सरकारी कोकस के चलते तिलम संघ ले रहा अंतिम सांसें,167 करोड़ के घाटे में चल रहा तिलम संघ, 151 करोड़ रुपए की देनदारी बकाया
अपग्रेड नहीं करने से 15 साल से बंद पड़ा ऑयल प्लांट, बीज उत्पादक किसानों का पचास लाख रुपए से ज्यादा बकाया ,33 अधिकारी और कर्मचारी सरकार के लिए सफेद हाथी साबित हो रहे
कोटा। डेढ़ दशक पहले तक किसानों की लिए वरदान साबित हो रहा तिलम संघ अधिकारियों, कर्मचारियों और सरकारी उदासीनता के चलते मरणासन्न होकर अपनी अंतिम सांसे ले रहा है। स्थिति यह है कि संघ 167 करोड़ के घाटे में है। इस पर 151 करोड़ रुपए की देनदारियां बकाया है। अकेले कोटा में ही बीज उत्पादक किसानों का लगभग 50 लाख रुपए संघ पर बकाया चल रहा है। 15 साल पहले हाड़ौती संभाग की पहली |यल मिल से तिलम संघ को अच्छा प्रतिसाद मिला था। किसानों को तिलहनी फसलों के अच्छे दाम मिल रहे थे। एक दशक पहले तक खाद्य तेलों में शुद्धता में अपनी अलग पहचान बना चुका कोटा तिलम संघ अब अंतिम सांसें गिन रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने समय के साथ ना तो मशीनों को अपग्रेट किया ना ही व्यवसाय के तरीकों को। धीरे-धीरे तिलम संघ पर 167 करोड़ घाटा हो गया । अब यह बंद होने के कागार पर है।
किसानों के एक करोड़ रुपए अब भी तिलम संघ में अटके
किसान नेता व भाजपा देहात जिला अध्यक्ष मुकट नागर ने बताया कि तिलम संघ अपने को बाजार के अनुरूप ढालने में ना कामयाब रहा है। किसानों के साथ रिश्ते बेहतर नहीं रखने बीज उत्पादन किसानों प्रीमियम राशि समय पर नहीं लौटाने किसानों में तिलम संघ के प्रति रूझान घट रहा है। 2017 से 19 के बीच करीब 50 लाख रुपए बाकी चल रहे है। इसके अलावा खरीफ के बीज उत्पादन किसानों के वर्ष 2020-21 के करीब 50 लाख रुपए का भुगतान अटका पड़ा है। दोनों भुगतान मिलाकर करीब एक करोड के आसपास किसानों अभी भुगतान बाकी चल रहा है।
तिलम संघ बीज उत्पादन और ग्रेडिंग में नहीं हुआ सफल
किसान नेता अब्दुल हामिद गौड ने बताया कि तिलम संघ ने अपने वजूद को बचाने के लिए 2008 के बाद से बीज ग्रेडिंग में अपने हाथ अजमाए लेकिन यहां भी कर्मचारियों और किसानों के बीच समन्वय नहीं करने से फेल हो गया। वर्ष 2016-17 में किसानों ने बीज उत्पादित करके तिलम संघ में 20 हजार क्विंटल गेहूं बीज जमा करवाया था। किसानों को सरकार प्रति क्विंटल 250 रुपए की प्रीमियम राशि देती है। ऐसे में करीब 5 करोड़ रुपए की राशि नवंबर 2017 में किसानों को दी जानी थी। लंबे समय तक चक्कर कटाने के बाद कुछ किसानों को प्रीमयम राशि दी तो कुछ के अब भी अटकी हुई है। ऐसे में किसानों का तिलम संघ से विश्वास कम होता गया। वर्तमान में तिलम संघ बीजों की ग्रेडिंग कर गेहूं, चना, सरसों, सोयाबीन, उडद का बीज उपलब्ध करा रहा है। लेकिन बाजार में चल रही गला काट प्रतिस्पर्द्वा के आगे तिलम संघ के गुणवत्ता वाले बीज किसानों में गहरी पेठ नहीं बना सके।
दो साल पहले राजफेड में विलय की घोषणा भी अमल नहीं आई
काफी समय से घाटे में चल रहे तिलम संघ को 2020 में राजफैड में विलय किए जाने की घोषणा की थी लेकिन उसके बाद ये घोषणा तकनीकी कारणों से मुर्त रूप नहीं ले सकी। उल्लेखनीय है कि 2020 में तिलम संघ को विलय करने की राज्य सरकार ने मुहर लगा दी थी। सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने यह घोषणा की थी। लेकिन बाद में कोरोना और कई तकनीकी कारणों से घोषणा मूर्तरूप नहीं ले पार्ई।
