रील के लिए मगरमच्छ से बैर ले रहे युवा, सोशल मीडिया पर वायरल होने की सनक में वन्यजीव संरक्षण कानून का कर रहे खुला उल्लंघन

शेड्यूल-1 के एनिमल की बेकद्री, बढ़ रही छेड़खानी की घटनाएं

रील के लिए मगरमच्छ से बैर ले रहे युवा, सोशल मीडिया पर वायरल होने की सनक में वन्यजीव संरक्षण कानून का कर रहे खुला उल्लंघन

वन विभाग और प्रशासन को चाहिए कि वे जनजागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को समझाएं ।

कोटा।  केस-1 : पैरों से मुंह दबाकर मगरमच्छ को दबोचा
नया नोहरा इलाके में दीपावली से एक दिन पहले रविवार को सड़क पर 4 फीट लंबा मगरमच्छ आ गया था। लोगों को देख वह भागने लगा तो लोग भी उसके पीछे दौड़ने लगे। इस बीच एक युवक ने मगरमच्छ के मुंह को पैरों तले दबाकर रेस्क्यू किया। जिसे बाद में नहर में छोड़ा गया।  

केस-2 : 80 किलो के मगर को कंधों पर उठाया
इटावा के बंजारी गांव में एक घर में 8 फीट लंबा मगरमच्छ घुस गया था। जिसे रेस्क्यू करने पहुंचे हयात खान ने उसे पकड़ा और 80 किलो वजनी मगरमच्छ को कंधों पर उठाकर ले गया। जिसे बाद में चंबल नदी में छोड़ा गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। 

केस-3 : गोदी में मगर को उठाकर फोटोशूट करवाया
देवली अरब क्षेत्र में शुक्रवार देर रात कुछ युवक मगरमच्छ  गोद में लेकर हंसी ठिठोली कर खेलते नजर आए। इसी तरह कोटड़ी क्षेत्र में आए मगरमच्छ को लोगों ने पकड़कर कंधों पर उठा लिया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए। लोग वन विभाग की टीम को सूचना देने के बजाए रील्स बनाने के लिए खुद ही रेस्क्यू कर रहे हैं।

शेड्यूल वन के वन्यजीवों के साथ रील्स बनाने का बढ़ता क्रेज युवाओं और जानवरों दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। सोशल मीडिया पर लाइक और फॉलोअर्स  बटोरने की होड़ में युवा, न केवल वन्यजीव संरक्षण अधिनियम कानून को ठेंगा दिखा रहे बल्कि अपनी जान भी दांव पर लगाने से नहीं चूक रहे। रील्स, मीम और लाइक-कमेंट की सनक में वन्यजीवों को उकसाते और उनके प्राकृतिक आवास में घुसपैठ करते हैं, जिससे इंसान व जानवरों के बीच संघर्ष के गंभीर खतरे पैदा हो रहे हैं। कोटा जिले में इन दिनों युवाओं का मगरमच्छ के साथ रील बनाने का खतरनाक शौक बन गया है। पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए, जिसमें कोई गोदी में लेकर मगरमच्छ के साथ खेल रहा तो कोई भारी-भरकम मगरमच्छ को कंधों पर उठाकर वाहवाही लूट रहा। वहीं, सड़कों पर मगरमच्छ के मुंह को पैरों तले दबाकर काबू करने का साहस दिखा रहे। इन हरकतों से युवा खुद के साथ न केवल वन्यजीव की जान खतरे में डाल रहे बल्कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम  का भी खुला उल्लंघन कर रहे हैं। 

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3 से 7 साल की सजा का प्रावधान
मगरमच्छ शेड्यूल वन का एनीमल है। इनको गोदी व कंधों पर उठाकर रील्स बनाना, इनके साथ मारपीट व हंसी ठिठोली करना अमानवीय व्यवहार की श्रेणी में आता है, जो वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 का खुला उल्लंघन है। जिसमें 3 से 7 साल की सजा का प्रावधान है। वहीं, 10 हजार से 1 लाख तक का जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है। 

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अपने साथ मगर की जिंदगी भी खतरे में डाल रहे
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियों में युवा, मगरमच्छ को पकड़ते, मुंह पर टेप लगाते व दौड़ाकर रेस्क्यू करने का नाटक करते नजर आए हैं। वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सूचना देने के बजाय खुद हीरो  बनने की चाहत में न सिर्फ अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं बल्कि मगरमच्छों के जीवन के लिए भी बड़ा खतरा बन रहे हैं।

