जंपस्टार्ट तकनीक से जन्मा 'गोडावण का बच्चा' 11 दिन से लापता, 50 गार्ड्स का घोंसले के चारों ओर पहरा
भारी सुरक्षा के बीच गायब होना गंभीर जांच का विषय
करीब एक दशक के लंबे इंतजार और वैज्ञानिक सफलताओं के बाद मिली खुशी गायब होती दिख रही। जंपस्टार्ट तकनीक से गुजरात की धरती पर पैदा हुआ पहला गोडावण का बच्चा लापता।
जैसलमेर। करीब एक दशक के लंबे इंतजार और वैज्ञानिक सफलताओं के बाद मिली खुशी गायब होती दिख रही है। जंपस्टार्ट तकनीक से गुजरात की धरती पर पैदा हुआ पहला गोडावण का बच्चा लापता हो गया है। हैरानी की बात यह है कि जिस चूजे की सुरक्षा में 50 गार्ड्स तैनात थे और जिसकी निगरानी सुरक्षा के स्तर पर की जा रही थी, वह बाड़े की एक चूक के कारण रहस्यमयी ढंग से गायब है। कच्छ के नलिया में केवल तीन मादा गोडावण बची हैं, वहां नर पक्षी नहीं होने से वंश आगे बढ़ना असंभव था। इसे बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक साहसिक कदम उठाया था, जैसलमेर के ब्रीडिंग सेंटर से एक फर्टाइल अंडा चुना गया। 21 मार्च को पोर्टेबल इनक्यूबेटर में रखकर अंडे को 770 किमी दूर कच्छ ले जाया गया। 19 घंटे के सफर के बाद अंडे को गुजरात में एक जंगली मादा के घोंसले में खराब अंडे से बदल दिया गया। 26 मार्च, 2026 को चूजे ने जन्म लिया, जिसे वन्यजीव संरक्षण के इतिहास की बड़ी जीत माना गया।
गुजरात वन विभाग ने इस नन्हे पक्षी को बचाने के लिए सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए थे जो आमतौर पर देश के अति-विशिष्ट व्यक्तियों को मिलते हैं, जिसमे 50 गार्ड्स का घोंसले के चारों ओर 24 घंटे कड़ा पहरा रहता है। इलाके की ओर जाने वाली सभी सड़कों को सील कर दिया गया था। वॉच टावर से दूरबीन के जरिए नजर रखी जा रही थी। इसके बावजूद, 18 अप्रैल के बाद से चूजे को अपनी मां के साथ नहीं देखा गया है। आशंका है कि सुरक्षा घेरे की किसी बारीक चूक का फायदा उठाकर कोई जंगली बिल्ली, सियार या शिकारी कुत्ता अंदर घुस गया और 26 दिन के इस मासूम को अपना शिकार बना लिया।
वाइल्ड लाइफ बायोलॉजिस्ट ने की पुष्टि
वाइल्ड लाइफ बायोलॉजिस्ट सुमित डूकिया ने पुष्टि की है, कि चूजा मिसिंग है। उन्होंने कहा, जैसलमेर में हमने देखा है कि छोटे बच्चों की मृत्यु दर अधिक होती है, लेकिन इतनी भारी सुरक्षा के बीच गायब होना गंभीर जांच का विषय है। अगर यह बच्चा जीवित रहता और नर पक्षी बनता, तो यह गुजरात में गोडावण की आबादी को पुनर्जीवित करने की एकमात्र उम्मीद थी। अब गुजरात में केवल तीन मादाएं बची हैं, जिनका भविष्य फिर से अंधेरे में है। राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण अब पूरी दुनिया में 150 से भी कम बचे हैं।

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