छात्रा की मौत के बाद सीबीएसई की सख्त कार्रवाई : नीरजा मोदी स्कूल की संबद्धता तत्काल प्रभाव से रद्द, 10वीं और 12वीं के छात्र बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे

मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह अनुपस्थित या अप्रभावी थीं

छात्रा की मौत के बाद सीबीएसई की सख्त कार्रवाई : नीरजा मोदी स्कूल की संबद्धता तत्काल प्रभाव से रद्द, 10वीं और 12वीं के छात्र बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे

कॉरिडोर व खुले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, काउंसलिंग सिस्टम, एंटी-बुलिंग नीति और स्टाफ  की सतर्कता जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह अनुपस्थित या अप्रभावी थीं।

जयपुर । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने राजधानी के प्रतिष्ठित नीरजा मोदी स्कूल, शिप्रा पथ मानसरोवर की सीनियर सेकेंडरी स्तर तक की संबद्धता तत्काल प्रभाव से वापस ले ली है। यह कार्रवाई स्कूल में सुरक्षा मानकों की गंभीर चूक, लापरवाही और छात्र सुरक्षा संबंधी अनिवार्य नियमों के उल्लंघन के आधार पर की गई है। बोर्ड के अनुसार, एक नवंबर 2025 को स्कूल परिसर में कक्षा 4 की 9 वर्षीय छात्रा अमायरा के चौथी मंजिल से गिरकर मौत की दुखद घटना के बाद दो सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमिटी गठित की गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि स्कूल में सीसीटीवी की प्रभावी निगरानी, कॉरिडोर व खुले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, काउंसलिंग सिस्टम, एंटी-बुलिंग नीति और स्टाफ  की सतर्कता जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह अनुपस्थित या अप्रभावी थीं।

कमेटी में की रिपोर्ट में गंभीर आरोप
कमेटी की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि घटना के तुरंत बाद रक्तरंजित स्थल को साफ  कर दिया गया, जिससे फोरेंसिक जांच बाधित हुई। कई कर्मचारी और छात्र बिना पहचान पत्र के पाए गए तथा प्रत्येक मंजिल पर निगरानी के लिए कोई समर्पित स्टाफ  तैनात नहीं था। छात्रा को लंबे समय से बुलिंग का शिकार बनाया जा रहा था, जिसकी शिकायतों को स्कूल ने नजरअंदाज किया। सीबीएसई ने स्कूल प्रबंधन के जवाब को असंतोषजनक करार देते हुए कहा कि यह लापरवाही छात्र सुरक्षा के मूल सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है। बोर्ड ने इसे छात्रों की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला मानते हुए तत्काल संबद्धता रद्द करने का निर्णय लिया।

आदेश के अनुसार, सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्र बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे, जबकि कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों को अन्य सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में स्थानांतरण की व्यवस्था की जाएगी। इस घटना ने न केवल अभिभावकों में रोष पैदा किया है, बल्कि स्कूलों में सुरक्षा मानकों की अनिवार्यता पर फिर से बहस छेड़ दी है। पुलिस जांच भी जारी है और स्कूल प्रबंधन पर सबूत मिटाने के आरोप लगे हैं। 

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