सातलखेड़ी में खुले नाले बने हादसों की वजह, जानें पूरा मामला
सांड गिरने की घटना के बाद प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
बरसात में नाले पानी से भर जाते हैं जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।
सातलखेड़ी। कस्बे में करीब एक वर्ष पूर्व बनाई गई सड़क अब आमजन के लिए सुविधा कम और परेशानी का कारण अधिक बनती जा रही है। सड़क निर्माण के दौरान पानी निकासी के लिए किनारे नालों का निर्माण तो किया गया। लेकिन उन पर आज तक ढक्कन नहीं लगाए गए। खुले नालों के कारण आए दिन हादसों की आशंका बनी रहती है, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि नालों के खुले होने से राहगीरों, बच्चों एवं मवेशियों को हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। बरसात के मौसम में नाले पानी से भर जाते हैं और दिखाई नहीं देते, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है। इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग एवं प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। इसी लापरवाही का परिणाम शुक्रवार को उस समय सामने आया, जब एक सांड अचानक खुले नाले में गिर गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
सांड को निकाला सुरक्षित बाहर
सूचना मिलते ही युवा शक्ति गौ सेवा समिति के कार्यकर्ता एवं ग्रामीण मौके पर पहुंचे और सांड को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। नाला गहरा होने और ढक्कन नहीं होने के कारण रेस्क्यू में काफी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन सामूहिक प्रयास से सांड को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी
घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नालों पर ढक्कन लगाए जाते तो इस तरह की घटनाएं नहीं होतीं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही नालों को ढकने एवं सड़क किनारे सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो बड़ा हादसा हो सकता है।
सड़क पर कई स्थानों पर नाले खुले पड़े हैं, जिनमें मवेशी गिरते रहते हैं और उन्हें निकालने में काफी परेशानी होती है। प्रशासन से नालों को पूरी का तरह ढकने की मांग की है।
- अजय वाडिया, गौसेवक
समस्या को गंभीरता से लेते हुए नालों पर ढक्कन लगवाने की कार्रवाई की जाएगी।
-आकांक्षा बैरवा,एईएन,पीडब्लूडी।

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