजा कराने पहुंचा और कोई अपने अवैध धंधे की सफलता के लिए मन्नत मांगने। उन्हें शायद भरोसा था कि धर्मस्थल की भीड़, साधु का वेश और पूजा-पाठ की आड़ उन्हें पुलिस से बचा लेगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हत्यारोपी, मादक पदार्थ तस्कर, सीरियल किलर और पेपर लीक के आरोपी तक के लिए मंदिर, आश्रम और धार्मिक स्थल अब केवल आस्था केंद्र नहीं, पुलिस से बचने के ठिकाने हैं। लेकिन मोबाइल सर्विलांस, डिजिटल फुटप्रिंट, मुखबिर तंत्र और लगातार पीछा करती पुलिस आखिरकार उन तक पहुंच गई।
सात साल तक पुजारी बना रहा डबल मर्डर का आरोपी
करौली जिले के सुरौठ थाना क्षेत्र के चर्चित दोहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी और चालीस हजार का इनामी नागेश सात वर्षों तक पुलिस को चकमा देता रहा। राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़ और नेपाल सहित कई स्थानों के मंदिरों में रहा। वह स्वयं को साधु-संत के रूप में प्रस्तुत करता था। आखिरकार उसे पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार कर लिया गया।
कालसर्प दोष की पूजा के बीच पकड़ा गया तस्कर
जोधपुर में मादक पदार्थ तस्करी के मामले में वांछित राकेश जाट तीन वर्षों से फरार था। उस पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित था। उज्जैन स्थित मंगलनाथ मंदिर में कालसर्प दोष की पूजा के अनुष्ठान के बीच राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टीम ने उसे दबोचा।
डॉक्टर डेथ ने आश्रम में बना ली थी पुजारी की पहचान
सीरियल किलिंग और अवैध किडनी प्रत्यारोपण गिरोह से जुड़े आरोपी डॉक्टर देवेंद्र को अपराध जगत में डॉक्टर डेथ के नाम से जाना गया। दो वर्षों तक फरार रहने के दौरान वह दौसा क्षेत्र के एक आश्रम और मंदिर में पुजारी बनकर रहा। दिल्ली पुलिस उसकी नई पहचान तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।
गौशाला में भक्त बनकर रह रही थी पेपर लीक की आरोपी
राजस्थान के बहुचर्चित पेपर लीक प्रकरण में वांछित शम्मी बिश्नोई ने उत्तरप्रदेश के बरसाना में एक गौशाला को अपना ठिकाना बना लिया था। वह गायों की सेवा करती, आरती और अन्य धार्मिक गतिविधियों में भाग लेती तथा पास ही किराए के कमरे में रहती थी।
धार्मिक स्थल सुरक्षा-कवच नहीं
अपराधी भीड़ में अपनी पहचान छिपाने, वेश बदलने और संदेह से बचने के लिए धार्मिक स्थलों का चयन करते हैं। मंदिरों और आश्रमों में आने-जाने वालों की बड़ी संख्या, अस्थायी निवास और लोगों का सहज विश्वास उनके लिए सुविधा बन जाता है।
अवैध धंधे की सफलता की मन्नत मांगने पहुंचा, पकड़ा गया
जोधपुर रेंज की साइक्लोनर टीम ने 'ऑपरेशन नश्वर' के तहत 40 हजार रुपए के इनामी तस्कर स्वरूप सिंह को माताजी के मंदिर में दर्शन करने और मन्नत मांगते समय मंदिर परिसर में पुलिस ने उसे घेर लिया।
भारत और नेपाल के धर्मस्थलों में काटता रहा फरारी : एसओजी ने 10 हजार रुपए के इनामी स्थायी वारंटी रितेश कुमार सिंह को लखनऊ से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपी करीब दो वर्षों तक भारत और नेपाल के विभिन्न मंदिरों तथा धार्मिक स्थलों में ठिकाने बदलता रहा।
कानून के शिकंजे से बच नहीं सकते
अपराधी अपराध करने के बाद कहीं भी छिप जाएं, वे कानून के शिकंजे से बच नहीं सकते।
-विशाल बंसल, एडीजी, एसओजी

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