कोहिनूर हीरे पर ममदानी का बयान: किंग चार्ल्स से न्यूयॉर्क मेयर की अपील, भारत का कोहिनूर वापस करो
न्यूयॉर्क मेयर ने कोहिनूर की वापसी की मांग
न्यूयॉर्क के मेयर जोहऱान ममदानी ने किंग चार्ल्स की यात्रा के दौरान कोहिनूर हीरा भारत लौटाने का मुद्दा छेड़ दिया है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक न्याय और भारतीय विरासत का प्रतीक बताया। 1849 में ब्रिटिश कब्जे में गया यह बेशकीमती रत्न आज भी भारत और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
न्यूयॉर्क। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहऱान ममदानी ने कोहिनूर हीरे की वापसी को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस को हवा दे दी है। हाल ही में ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय की अमेरिका यात्रा के दौरान ममदानी ने संकेत दिया कि यदि उनसे मुलाकात होती है, तो वह औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं रहेंगे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ कहा कि वह कोहिनूर हीरे को भारत लौटाने की मांग उठाएंगे।
ममदानी का यह बयान केवल कूटनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि ऐतिहासिक मुद्दों को दोबारा सामने लाने की कोशिश माना जा रहा है। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी भारत से जुड़ी रही है—उनकी मां मीरा नायर भारतीय मूल की हैं, जिससे उनके विचारों में भारतीय इतिहास और विरासत का असर साफ दिखाई देता है।
कोहिनूर हीरा भारत के लिए सिर्फ एक बहुमूल्य रत्न नहीं, बल्कि औपनिवेशिक काल की याद और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। यह हीरा मूल रूप से आंध्र प्रदेश की कोल्लूर खान से निकला था और समय के साथ मुगलों और सिख शासकों के पास रहा। लेकिन 1849 में द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लाहौर संधि के तहत इसे अपने कब्जे में ले लिया। उस समय सिख शासक महाराजा दलीप सिंह महज 10 साल के थे।
आज यह हीरा ब्रिटेन में सुरक्षित है और पूर्व में रानी एलिजाबेथ के ताज का हिस्सा रहा है। भारत लगातार इसे अपनी धरोहर बताते हुए वापसी की मांग करता रहा है, जबकि ब्रिटेन इसे कानूनी रूप से प्राप्त संपत्ति बताता है। ममदानी का बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी को लेकर आवाजें तेज हो रही हैं। ग्रीस और अफ्रीकी देशों की तरह भारत में भी यह मुद्दा भावनात्मक और ऐतिहासिक दोनों स्तरों पर गहराई से जुड़ा हुआ है।

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