असर खबर का : एनजीटी ने माना, कोटा के लखावा प्लांटेशन में पौधों के नाम पर सरकारी धन का हुआ दुरूपयोग
400 हैक्टेयर भूमि पर दोबारा करवाएं प्लांटेशन
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) को दिए दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश , राजस्थान वन विभाग को जारी किए नोटिस।
कोटा । कोटा वन मंडल के लखावा प्लांटेशन में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की भोपाल पीठ ने गंभीर पर्यावरणीय अपराध मानते हुए राजस्थान वन विभाग को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) को स्वयं जांच कर दोषी वन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने व 400 हैक्टेयर वन भूमि पर दोबारा प्लांटेशन करवाने के आदेश दिए हैं। यह आदेश पर्यावरणीय अधिवक्ता तपेश्वर सिंह भाटी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह व विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुवेर्दी की बैंच ने दिए। याचिका में सामने आया कि कोटा बाइपास स्थित मेटिगेटिव मेजर्स के लखावा 1 से 8 तक के प्लांटेशन में सरकारी धन का दुरूपयोग किया गया। जिससे 400 हैक्टेयर का प्लांटेशन विफल हो गया। इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा।
एनजीटी में जांच रिपोर्टों से खुलासा
एनजीटी में सुनवाई के दौरान लखावा प्लांटेशन में भ्रष्टाचार का खुलासा अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन सुरक्षा) के सी मीना, मूल्यांकन एवं प्रबोधन कोटा डीएफओ व सीसीएफ उड़नदस्ते की जांच रिपोर्ट से हुआ। अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा कि लखावा प्लांटेशन के पूरे इलाके में मुश्किल से 100 पौधे भी जीवित नहीं मिले, जबकि कागजों में यहां 8- 8 हजार पौधे लगना बताया गया है। कई जगह तो एक भी पुराना पौधा नहीं बचा। जहां पौधे दिखे, वे भी हाल ही में दिखावे के लिए लगाए गए थे। वहीं लखावा 8 प्लांटेशन में 21 लाख रुपए के गबन किया जाना बताया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि पौधों के रखरखाव के नाम पर 21.42 लाख रुपए खर्च दिखाया गया जबकि, मौके पर कोई संधारण कार्य नहीं हुआ।
25.72 करोड़ जमा, लेकिन जंगल गायब
पर्यावरणीय अधिवक्ता तपेश्वर सिंह भाटी ने बताया कि कोटा में एनएच-27 के निर्माण के लिए जब 111.637 हैक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया गया था, तब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पर्यावरणीय क्षति की भरपाई व हाईवे के दोनों ओर जंगल (प्लांटेशन) विकसित करने के लिए 25.72 करोड़ रुपए जमा कराए थे। इस राशि से प्लांटेशन की सुरक्षा के लिए पत्थर की दीवारें बननी थीं, लखावा 1 से 8 तक के 400 हैक्टेयर प्लांटेशन में पौधे लगाकर बाइपास के दोनों किनारे हरित पट्टी विकसित करनी थी, जो तत्कालीन व वर्तमान कोटा वन मंडल के अधिकारियों के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए। नतीजन, अधिकारियों ने करोड़ों का बजट उठाया और कागजों में जंगल खड़ा कर दिया। जबकि, धरातल से जंगल गायब है।
नवज्योति ने उजागर किया था भ्रष्टाचार
दैनिक नवज्योति ने 23 मार्च 2024 को न पौधे न चौकीदार, किसकी सुरक्षा में खर्च किया लाखों रुपए, शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर लखावा प्लांटेशन में भ्रष्टाचार उजागर किया था। इस पर तत्कालीन अतिरिक्त वन सचिव अर्पणा अरोरा के निर्देश पर जयपुर से अतिरिक्त मुख्य प्रधान वन संरक्षक (वन सुरक्षा) के सी मीणा व उप वन संरक्षक पीके पांडे जांच के लिए 26 मई 2024 को कोटा आए थे और 27 मई 2024 को लखावा प्लाटेशन का निरीक्षण किया। मौके के हालात देख जांच टीम भी दंग रह गई। टीम को यहां 100 पौधे भी नहीं मिले थे। जबकि वन अधिकारी 8000 पौधों को पानी पिलाने निराई गुड़ाई करने सुरक्षा मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपए के फर्जी बिल बनाकर सरकारी धन का गबन करते रहे। मीना ने अपनी रिपोर्ट में नवज्योति को आई ओपनर कहते हुए बताया कि यदि नवज्योति यह खबर प्रकाशित नहीं करता तो इतना बड़ा भ्रष्टाचार कभी उजागर नहीं होता।
एनजीटी का सख्त रुख
- एनजीटी ने मामले में पर्यावरण व जंगल को गंभीर नुकसान मानते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख हॉफ जयपुर को नोटिस जारी कर निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं इस मामले की जांच करें।
- दोषी वन अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करें।
- पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के लिए
- 400 हैक्टेयर क्षेत्र (लखावा 1 से 8 तक) में ही नया वृक्षारोपण यानी प्लांटेशन कराएं।
- दोषी अधिकारियोें पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट एवं पुन: करवाए जाने वाले वृक्षारोपण की कार्य योजना अगली सुनवाई 16 मार्च से पहले अधिकरण (एनजीटी) में प्रस्तुत करें।

Comment List