6 साल से सर्वे, लेकिन काम नहीं, फाइलों में कैद चंबल के बांधों का जीर्णोद्धार
हर साल निविदा पर टल रहा काम
224 करोड़ की लागत से मिलेगा बांधों को नवजीवन।
कोटा। चंबल नदी पर बने प्रदेश के प्रमुख बांध कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणाप्रताप सागर लंबे समय से जीर्णोद्धार की बाट जोह रहे हैं। इन बांधों के नवजीवन के लिए करोड़ों रुपए का बजट स्वीकृत हो चुका है। हर साल निविदाएं जारी होती हैं, लेकिन कार्य शुरू होने से पहले ही प्रक्रिया फिर किसी ने किसी कारण से अटक जाती है। जल संसाधन विभाग ने एक बार फिर करीब 224 करोड़ रुपए की लागत से तीनों बांधों के व्यापक जीर्णोद्धार के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। पहले 27 मार्च तक अंतिम तिथि तय की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दिया गया है। यह पहली बार नहीं है जब निविदा तिथि आगे बढ़ाई गई हो पिछले वर्षों में भी कई बार ऐसा हो चुका है।
6 साल से सर्वे, लेकिन काम शून्य
सूत्रों के अनुसार, इन बांधों के सुधार को लेकर पिछले 5-6 वर्षों से लगातार सर्वे और तकनीकी अध्ययन किए जा रहे हैं। राणा प्रताप सागर बांध के स्लूज गेट बदलने के लिए अंडरवाटर सर्वे तक पूरा हो चुका है। केंद्रीय जल आयोग सहित विभिन्न एजेंसियों के विशेषज्ञों ने भी निरीक्षण कर रिपोर्ट दी, लेकिन इसके बावजूद काम शुरू नहीं हो सका। विभागीय अधिकारियों के अनुसार 224 करोड़ रुपए की इस परियोजना में करीब 82.73 करोड़ रुपए सिविल कार्यों और 141.31 करोड़ रुपए हाइड्रो-मैकेनिकल कार्यों पर खर्च किए जाने प्रस्तावित हैं। तीनों बांधों के लगभग 50 गेट बदलने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा कंक्रीट संरचनाओं की मरम्मत, लीकेज रोकने और अन्य तकनीकी सुधार शामिल हैं।
66 साल पुराने हो चुके बांध
तीनों बांधों का निर्माण 1960 के दशक में हुआ था। उस समय की तकनीक आज के मानकों के अनुसार पुरानी हो चुकी है। विभागीय रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गेट और मशीनरी की औसत उम्र 40-50 साल होती है, जबकि ये सिस्टम उससे कहीं अधिक समय से उपयोग में हैं। ऐसे में इन बांधों का जीर्णोद्धार होना बहुत जरूरी है। जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद यह परियोजना चंबल नदी के तीनों बांधों को नया जीवन देगी, जिससे कोटा सहित पूरे हाड़ौती और प्रदेश के जल भविष्य को मजबूती मिलेगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार है जब चंबल के तीनों प्रमुख बांधों के गेट एक साथ बदले जाएंगे। इससे बांधों की सुरक्षा बढ़ेगी और आने वाले दशकों तक जल प्रबंधन सुचारू रहेगा।
बार-बार की देरी बढ़ा रही चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बांधों के गेट और मशीनरी काफी पुरानी हो चुकी है। समय पर रखरखाव नहीं होने से खराबी की आशंका बनी रहती है।बरसात के दौरान जल दबाव बढ़ने पर जोखिम बढ़ सकता है। चंबल के ये तीनों बांध न केवल हाड़ौती क्षेत्र की जल आपूर्ति और सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बार-बार की देरी चिंता का विषय बनती जा रही है। अब जरूरत इस बात की है कि कागजी प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर जल्द से जल्द धरातल पर काम शुरू हो, ताकि भविष्य में किसी बड़े जोखिम से बचा जा
इतनी राशि होगी खर्च
-राणा प्रताप सागर बांध: 81.49 करोड़
-जवाहर सागर बांध: 75.94 करोड़
-कोटा बैराज: 66.62 करोड़
बांधों की मरम्मत के लिए निविदा आमंत्रित कर दी है। पूर्व में 27 मार्च तिथि निर्धारित की थी। जिसे बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दिया गया है। इस साल के अंत तक कार्य प्रारंभ करने की योजना है।
-सुनील गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग

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