जयपुर में ‘सुरों की त्रिवेणी’ कार्यक्रम में लोकप्रिय गीतों से समझाए रागों के रहस्य, रवि-मदन मोहन और रविंद्र जैन को दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम का निर्देशन चंद्र कटारिया ने किया
जयपुर। जवाहर कला केंद्र के रंगायन सभागार में शनिवार को सुरों की त्रिवेणी नामक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें लोकप्रिय फिल्मी गीतों के जरिए शास्त्रीय संगीत के रागों को बहुत ही सरल और रोचक तरीके से समझाया गया। यह रोहित कटारिया संगीत संस्था और कटारिया मनोरंजन समूह का तीसरा कार्यक्रम था, जिसमें महान संगीतकार रवि, मदन मोहन और रविंद्र जैन को श्रद्धांजलि दी गई। राग, सुर, प्रसिद्ध गीत, रोचक किस्से और जीवंत संगीत के मेल ने इस शाम को ज्ञान और मनोरंजन दोनों से भरपूर बना दिया। डॉ. आकांक्षा दवे कटारिया और रोहित कटारिया ने कभी शिक्षक बनकर रागों की बारीकियां समझाईं, तो कभी गायक बनकर तीनों संगीतकारों की रचनाएं गाईं। वृंदा कटारिया ने दो मधुर गीत गाकर कार्यक्रम में भावनात्मक रंग भरा। कार्यक्रम का निर्देशन चंद्र कटारिया ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत राग मालकोस पर आधारित गीतों से हुई, जिनमें रवि द्वारा रचित और मोहम्मद रफी द्वारा गाए गीत शामिल थे। इसके बाद मदन मोहन के राग कलावती आधारित गीत प्रस्तुत हुए। एक विशेष गीत के जरिए सुर और स्वर के तालमेल को सरल उदाहरणों से समझाया गया, और बताया गया कि शास्त्रीय संगीत की समझ फिल्मी गीत सुनने का नजरिया भी बदल देती है। इसके बाद राग किरवानी, भैरवी और यमन पर आधारित गीत प्रस्तुत हुए। यह भी दिखाया गया कि एक ही राग अलग-अलग भावनाओं में कैसे अलग रंग दिखाता है। रविंद्र जैन की रचनाओं में छिपी शास्त्रीयता और बारह स्वरों के प्रयोग को भी अलग.अलग रागों के उदाहरण से समझाया गया। उनके एक भक्ति गीत ने आध्यात्मिक पक्ष को उजागर किया। चूंकि यह कार्यक्रम शिक्षक दिवस के अवसर पर हुआ, इसमें गुरु और शिक्षा का भाव भी विशेष रूप से दिखा। कलाकारों ने दर्शकों को श्रोता के साथ-साथ विद्यार्थी भी बनाया।

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