अखाड़े में गूंजा पहलवानों का दमखम, चंबल के दंगल में दिखी अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा
एशियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप पदक विजेता खिलाड़ियों ने भी साझा किए अपने अनुभव
कोटा। अखाड़े की मिट्टी, पहलवानों का जोश और जीत के लिए आखिरी दम तक संघर्ष... राष्ट्रीय दशहरा मैदान में आयोजित चंबल राजस्थान कुश्ती दंगल में मंगलवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। राज्यभर से पहुंचे बालक और बालिका वर्ग के पहलवानों ने अपने दमखम, तकनीक और शानदार दांव-पेच से दर्शकों को रोमांचित कर दिया। मुकाबलों में कहीं ताकत का प्रदर्शन देखने को मिला तो कहीं कुश्ती की बारीक तकनीक और फुर्ती ने सबका ध्यान खींचा। हाड़ौती सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
आयोजन सचिव एवं जिला कुश्ती संघ के कोषाध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने बताया कि बालक वर्ग के विभिन्न भार वर्गों में क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल मुकाबले बेहद रोमांचक रहे। पहलवानों ने जीत के लिए पूरा जोर लगाया। वहीं बालिका वर्ग में भी खिलाड़ियों का उत्साह देखने लायक रहा। मुकाबलों के दौरान खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर साबित किया कि प्रदेश में कुश्ती की प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आयोजन प्रभारी भानु प्रताप सुमन ने बताया कि मंगलवार को राजस्थान के कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके ख्यातिप्राप्त पहलवानों ने भी दंगल में अपनी कुश्ती कला और अनुभव का परिचय दिया।प्रतियोगिता में उभरती प्रतिभाओं को वरिष्ठ खिलाड़ियों से सीखने और अपनी तकनीक को निखारने का अवसर मिला। दैनिक नवज्योति से बातचीत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाली महिला पहलवानों ने कुश्ती में सफलता के लिए मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास को सबसे महत्वपूर्ण बताया।
मेहनत और आत्मविश्वास से मिलती है अंतरराष्ट्रीय पहचान
अंडर-17 एशियन गेम्स की पदक विजेता कशिश गुर्जर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सफर आसान नहीं होता। इसके लिए रोजाना घंटों अभ्यास, फिटनेस और मानसिक मजबूती पर काम करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी को हार से निराश होने के बजाय अपनी कमियों को पहचानकर आगे बढ़ना चाहिए। उनका लक्ष्य भविष्य में देश के लिए और बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पदक जीतना है।
विश्व स्तर पर तिरंगा लहराना सबसे बड़ा सपना
अंडर-17 वर्ल्ड चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता संध्या विश्नोई ने कहा कि विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतना उनके लिए गर्व का क्षण रहा। इस उपलब्धि के पीछे कोच का मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और लगातार की गई मेहनत है। उन्होंने कहा कि कुश्ती में सफलता के लिए तकनीक के साथ आत्मविश्वास भी जरूरी है। उनका सपना आने वाले समय में विश्व स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर देश का तिरंगा ऊंचा करना है।
बेटियां भी अखाड़े में दिखा रहीं अपनी ताकत
पहलवान कोमल वर्मा ने कहा कि अब बेटियां भी कुश्ती के मैदान में पीछे नहीं हैं। खेल में लड़कियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। नियमित अभ्यास, सही खानपान और अनुशासन से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

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