बायोलॉजिकल पार्क: हर माह 1 लाख का मिल रहा झटका
25 लाख का सौलर सिस्टम 4 महीने बाद भी नहीं हुआ शुरू
कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क हर महीने एक लाख रुपए बिजली का बिल करंट झेल रहा है। जबकि, पार्क में 40 किलोवाट का सौलर सिस्टम लगा हुआ है। लेकिन, लेटलतीफी के कारण 4 माह बाद भी शुरू नहीं हो सका। ऐसे में वन्यजीव विभाग को प्रतिमाह 80 हजार से 1 लाख रुपए का बिजली बिल चुकाना पड़ रहा है। यदि, सौलर शुरू हो जाता तो सूरज से बनने वाली बिजली से बायोलॉजिकल पार्क का बिल आधा रह जाता। जिससे विभाग को बजट की बचत हो सकती है। दरअसल, कैम्पा योजना के तहत बायोलॉजिकल पार्क में 25 लाख की लागत से गत जनवरी माह में 40 किलोवॉट का सौलर सिस्टम लगाया गया था। फाउंडेशन लगने के बाद फरवरी में सौलर प्लेटें भी लगा दी गई। इसके बावजूद अब तक सौलर सिस्टम शुरू नहीं हो सका। जबकि, वन्यजीव विभाग बजट की कमी से जूझता रहता है। ऐसे में वर्तमान में पार्क का अप्रेल-मई माह का बिजली का बिल बकाया चल रहा है।
हर महीने 1 लाख का बिजली बिल
वन्यजीव विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का बिजली बिल प्रतिमाह 1 लाख से अधिक का आता है। सर्दियों की अपेक्षा गर्मियों में खपत अधिक बढ़ जाती है। यहां मांसाहारी वन्यजीवों के 6 एनक्लोजर हैं, जिनके नाइट शेल्टरों में कूलिंग के लिए डक्टिंग चलाई जाती है। इसके अलावा पानी की टंकी भरने सहित अन्य व्यवस्था के लिए नियमित मोटर चलाई जाती है। जिससे बिजली की खपत अधिक रहती है। ऐसे में सालाना बिजली बिल 12 लाख से अधिक पहुंच जाता है, जिसे भरने में विभाग को पसीने आ जाते हैं।
मांसाहारी वन्यजीवों के शेल्टर में चल रहे डक्टिंग
इन दिनों जिले में भीषण गर्मी पड़ रही है। जिससे इंसान ही नहीं वन्यजीव भी बेहाल है। ऐसे में बायोलॉजिकल पार्क में मांसाहारी वन्यजीवों के नाइट शेल्टर में गर्मी से बचाव के लिए कूलिंग सिस्टम डक्टिंग चलाई जा रही है। जिससे बिजली की खपत बढ़ रही है। हालांकि, गर्मी से बचाव के लिए डक्टिंग चलाए जाना आवश्यक है।
सालाना 6 लाख की हो सकती बचत
राजस्थान रील इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंस्टूमेंट लिमिटेड के अशोक कुमार ने बताया कि अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में 40 किलोवाट का सौलर सिस्टम लगाया जा रहा है। एक किलोवाट औसतन 3 से 4 यूनिट बिजली का उत्पादन करता है। ऐसे में चालीस किलोवाट सौलर से प्रतिदिन 160 यूनिट बिजली जनरेट होगी और सालभर में 58 हजार से अधिक यूनिट का उत्पादन होगा। ऐसे में एक यूनिट 10 रुपए चार्ज के हिसाब से बायोलॉजिकल पार्क को 5.84 लाख रुपए की बचत हो सकती है। हालांकि, सौलर से बिजली का उत्पादन सूरज के ताप पर निर्भर करता है। ऐसे में औसतन, विभाग को सालाना बिजली बिल में 6 लाख की बचत होने से 12 लाख का बिल आधा रह जाएगा।
अप्रेल-मई का बकाया चल रहा बिल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का अप्रेल-मई का बिजली बिल बकाया चल रहा है। बायोलॉजिकल पार्क संचालित हुए करीब दो साल से अधिक समय हो गया है लेकिन इसके मेंटिनेंस को लेकर बायोलॉजिकल पार्क के नाम से एक बार भी बजट नहीं मिला। पार्क के मेंटिनेंस का खर्चा रियासतकालीन चिड़ियाघर के बजट से चल रहा है। ऐसे में यहां सौलर सिस्टम लगने से विभाग को बिजली के बिल में काफी राहत मिल सकेगी।
क्यों शुरू नहीं हो पा रहा सौलर
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सौलर से बनने वाली बिजली को स्टोर करने के लिए एक मीटर लगता है। उसमें स्टोर हुई बिजली के बदले विद्युत कम्पनी से बिजली मिलती है। इसके लिए नेट मिटरिंग करनी होती है। लेकिन, इस प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट की आवश्यकता होती है, जिसकी पूर्ति न हो पाने की वजह से सौलर सिस्टम शुरू नहीं हो पा रहा। हालांकि, इसके लिए फाइल तैयार कर ली गई है। जल्द ही सौलर सिस्टम शुरू किए जाने की संभावना है।
बायोलॉजिकल पार्क में 80 से ज्यादा वन्यजीव
बायलॉजिकल पार्क में मांसाहारी व शाकाहारी मिलाकर करीब 80 से ज्यादा वन्यजीव हैं। मांसाहारी में लॉयनेस- 1, बाघ-बाघिन- 2, भेड़िया-4, सियार-5, भालू-2, लेपर्ड-2, जरख-3 है। वहीं, 1 मादा भालू है। इसी तरह शाकाहारी में नीलगाय-12, चिंकारा-5, चितल 27, ब्लैक बक 17 है। यहां एक सांभर भी था, जिसकी गत माह पहले मृत्यु हो गई।
रील कम्पनी को दिए नोटिस
राजस्थान इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंशन लिमिटेड (रील) कम्पनी को सौलर शुरू नहीं किए जाने को लेकर दो बार नोटिस चुके हैं लेकिन उनकी तरफ अभी तक जवाब नहीं मिला है। कम्पनी को 31 मार्च तक काम पूरा करना था। लेकिन, अब तक पूरा नहीं किया गया। नेट मिटरिंग के लिए रील कम्पनी को बिजली कम्पनी में फाइल लगानी है, जो अब तक नहीं लगाई गई। हालांकि, सौलर सिस्टम जल्द से जल्द शुरू करवाने की प्रक्रिया की जा रही है।
-अनुराग भटनागर, डीएफओ, वन्यजीव विभाग कोटा
आवश्यक डॉक्यूमेंट नहीं मिल रहे
नेट मिटरिंग प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत होती है, जो वन्यजीव विभाग की ओर से अभी तक नहीं मिले हैं। इसकी वजह से हमारी फाइल अटकी हुई है। हमारे कर्मचारी विभाग के नयापुरा व अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के चक्कर काट चुके हैं। इसके बावजूद डॉक्यूमेंट नहीं मिल पा रहे। जैसे ही डॉक्यूमेंट मिलेंगे, वैसे ही निजी बिजली कम्पनी में फाइल लगा दी जाएगी। जहां से अप्रूव्ल मिलते ही सौलर प्लांट शुरू हो जाएगा।
-अशोक कुमार, कोटा डिविजन इंचार्ज, रील

Comment List