सैटेलाइट मैपिंग से भी गायब सेमलाबेह गांव

आवास योजना का गरीब लोगों को नहीं मिल रहा लाभ

सैटेलाइट मैपिंग से भी गायब सेमलाबेह गांव
आवास योजना के लिए आवेदन भी कर रखे हैं लेकिन लापरवाही से इस गांव का सेटेलाइट मैपिंग में भी कई जिक्र नहीं है।

चंदीपुर। ग्राम पंचायत खेरखेड़ा के सेमलाबेह गांव में ग्रामीणों को आवास  योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों को कहना है कि 10-12 वर्षों से सेमलाबेह गांव के गरीब परिवार के लोग प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए दर दर भटक रहे है, लेकिन आज भी यहां के लोगों को पक्का मकान नसीब नही हो सका। सेमलाबेह गांव के लोग आज भी कच्चे टूटे फूटे मकान, प्लास्टिक की चादर बिछाकर यह परिवार अपनी जिंदगी गुजर बसर कर रहें है, इतना ही नहीं बारिश के मौसम में कच्ची दिवारे गिर जाती है, जिससे हादसे होने की संभावना बनी रहती है। गरीबी की मार झेल रहे सेमलाबेह गांव के लोगों के परिवारों का मजदूरी से ही गुजर बसर होता है लेकिन महंगाई की मार के चलते इन परिवारों को महज दो वक्त की रोटी मिल पाती है यही वजह है कि यह परिवार उम्र के इस पड़ाव पर भी अपना पक्का घर नहीं बना पा रहे हैं। 

सैटेलाइट मैपिंग में भी गायब है सेमलाबेह गांव
लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन भी कर रखे हैं लेकिन लापरवाही से इस गांव का सेटेलाइट मैपिंग में भी कई जिक्र नहीं है। यही कारण है कि सेमलाबेह गांव का जियो टैगिंग भी नही हो पाती। यहीं कारण है कि आज भी सेमलाबेह गांव के लोग अपना पक्का घर बनाने का सपना आज तक भी हकीकत में नही बदल सके। वैसे तो सेमलाबेह गांव में 220 परिवार निवास करते है, यहां पूरे गांव में लोग मेहनत मजदूरी पर निर्भर है। 

सेमलाबेह गांव में 10-12 साल बीत जाने के बाद भी किसी भी परिवार को आवास योजना का लाभ नहीं मिला। हमारे गांव का नाम आॅनलाइन में नही बता रहा है, इसको लेकर हमने कई बार शिकायत भी की लेकिन ध्यान नहीं दिया।  
- नन्नू राम भील ग्रामीण

हमारे गांव में किसी भी परिवार को आवास नहीं मिलने के कारण गांव में कच्चे मकान हैं कच्ची दीवारों में की मिट्टी लगाते लगाते हमारे हाथों में छाले पड़ गए, लेकिन अभी तक किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। बरसात के मौसम में कच्ची दीवारें गिर जाती है, जिससे हादसे होने की संभावना बनी रहती है।  
- लीला बाई ग्रामीण 

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हमारे गांव का नाम जियो टैगिंग में नहीं बता रहा है, इसको लेकर हमने उच्च अधिकारियों को कई बार अवगत करा दिया है, उसके बावजूद भी हमारे गांव का नाम जियो टैगिंग में नही आया और हमे आवास का लाभ नहीं मिला। ग्रामीणों की मांग है कि हमें आवास योजना का लाभ मिले। 
- बद्रीलाल भील ग्रामीण

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इस गांव में 220 परिवार निवास करते है, जिसमे गरीब परिवार के लोग रहते है इस गांव का नाम आवास ऐप में नाम नहीं खुलने की वजह से किसी भी व्यक्ति का नाम पीएम आवास में नही जुड़ा है, इसको लेकर उच्च अधिकारियों को भी अवगत करवा रखा है। 
- पवन कुमार पारेता 

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ग्राम रोजगार सहायक ग्राम पंचायत खेरखेड़ा
मेपिंग में अगर गांव का नाम नहीं आ रहा है तो यह टेक्निकल प्रोब्लम है। 2011 में पीएम आवास की सूचियां आई थी, उस समय अगर इस गांव की मेपिंग नहीं हुई तो यह बड़ी प्रोब्लम है इसको में दिखावा लेता हूं। 
- कालू राम मीणा, विकास अधिकारी पंचायत समिति मनोहरथाना

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