राजस्थान में एआईटीपी बसों पर सख्ती : 5 हजार से ज्यादा वाहनों पर संकट, अब राजस्थान में रजिस्ट्रेशन कराना होगा अनिवार्य
60 दिन से अधिक नहीं रह सकेगा गृह राज्य से बाहर
नागालैंड व अरुणाचल में पंजीकृत बसों की राजस्थान में एंट्री अब बिना स्थानीय रजिस्ट्रेशन संभव नहीं। केंद्र के संशोधित नियमों से 5,000 से अधिक बसें प्रभावित होंगी। 60 दिन सीमा, GPS अनिवार्यता और फर्जीवाड़े पर रोक से टैक्स बढ़ेगा। ई-व्हीकल्स को छूट देकर पर्यावरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
जयपुर। नागालैंड, अरूणाचल प्रदेश में पंजीयन बसों को अब राजस्थान में एन्ट्री नहीं मिलेगी। इन बसों को राज्य में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। इससे एआईटीपी के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े पर रोक लगने के साथ ही राज्य के टैक्स रेवेन्यू में भी वृद्धि होगी। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से आॅल इंडिया टूरिस्ट परमिट (एआईटीपी) नियमों में किए गए संशोधन के बाद राजस्थान में बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। राजस्थान परिवहन विभाग ने प्रदेशभर के आरटीओ को नए नियमों की सख्ती से पालना कराने के निर्देश जारी किए हैं। इन बदलावों का सीधा असर उन 5 हजार से अधिक बसों पर पड़ेगा, जो बाहरी राज्यों में पंजीकृत होकर राजस्थान में संचालित हो रही हैं। अब टूरिस्ट परमिट केवल वास्तविक पर्यटन वाहनों के लिए ही जारी किया जाएगा और आवेदन वाहन के पंजीकरण क्षेत्र के आरटीओ में ऑनलाइन करना अनिवार्य होगा।
60 दिन से अधिक नहीं रह सकेगा गृह राज्य से बाहर
संशोधित प्रावधानों के अनुसार टूरिस्ट परमिट वाहन यात्रा अपने गृह राज्य से शुरू कर वहीं समाप्त करेगा। कोई भी वाहन गृह राज्य से बाहर 60 दिनों से अधिक नहीं रहेगा। टूरिस्ट बसें समूह में यात्रियों को ले जा सकेंगी और स्टेज कैरिज की तरह रास्ते में सवारियां नहीं उठा पाएंगी। बस में मौजूद सभी पर्यटकों की लिखित या डिजिटल सूची रखना अनिवार्य होगा। सूची में यात्रियों का मूल स्थान और गंतव्य स्पष्ट होना जरूरी है। साथ ही सभी बसों में जीपीएस-वीएलटीडी और पैनिक बटन लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
दूसरे राज्यों में पंजीयन के बाद दौड़ रही
परिवहन विभाग के अनुसार बड़ी संख्या में बस संचालकों ने अधिक टैक्स से बचने के लिए अपने वाहन अन्य राज्यों में पंजीकृत करा रखे हैं। इनमें करीब 2 हजार बसें मध्य प्रदेश में लगभग 700-00 बसें अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में, करीब 600 बसें उत्तर प्रदेश में, 300 बसें दमन और दीव में तथा लगभग 400 बसें बिहार में पंजीकृत हैं। सख्ती बढ़ने पर इन बसों के राजस्थान में पुन: पंजीयन की संभावना जताई जा रही है।
ई-व्हीकल्स को मिलेगा बढ़ावा
केंद्र सरकार ने बैटरी, मेथेनॉल या इथेनॉल से चलने वाले टूरिस्ट वाहनों को परमिट फीस से छूट देकर पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने का संकेत दिया है। परिवहन विभाग को उम्मीद है कि नए नियम लागू होने से अवैध संचालन रुकेगा, सुरक्षा मानक मजबूत होंगे और राज्य को टैक्स राजस्व में बड़ा लाभ मिलेगा।
केन्द्र सरकार की ओर से बाहरी राज्यों में पंजीकृत बसों को लेकर नए संशोधन नियम 2026 लागू कर दिए गए हैं। इसकी अनुपालना में राजस्थान के लिए सभी आरटीओ-डीटीओ को निर्देश जारी किए गए है।
- पुरुषोत्तम शर्मा, परिवहन आयुक्त

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