अमृत 2.0 में राजस्थान पिछड़ा, सीवरेज और सेप्टेज प्रबंधन पर काम जीरो

अन्य बड़े राज्यों में जल आपूर्ति के साथ-साथ सीवरेज का अच्छा कार्य

अमृत 2.0 में राजस्थान पिछड़ा, सीवरेज और सेप्टेज प्रबंधन पर काम जीरो

केन्द्र के अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों को जल-सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है, लेकिन लोकसभा में पेश ताजा सरकारी आंकड़े यह संकेत देते हैं कि राजस्थान इस मिशन के क्रियान्वयन में अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया है।

जयपुर। केन्द्र के अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत 2.0) का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों को जल-सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है, लेकिन लोकसभा में पेश ताजा सरकारी आंकड़े यह संकेत देते हैं कि राजस्थान इस मिशन के क्रियान्वयन में अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया है। जनवरी 2025 से अब तक राजस्थान में 104 जल आपूर्ति परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिनकी कुल लागत 1244.51 करोड़ है। राजस्थान में एक भी सीवरेज या सेप्टेज प्रबंधन परियोजना स्वीकृत नहीं की गई, जबकि देश के कई अन्य बड़े राज्यों में जल आपूर्ति के साथ-साथ सीवरेज पर भी समान रूप से काम हो रहा है।

सीवरेज मोर्चे पर राजस्थान शून्य
अमृत 2.0 का एक प्रमुख लक्ष्य 500 अमृत शहरों में सीवरेज और सेप्टेज प्रबंधन की सार्वभौमिक कवरेज है, लेकिन राजस्थान का रिकॉर्ड इस मोर्चे पर बेहद कमजोर नजर आता है। जहां महाराष्ट्र में 10 सीवरेज परियोजनाओं पर 3497 करोड़, मध्य प्रदेश में 16 परियोजनाओं पर 3485 करोड़, वहीं राजस्थान का आंकड़ा शून्य है। यह स्थिति दर्शाती है कि राज्य सरकार ने या तो सीवरेज को प्राथमिकता नहीं दी या फिर परियोजनाओं की योजना और प्रस्तुति में गंभीर ढिलाई बरती गई।

सीएम के सख्त निर्देश
सीएम भजनलाल शर्मा ने हाल ही रिव्यू के दौरान अमृत 2.0 के अन्तर्गत सीवरेज कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में देरी से लागत बढ़ती है। किसी भी विकास कार्य में देरी के लिए जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सिर्फ पानी की लाइनें, लेकिन गंदे पानी का क्या
राजस्थान में शहरी जल संकट केवल पीने के पानी तक सीमित नहीं है। गंदे पानी के निस्तारण, पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग की व्यवस्था न होने से पर्यावरणीय संकट गहराने की आशंका है। अमृत 2.0 के तहत देशभर में अब तक 6,649 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता स्वीकृत की गई है, लेकिन राजस्थान इसमें योगदान नहीं दे सका।

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प्रशासनिक ढिलाई के संकेत
केन्द्र ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि अमृत 2.0 के तहत परियोजनाओं के चयन, प्राथमिकता और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्यों की है। ऐसे में राजस्थान की कमजोर भागीदारी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या शहरी निकायों ने समय पर परियोजना रिपोर्ट तैयार नहीं की, क्या राज्य स्तर पर समन्वय और मॉनिटरिंग कमजोर रही या फिर राजनीतिक-प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी रही। 

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