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कानून की अनदेखी और विभाग की चुप्पी
वन विभाग की ओर से अब तक इस संबंध में न तो जागरूकता अभियान चलाया गया और न ही वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत सजा और जुर्माने की कार्रवाई की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ावा देती हैं और प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करती हैं।

फॉलोअर्स की होड़ में उड़ाई जा रही कानून की धज्जियां
युवाओं में सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाने और वायरल  होने की सनक इतनी हावी है कि वे वन्यजीवों के प्रति करुणा और कानून दोनों भूल बैठे हैं। फॉरेस्ट अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के मामलों में पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

वन्यजीवों को खतरा
व्यवहार में बदलाव: रील्स के लिए वन्यजीवों को परेशान करने से उनका प्राकृतिक व्यवहार बदल सकता है। बार-बार होने वाली घुसपैठ से वे तनाव में आ सकते हैं, जिससे उनके खाने, शिकार करने और प्रजनन के तरीकों पर असर पड़ सकता है।
तनाव और चोट: वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में परेशान करने से उनमें तनाव पैदा होता है, जिससे वे बीमार पड़ सकते हैं या घायल हो सकते हैं।
हैबीटाट लॉस: इंसानों की मौजूदगी और रील्स की शूटिंग के दौरान होने वाली गतिविधियों से जानवरों के आवास को नुकसान पहुंचता है, जिससे उनकी संख्या में कमी आ सकती है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि: जब जानवर इंसानों के साथ संघर्ष करते हैं, तो अक्सर इसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ता है। ऐसी घटनाएं वन्यजीवों के लिए खतरा बढ़ाती हैं। 

यह हो सकते हैं समाधान
जन जागरूकता अभियान: सोशल मीडिया के जरिए वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना चाहिए। 
सख्ती से लागू हो कानून: सरकार को वन्यजीवों को परेशान करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और कानूनों को सख्ती से लागू करना चाहिए।
शिक्षण और जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में वन्यजीव संरक्षण की शिक्षा देना चाहिए ताकि युवा इसके प्रति जागरूक हो सकें। 

वन्य जीव प्रेमी बोले
वन्यजीव को छेड़ना, पकड़ना, हंसी ठिठोली करना या वाइल्ड एनीमल्स के साथ रील बनाना न केवल गैरकानूनी है बल्कि उनके साथ अमानवीय व्यवहार भी है। जागरूकता की कमी और सोशल मीडिया की लालसा मिलकर एक गंभीर खतरा पैदा कर रही है। युवाओं को इससे बचना चाहिए। वन विभाग को जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। 
- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर

रील की कुछ सेकंड की लोकप्रियता पाने के लिए युवाओं की यह नादानी उन्हें कानूनी सजा, शारीरिक चोट या मौत के खतरे तक पहुंचा सकती है। वन विभाग और प्रशासन को चाहिए कि वे जनजागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को समझाएं कि वन्यजीव खिलौना नहीं बल्कि प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं।
- डॉ. सुधीर गुप्ता, वन्यजीव प्रेमी

मगरमच्छ शेड्यूल वन का एनीमल है। इसके साथ छेड़छाड़ करना वन्यजीव अधिनियम 1972 का खुला उल्लंघन है। वन विभाग को ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन, विभाग कार्रवाई नहीं करता क्योंकि यह लोग विभाग का काम कर देते हैं। कार्रवाई होगी तो रेस्क्यू के लिए वन विभाग को काम करना पड़ेगा, इसलिए जिम्मेदारी से बचने के लिए एक्शन नहीं करते। नतीजन, ऐसे मामलों की पुनरावृति बढ़ती है।
- तपेश्वर सिंह भाटी, वन्यजीव प्रेमी

वाइल्ड लाइफ के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है। अवेयरनेस बढ़ाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। हाल ही में वाइल्ड लाइफ सप्ताह में भी स्कूल व कॉलेज में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक किया है।  वहीं, इस तरह की घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 
- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा

वन्यजीवों के साथ रील्स बनाना, सोशल मीडिया पर फोटो वीडियो अपलोड करना गैर कानूनी है। इसमें सजा और जुर्माने का प्रावधान है। यदि, आबादी क्षेत्र में वन्यजीव नजर आए तो वन विभाग को सूचित किया जाना चाहिए, हमारी टीम तुरंत रेस्क्यू करने पहुंचेगी। 
- सुगना राम जाट, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन्यजीव

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