ऑडिट समितियों की बैठकें समय पर हों, वित्त विभाग के सख्त निर्देश
वित्तीय अनुशासन: लंबित ऑडिट मामलों के लिए सख्त निर्देश
प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया ने सभी विभागों को प्रतिवर्ष चार त्रैमासिक बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। गबन और वित्तीय अनियमितताओं के त्वरित निस्तारण हेतु यह कदम उठाया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इन नियमों की पालना अनिवार्य होगी, ताकि CAG रिपोर्ट में किसी भी प्रतिकूल टिप्पणी से बचा जा सके।
जयपुर। वित्त विभाग ने सभी विभागों को ऑडिट समिति की बैठकें निर्धारित समयावधि में आयोजित करने के निर्देश जारी किए हैं। अंकेक्षण अनुभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विभागों एवं उनके अधीन बोर्ड और निगमों से जुड़े लंबित अंकेक्षण प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिए नियमित बैठकें अनिवार्य हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि महालेखाकार के निरीक्षण प्रतिवेदन, अंकेक्षण आपत्तियां, सीएजी रिपोर्ट के अनुच्छेद, जनलेखा समिति की सिफारिशें, गबन एवं वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की समीक्षा समय पर होनी चाहिए। इसके लिए प्रशासनिक सचिव की अध्यक्षता में गठित ऑडिट समितियों की वर्ष में चार बैठकें त्रैमासिक रूप से आयोजित करना जरूरी है। निर्देशों के अनुसार पहली बैठक जून तक, दूसरी सितंबर तक, तीसरी दिसंबर तक और चौथी मार्च तक आयोजित करना अनिवार्य रहेगा। विभाग ने यह भी कहा कि निर्धारित संख्या में बैठकें नहीं होने पर इसका उल्लेख सीएजी रिपोर्ट में किया जाता है, जिसे गंभीरता से लिया जाता है। प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया ने सभी विभागों से वित्तीय वर्ष 2026-27 में इन निर्देशों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करने को कहा है।

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