सरिस्का में एसटी-17 बाघिन ने तीन शावकों को दिया जन्म, संरक्षण प्रयासों का नतीजा सकारात्मक
शावकों की गतिविधि सामान्य पाई गई
सरिस्का बाघ परियोजना में बाघिन एसटी-17 ने तीन शावकों को जन्म, बाघों की संख्या में वृद्धि हुई। रेंज अकबरपुर में कैमरा ट्रैप और भू-गश्त से शावकों की पुष्टि। फील्ड डायरेक्टर संग्राम सिंह कटियार ने गतिविधि सामान्य बताई। 2008 में बाघों के पुनर्वास के बाद परियोजना में बाघ आबादी लगातार बढ़ रही।
जयपुर। सरिस्का बाघ परियोजना से अच्छी खबर सामने आई है। बाघिन एसटी-17 ने तीन शावकों को जन्म दिया है। सरिस्का बाघ परियोजना के रेंज अकबरपुर क्षेत्र में कैमरा ट्रैप चित्रों एवं भू-गश्त के आधार पर इन शावकों की पुष्टि की गई है। फील्ड डायरेक्टर संग्राम सिंह कटियार ने बताया कि बाघिन एसटी-17 के साथ तीनों शावक कैमरा ट्रैप में स्पष्ट रूप से दिखाई दिए हैं तथा प्रथम दृष्टया बाघिन एवं शावकों की गतिविधि सामान्य पाई गई है।
उल्लेखनीय है कि बाघिन एसटी-17 इससे पूर्व भी शावकों को जन्म दे चुकी है। इन तीन नवजात शावकों के जन्म के साथ सरिस्का बाघ परियोजना में बाघों की संख्या में और वृद्धि हुई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2004-05 में अवैध शिकार के कारण सरिस्का से बाघ पूर्णतः विलुप्त हो गए थे। वर्ष 2008 में रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान से बाघों के स्थानांतरण द्वारा सरिस्का में बाघ पुनर्वास कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया, जो विश्व में अपनी तरह का प्रथम प्रयास था। तब से अब तक निरन्तर प्रबंधन, गहन गश्त, कैमरा ट्रैप मॉनिटरिंग, शिकार प्रजातियों के संवर्धन एवं ग्राम विस्थापन जैसे प्रयासों से बाघों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है।

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