अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता पर साधा निशाना : भारत और चीन को बताया 'नरक', नागरिकता कानूनों की आलोचना की

ट्रंप का विवादित बयान: जन्मसिद्ध नागरिकता और भारत-चीन पर टिप्पणी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता पर साधा निशाना : भारत और चीन को बताया 'नरक', नागरिकता कानूनों की आलोचना की

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता नीति की आलोचना करते हुए भारत और चीन जैसे देशों के लिए विवादास्पद शब्दों का प्रयोग किया है। उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर साझा पत्र में प्रवासियों पर संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। ट्रंप ने इस संवैधानिक प्रावधान को बदलने और आप्रवासन कानूनों को और सख्त करने की वकालत की है।

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर चल रही बहस के बीच भारत और चीन सहित कुछ देशों को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की है, जिससे नयी राजनीतिक चर्चा छिड़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पत्र साझा करते हुए इन देशों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया और जन्मसिद्ध नागरिकता सहित कई अमेरिकी नागरिकता कानूनों की आलोचना की।

पत्र में कैलिफ़ोर्निया के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नियुक्तियों को लेकर दावा किया गया है कि वहां भारत और चीन से आए लोगों का वर्चस्व है, हालांकि इसके समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। पत्र का मुख्य विषय जन्मसिद्ध नागरिकता की नीति है, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता मिलती है। इसमें आरोप लगाया गया है कि इस प्रावधान का उपयोग कर प्रवासी अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी देश में लाते हैं।

पत्र में कहा गया, "यहां पैदा होने वाला बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वे चीन, भारत या दुनिया के किसी अन्य 'नरक' से अपने पूरे परिवार को यहां ले आते हैं।" इस पत्र की भाषा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि इस मुद्दे पर निर्णय न्यायालयों या वकीलों के बजाय जनमत से होना चाहिए। इसमें एक सामाजिक माध्यम सर्वेक्षण का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि बहुमत इस नीति में बदलाव के पक्ष में है, साथ ही न्यायिक प्रक्रिया पर अविश्वास भी व्यक्त किया गया है। पत्र में अमेरिकी नागरिक स्वतंत्रता संघ (एसीएलयू) की भी आलोचना की गई है और उस पर ऐसी नीतियों का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है, जो कथित रूप से अवैध प्रवासियों को लाभ पहुंचाती हैं।

इसके अलावा पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रवासी स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं का दुरुपयोग करते हैं, जिससे करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसमें कैलिफ़ोर्निया जैसे प्रांतो में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है। पत्र में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही का भी संदर्भ दिया गया है और संवैधानिक व्याख्या को वर्तमान परिस्थितियों से असंगत बताया गया है।

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