प्रदेश में कमजोर रहा मानसून, विशेषज्ञ बोले: सर्दी पर नहीं पड़ेगा सीधा असर
आमजन और किसानों के मन में चिंता
जयपुर। राजस्थान में इस बार मानसून सामान्य से कमजोर रहा है। प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान औसतन 423.5 मिमी बारिश होती है, जबकि इस साल अब तक करीब 334.5 मिमी बारिश दर्ज हुई है। यानी बारिश सामान्य से करीब 21 फीसदी कम रही। ऐसे में आमजन और विशेषकर किसानों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या कम बारिश का असर आने वाली सर्दी पर भी पड़ेगा? मौसम विशेषज्ञों के अनुसार कम मानसूनी बारिश और सर्दी की तीव्रता के बीच सीधा संबंध नहीं है। हालांकि इस बार कम मानसूनी बारिश का अप्रत्यक्ष असर जरूर दिखाई दे सकता है। कम बारिश से मिट्टी में नमी कम रहने पर दिन और रात के तापमान का अंतर बढ़ सकता है और रबी फसलों के लिए सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है। विशेषज्ञों ने कमजोर मानसून के कारण मिट्टी की नमी पर असर को लेकर चिंता भी जताई है।
ये फैक्टर तय करते हैं सर्दी :
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के मुताबिक मानसून कम या ज्यादा रहने से यह तय नहीं होता कि सर्दी कम पड़ेगी या ज्यादा। मानसून का सर्दी से कोई सीधा संबंध नहीं है। सर्दी मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी हवाओं के पैटर्न, पश्चिमी विक्षोभों की संख्या और उनकी तीव्रता, ऊपरी वायुमंडल की परिस्थितियों तथा तापमान के वैश्विक पैटर्न पर निर्भर करती है। सर्दियों में राजस्थान का मौसम खास तौर पर पश्चिमी विक्षोभों से प्रभावित होता है। ये सिस्टम हिमालय और उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश-बर्फबारी के साथ ठंडी हवाओं और तापमान में बदलाव का कारण बनते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में भी पश्चिमी विक्षोभों को उत्तर भारत की सर्दियों की वर्षा का महत्वपूर्ण कारण बताया गया है।
हवाओं का रुख तय करेगा सर्दी :
मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि कम बारिश का मतलब न तो निश्चित रूप से कम सर्दी है और न ही ज्यादा सर्दी। राजस्थान में इस बार सर्दी का वास्तविक स्वरूप मानसून के आंकड़ों से ज्यादा अक्टूबर से फरवरी के बीच बनने वाले हवाओं और पश्चिमी विक्षोभों के पैटर्न से तय होगा।

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