सरहद पर ड्रोन वॉरियर्स का सुरक्षा चक्र : भैरव बटालियन और अशनी ड्रोन बदलेंगे मरुस्थलीय सीमा सुरक्षा का भूगोल, आधुनिक तकनीक और हाइब्रिड वॉरफेयर का दिखेगा संगम 

ऊंटों की गश्त और पैदल जवानों की चौकसी के दिन लदेंगे

सरहद पर ड्रोन वॉरियर्स का सुरक्षा चक्र : भैरव बटालियन और अशनी ड्रोन बदलेंगे मरुस्थलीय सीमा सुरक्षा का भूगोल, आधुनिक तकनीक और हाइब्रिड वॉरफेयर का दिखेगा संगम 

रेगिस्तान की तपती रेत और सुदूर थार के मरुस्थल में भारत-पाकिस्तान के बीच खिंची 1,070 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा व्यवस्था अब एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रही। दशकों से जिस सीमा पर केवल ऊंटों की गश्त और पैदल जवानों की चौकसी का पहरा हुआ करता था, वहां अब आधुनिक तकनीक और हाइब्रिड वॉरफेयर का एक ऐसा संगम देखने को मिल रहा है जिसे भारतीय सेना ने सुरक्षा का नया चक्रव्यूह नाम दिया।

जैसलमेर। रेगिस्तान की तपती रेत और सुदूर थार के मरुस्थल में भारत-पाकिस्तान के बीच खिंची 1,070 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा व्यवस्था अब एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रही है। दशकों से जिस सीमा पर केवल ऊंटों की गश्त और पैदल जवानों की चौकसी का पहरा हुआ करता था, वहां अब आधुनिक तकनीक और हाइब्रिड वॉरफेयर का एक ऐसा संगम देखने को मिल रहा है जिसे भारतीय सेना ने सुरक्षा का नया चक्रव्यूह नाम दिया है। इस पूरी सामरिक योजना के केंद्र में दो नई शक्तियां हैं भैरव बटालियन और अशनी ड्रोन प्लाटून। यह महज एक नई तैनाती नहीं है, बल्कि यह भारतीय सेना के उस दूरगामी विजन का हिस्सा है जिसके तहत 2027 तक पूरी पैदल सेना को ड्रोन वॉरियर्स में तब्दील करने की तैयारी है। वर्तमान में जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर और बीकानेर सेक्टरों में जिस तरह से ड्रोन और जवानों की यह विशेष टीम संयुक्त रूप से काम कर रही है, उसने सीमा पार बैठे शत्रुओं की नींद उड़ा दी है।

जमीन से लेकर आसमान तक नजर : नई सुरक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब सीमा केवल जमीन पर ही नहीं, बल्कि आसमान से भी 24 घंटे रडार और हाई-टेक कैमरों की जद में है। अशनी ड्रोन प्लाटून सेना की एक ऐसी सूक्ष्म लेकिन अत्यंत घातक इकाई है जिसमें लगभग 25 से 30 विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान शामिल हैं। ये जवान उन आधुनिक ड्रोन्स को संचालित करते हैं जो न केवल जासूसी करने में माहिर हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर स्वयं मिसाइल की तरह दुश्मन पर गिरकर उसे तबाह कर सकते हैं। 

बदलेगी भविष्य के युद्धों की तस्वीर : भारतीय सेना का यह ड्रोन वॉरियर प्रोजेक्ट भविष्य के युद्धों की बदलती तस्वीर को ध्यान में रखकर बनाया गया है। पूर्व में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह स्पष्ट हो गया था कि भविष्य की लड़ाइयों में हवाई खतरों और ड्रोन तकनीक की भूमिका निर्णायक होने वाली है। इसी अनुभव को आधार बनाकर सेना अब अपनी सभी 350 से ज्यादा पैदल सेना बटालियनों को इसी तकनीक से लैस करने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है। योजना के अनुसार, अगले एक साल के भीतर इन बटालियनों की तैयारी की गति तेज की जाएगी ताकि 2027 तक देश की हर इन्फैंट्री यूनिट के पास अपनी ड्रोन टुकड़ी हो। 

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