1990 में हुई थी स्थापना
तिलम संघ की स्थापना 1990 में हुई थी। इसका कार्य सोयाबीन, सरसों, मंूगफली आदि का संग्रहण और प्रोसेसिंग कर विपणन करना है। तिलम संघ के अधीन आठ तेल मिल कोटा, बीकानेर, फतेहनगर, श्रीगंगानगर, जालौर, मेड़तासिटी, गंगापुर सिटी, झुंझुनू में स्थापित की गई थीं। संघ की जालौर, मेड़तासिटी, गंगापुरसिटी, झुंझुनू और बीकानेर इकाईयां लगातार घाटे में चलने के कारण बंद कर दी गई। झुंझुनू और जालौर परियोजना को बेच दिया गया।
1991 से पहले तक तिलम संघ राजफैड का रहा था अंग
वर्ष 1991 से पहले तिलम संघ राजफैड का ही अंग था लेकिन विश्व बैंक की शर्तो के आधार पर 1991 में राजफैड से अलग होकर तिलम संघ की स्थापना की गई थी । 18 साल तक तिलम संघ किसानों के उत्पादन का बड़ा खरीदार था। कोटा,श्रीगंगानगर और फतेहनगर आॅयल संयंत्रों से खाद्य तेल का अच्छा उत्पादन होता था । अधिकारियों और कर्मचारियों ने संयंत्रों को अपग्रेट नहीं किया और बाजार के अनुसार अपने को नहीं ढालने के कारण प्रतिस्पर्द्वा में पिछड़ता गया। आज प्लांट बंद होने पर पहुंच गया है।
2008 से तीनों ऑयल प्लांट बंद
तिलम संघ के वर्ष 2008 से तीनों खाद्य तेल उत्पादन संयत्र कोटा, श्रीगंगानगर एवं फतेहनगर बंद हैं। इन संयत्रों की मशीनरी भी पुरानी हो चुकी है। कोटा के तेल संयत्र को बंद हुए करीब 15 साल हो गए है। कोटा में तेल का पहला प्लांट तिलम संघ का था उसके बाद एक- एक कर आज 12 से अधिक खाद्य तेल उत्पादक प्लांट लगे हुए जो प्रतिदिन 2500 टन खाद्य तेल का उत्पदान कर रहे है ऐसे में सवाल उठता है कि तिलम संघ का अच्छा खास चलता प्लांट अधिकारियों की उदासिनता से आज जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। जहां अन्य आॅयल मिले प्रतिदिन 2500 टन उत्पादन कर रहे वहीं तिलम संघ 200 टन उत्पादन ही करता रहा जिससे बाजार में पिछड़ता गया। मशीनों को अपग्रेट नहीं किया। किसानों के बीच समन्वय और पेठ नहीं बना सका जिससे प्लांट बंद हो गया।
84 कर्मचारियों का होना था समायोजन अब 33 बचे
तिलम संघ का 2020 में राजफैड में विलय की प्रक्रिया शुरू हुई तब तिलम संघ के कर्मचारियों का भी राजफैड में ही विलय करना था। तिलम संघ में 2020 में 113 कार्मिक कार्यरत थे। जिसमें से 2021 में 40 कार्मिक रिटायर हो गए। ऐसे में शेष बचे 84 कार्मिकों का राजफैड में समायोजन किया जाना था लेकिन दो साल में तिलम संघ के राजफैड में विलय नहीं हुआ और वर्तमान में जीएम सहित 33 कर्मचारी रह गए है। तिलम संघ के पास बाजार दर से लगभग 500 करोड़ की संपत्तियां हैं, जो राजफैड में तिलम संघ के विलय होने पर राजफैड के पास आ आएगी।
तिलम संघ की ओर से अभी बीज ग्रेडिंग और समर्थन मूल्य पर जिंसों की खरीद का कार्य किया जाता है। तेल प्लांट करीब 15 साल से बंद पड़ा है। मशीने पुरानी होने और अपग्रेट नहीं होने से उत्पादन बंद हो गया था। हमारी लैब तेल का टेस्टिंग कर तिलम संघ ब्रांड नाम से बाजार में सरसों, मूंगफली और सोयाबीन का तेल बिक रहा है। इसके अलावा किसानों से बीज उत्पादन कराकर उसकी ग्रेडिंग का कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में 33 कर्मचारी कार्यरत है। नई भर्ती नहीं हुई है।- सुनील अग्रवाल, जीएम तिलम संघ कोटा

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