हर साल रोया बजट का रोना, मिला तो लौटा दिए 87 लाख

अधिकारियों की लापरवाही : अब अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में नहीं बनेगा पक्षी घर

हर साल रोया बजट का रोना, मिला तो लौटा दिए 87 लाख
नयापुरा स्थित चिड़ियाघर में रखे पक्षियों की भी शिफ्टिंग हो सकती थी। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को बर्ड वॉचिंग का मौका मिलता।

कोटा। वन्यजीव विभाग हर साल यूं तो बजट का रोना रोता है लेकिन जब मिलता है तो उसका उपयोग करने के बजाए वापस लौटा दिया जाता है। अधिकारियों की लापरवाही से पक्षियों का संसार बसने से पहले ही उजड़ गया। वहीं, रियासतकालीन चिड़ियाघर में पिछले दो साल से नजरबंद एक दर्जन से अधिक पक्षियों के बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट होने की गुंजाइश भी खत्म हो गई। दरअसल, वित वर्ष 2023-24 के बजट घोषणा में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने राज्य के अधिकतर जिलों में पक्षी घर बनाने की घोषणा की थी। जिसके तहत अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पक्षी घर बनाया जाना था। इसके लिए गत अगस्त माह में 87 लाख रुपए का बजट भी मिल गया था। लेकिन विभाग ने न तो टेंडर करवाए और न ही स्टीमेट बनवाए और 6 माह तक बजट अपने पास ही पटका रखा। बाद में इसी वर्ष फरवरी माह में सरेंडर करते हुए विभाग ने बजट वापस सरकार को लौटा दिया। 

पक्षियों के लिए बनने थे चार एनक्लोजर
अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पक्षी विहार में 4 एनक्लोजर बनाए जाने थे। जिनमें दो बड़े व दो छोटे एनक्लोजर शामिल थे। जिनमें विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को रखा जाना था। साथ ही शहरभर में रेस्क्यू किए जाने वाले घायल पक्षियों को भी आवास मिलता। इसके अलावा नयापुरा स्थित चिड़ियाघर में रखे पक्षियों की भी इनमें शिफ्टिंग हो सकती थी। इससे यहां आने वाले पर्यटक ों को बडर्् वॉचिंग का मौका मिलता। 

पक्षी क्लिनिक भी बनाना था 
शहरभर से रेस्क्यू होने वाले पक्षियों का इलाज के लिए यहां पक्षी क्लिनिक भी बनाई जानी थी। मकर संक्रांति पर मांजे की चपेट में आने से कई पक्षी जख्मी हो जाते हैं, ऐसे पक्षियों को यहां इलाज किया जाए और उन्हें इन्हीं एनक्लोजर में रखा जाना था। लेकिन, वन्यजीव विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से पक्षी घर बन नहीं पाया। 

छह महीने तक  पटक रखा बजट
गत सरकार ने पक्षी पुर्नवास के नाम से प्रदेश के सभी जिलों को पक्षी घर बनाने के लिए 87 लाख रुपए का बजट जारी किया था। जिसका उद्देश्य रेस्क्यू होने वाले घायल पक्षियों का इलाज कर उनका संरक्षण व पर्नुवास करना था। लेकिन, वन्यजीव विभाग कोटा ने इस दरमियान न तो एस्टीमेट बनाया और न ही टेंडर निकाले। इसके बाद 9 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से जो काम होने थे वो भी नहीं हो पाए। जबकि, इसके उलट वन मंडल ने अनंतपुरा स्थित लवकुश वाटिका में पक्षी विहार का आचार संहिता लगने से पहले ही टेंडर की पक्रिया पूरी कर काम शुरू करवा दिया था। दिसम्बर में सरकार के गठन के बाद भी पक्षी घर निर्माण को लेकर कोई कार्य नहीं किए गए। ऐसे में जनवरी माह में विभाग ने काम करवाने को लेकर हाथ खड़े कर दिए और लाखों का बजट सरेंडर कर दिया। 

Read More रोडवेज में बिना टिकट यात्री मिला तो सिविल डिफेंस परिचालक पर FIR, नौकरी भी जाएगी

विशेषज्ञों ने बताए दो प्रमुख कारण 
विशेषज्ञों का मत है, गत वर्ष अगस्त माह में बजट जारी हुआ था। अधिकारियों ने लापरवाही करते हुए न तो स्टीमेट बनवाया और न ही टेंडर करवाए। अक्टूबर माह में विधानसभा की आचार संहिता लग गई, जो 5 दिसम्बर तक परिणाम जारी होने तक रही। ऐसे में वित्तिय वर्ष भी समाप्ती की ओर बढ़ रहा था। वहीं, नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री ने नए कार्यों के टेंडर व नए काम शुरू करने पर रोक लगा दी थी। ऐसे में वन्यजीव विभाग के सामने वित्तिय वर्ष मार्च तक पक्षी घर का काम करवाना चूनौती बन गया। ऐसे में विभाग ने जनवरी माह में सरकार को 87 लाख का बजट वापस लौटा दिया। 

Read More सरकारी नौकरी का झांसा देकर 5.63 लाख की ठगी, आरोपी गिरफ्तार

मैंने यहां 22 फरवरी को चार्ज लिया था। आते ही मैंने फाइल चेक की थी, जिसमें सरेंडर लिखा था। हालांकि, स्पष्ट कारण नहीं लिखे थे।
- अनुराग भटनागर, उप वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग

Read More 100 में से 16 पार्षद मात्र साक्षर, 46 फीसदी ही 12वीं तक शिक्षित

पक्षी घर बनाने का प्रपोजल आया था लेकिन क्या बनना है, कैसे बनना है, इसकी स्पष्ट गाइड लाइन नहीं थी। ऐसे में तत्कालीन डीएफओ समझ नहीं पाए। वहीं, प्रदेश के अधितर जिलों में भी बजट सरेंडर किए गए हैं। 
- रामकरन खैरवा, मुख्य वन संरक्षक एवं फिल्ड डायरेक्टर, एमएचटीआर

Post Comment

Comment List

Latest News

यूपीआई पर एमडीआर का बोझ छोटे कारोबारियों पर डालना उचित नहीं : बाबूलाल गुप्ता यूपीआई पर एमडीआर का बोझ छोटे कारोबारियों पर डालना उचित नहीं : बाबूलाल गुप्ता
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू करने के प्रस्ताव पर गहरी...
ई-डिटेक्शन के परिवादों पर अफसरों की सुस्ती, 9607 प्रकरण लंबित
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव किया खारिज : 232 सांसदों ने विरोध में किया मतदान,  47 सदस्यों ने नहीं लिया हिस्सा
हत्या और बलात्कार की घटनाओं पर अंकुश लगाने में योगी सरकार फेल : अजय राय
नगरीय निकाय चुनाव : निर्दलीय बने किंगमेकर, 37 निकायों में पूर्ण बहुमत
कोटा नगर निगम पुनर्मतदान : दोपहर 3:00 बजे तक 62.57% मतदान दर्ज, वार्ड 87 और 44 में भारी हंगामा
गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला: यूएपीए के तहत शहजाद भट्टी नेटवर्क आतंकी संगठन घोषित, हथियार और ड्रग्स तस्करी का आरोप