गांव की सरकार : चुनाव का काउंटडाउन शुरू, आज और कल निकलेगी आरक्षण की लॉटरी
चार चरणों में होंगे पंचायत चुनाव
जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनावों के बाद अब गांव की सरकार के चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के लिए आरक्षण की लॉटरी बुधवार और 24 गुरुवार को निकाली जाएगी।
पंचायती राज विभाग 23 सितंबर को जिला स्तर पर जिला परिषदों, पंचायत समितियों तथा पंचायत समिति प्रधान और सदस्यों के लिए आरक्षण लॉटरी निकालेगा। वहीं 24 सितंबर को उपखंड स्तर पर ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी होगी।आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग इन चुनावों का कार्यक्रम इसी माह के अंत तक जारी करने की तैयारी में है। चुनाव चार चरणों में कराए जाने की संभावना है।
पंचायती राज संस्थाओं के इन चुनावों में प्रदेश की 41 जिला परिषदों, 457 पंचायत समितियों और 14, 403 ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधियों का चुनाव होगा। यानी प्रदेश की कुल 14, 901 पंचायती राज संस्थाओं में ग्रामीण मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चयन करेंगे।
1400 से ज्यादा जिला परिषद सदस्य चुनेंगे मतदाता :
प्रदेश की 41 जिला परिषदों में 41 जिला प्रमुखों के साथ 1 हजार 403 जिला परिषद सदस्यों के लिए चुनाव होंगे। इसी तरह 457 पंचायत समितियों में 457 प्रधान चुने जाएंगे और इनके साथ 8 हजार 245 पंचायत समिति सदस्य निर्वाचित होंगे।ग्राम पंचायत स्तर पर 14 हजार 403 सरपंच और सभी ग्राम पंचायतों के 1 लाख 30 हजार 589 वार्ड पंच चुने जाएंगे। इस तरह जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत स्तर पर कुल 1 लाख 40 हजार 237 जनप्रतिनिधियों का चुनाव होगा।
4 करोड़ मतदाता तय करेंगे गांव की सरकार :
फरवरी 2026 में जारी मतदाता सूची के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में कुल 4 करोड़ 2 लाख 20 हजार 734 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 2 करोड़ 8 लाख 62 हजार 380 पुरुष तथा 1 करोड़ 93 लाख 58 हजार 147 महिला और 207 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से करीब 15 लाख 4 हजार कम है। ऐसे में पंचायत चुनावों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी भी चुनावी समीकरणों का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। नगर निकाय चुनावों के बाद अब राजनीतिक दलों का फोकस ग्रामीण क्षेत्रों पर रहेगा। पंचायत चुनावों में जिला परिषद सदस्य से लेकर सरपंच और वार्ड पंच तक बड़ी संख्या में पदों के लिए उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद टिकट के दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ने की संभावना है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार के लिए भी ये चुनाव महत्वपूर्ण होंगे। नगर निकाय चुनावों के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले इन चुनावों में सरकार के कामकाज और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की एक और परीक्षा होगी। हालांकि चुनाव परिणामों का आकलन स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों, आरक्षण और क्षेत्रीय समीकरणों समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।

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