पंजाब के ‘रण’ में राजस्थान के दो योद्धा आमने-सामने: बघेल को असम, सुरजेवाला को गुजरात, भगत को छत्तीसगढ़, प्रसाद को महाराष्टÑ और मोहन को आंध्रप्रदेश का सौपा प्रभार

कांग्रेस ने कई राज्यों में संगठनात्मक पुनर्गठन कर नियुक्त किए नए प्रभारी

पंजाब के ‘रण’ में राजस्थान के दो योद्धा आमने-सामने: बघेल को असम, सुरजेवाला को गुजरात, भगत को छत्तीसगढ़, प्रसाद को महाराष्टÑ और मोहन को आंध्रप्रदेश का सौपा प्रभार
कांग्रेस आलाकमान ने बड़ा संगठनात्मक फेरबदल करते हुए सचिन पायलट को पंजाब का नया एआईसीसी (AICC) प्रभारी नियुक्त किया है। पायलट को पंजाब की कमान मिलने से राज्य में गुटबाजी खत्म करने और पार्टी को मजबूत करने की उम्मीद है। वहीं भाजपा ने भी सतीश पूनियां को पंजाब का दायित्व दिया है।

जयपुर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए शनिवार को राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। पायलट अब तक छत्तीसगढ़ के प्रभारी महासचिव थे। पंजाब जैसे राजनीतिक रूप से अहम राज्य की कमान पायलट को दिए जाने के बाद राजस्थान की राजनीति में भी इसके मायने तलाशे जा रहे हैं। खास बात यह है कि पंजाब में कांग्रेस की रणनीति संभालने जा रहे पायलट का मुकाबला सीधे तौर पर तो नहीं, लेकिन राजनीतिक रणनीति के स्तर पर राजस्थान के ही एक अन्य प्रमुख भाजपा नेता सतीश पूनियां से जुड़ता नजर आ रहा है। भाजपा पहले ही पूनियां को पंजाब का प्रभारी बना चुकी है।

राजस्थान की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे पायलट और पूनिया अब पंजाब में अपनी-अपनी पार्टियों की रणनीति को धार देते नजर आएंगे। कांग्रेस के इस फैसले को राजनीतिक हलकों में भाजपा की रणनीति की काट के तौर पर देखा जा रहा है। पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने न केवल उन्हें राष्टÑीय संगठन में अहम भूमिका दी है, बल्कि पंजाब में पार्टी को मजबूत करने के लिए एक युवा और आक्रामक चेहरे को आगे किया है। पायलट की राजनीतिक पहचान राजस्थान से आगे भी कांग्रेस के प्रभावशाली युवा नेताओं में रही है। ऐसे में पंजाब जैसे राज्य की जिम्मेदारी मिलना उनके राजनीतिक कद को राष्टÑीय स्तर पर और मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

कांग्रेस ने कई राज्यों में बदले प्रभारी

पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी आदेश के अनुसार, कांग्रेस ने केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि कई राज्यों के लिए नए प्रभारियों की नियुक्ति की है। पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम, रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात, सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, श्रीधर प्रसाद को महाराष्टÑ और पी.वी. मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया है। इन नियुक्तियों को कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्गठन और राज्यों में पार्टी की राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले विधानसभा चुनावों और संगठन को सक्रिय करने के लिहाज से इन नियुक्तियों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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पंजाब की जिम्मेदारी के बहाने राजस्थान के दो नेताओं की राष्टÑीय राजनीति में भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है। सतीश पूनियां लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जबकि सचिन पायलट कांग्रेस के प्रमुख राष्ट्रीय चेहरों में शामिल हैं। दोनों की राजनीतिक शैली अलग है, लेकिन दोनों का राजस्थान से गहरा राजनीतिक जुड़ाव है। अब पंजाब में भाजपा और कांग्रेस की रणनीति को लेकर दोनों नेताओं की भूमिका पर नजर रहेगी। कांग्रेस के लिए पायलट की चुनौती पंजाब में संगठन को मजबूत करने, गुटबाजी पर नियंत्रण और पार्टी के जनाधार को विस्तार देने की होगी। वहीं भाजपा की ओर से पूनिया पहले से ही पार्टी की रणनीति को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।

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