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राजस्थान टोंक

उदयपुर घटना को लेकर रात से ही पुलिस गश्त बढ़ी दिन में निकाला फ्लैग मार्च

उदयपुर घटना को लेकर रात से ही पुलिस गश्त बढ़ी  दिन में निकाला फ्लैग मार्च उदयपुर में एक हिन्दू दर्जी की कथित तौर पर गला काटने की घटना के बाद टोंक जिले में इस खबर फैलने के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया और रात में ही पूरे शहर में पुलिस गश्त बढ़ाने के साथ ही लोगों को घर पर भेज दिया और रात से पूरी तरह से इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी तो बुधवार को शहर के जिला व पुलिस प्रशासन ने फ्लैग मार्च निकाला।
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राजस्थान कोटा

हाउसिंग बोर्ड : 21 साल से कोटा में नहीं बनाई नई कॉलोनी व मकान

हाउसिंग बोर्ड : 21 साल से कोटा में नहीं बनाई नई कॉलोनी व मकान अंटी में न धेला, देखन चली मेला। कोटा शहर में हाउसिंग बोर्ड की यही स्थिति है। पहले मकान बनाने का अधिकतर काम हाउसिंग बोर्ड (आवासन मंडल) करता था। लेकिन अब हालत यह है कि बोर्ड ने करीब 21 साल से शहर में कोई नया मकान या कॉलोनी नहीं बनाई है।
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राजस्थान जयपुर

गर्मियों की शुरुआत से ही पानी को लेकर हाहाकार

गर्मियों की शुरुआत से ही पानी को लेकर हाहाकार जयपुर। गर्मियों की शुरुआत होते ही पानी की किल्लत अधिकांश कॉलोनियों में होने लगी है। लोग धरना-प्रदर्शन पर उतर आए हैं। कई कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां पानी का प्रेशर कम आने, पानी नहीं आने या दूषित पानी की समस्या को...
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राजस्थान जयपुर

महिला दिवस विशेष: बचपन से पायलट बनने का ख्वाब- वृषाली

महिला दिवस विशेष: बचपन से पायलट बनने का ख्वाब- वृषाली आज के युग में महिलाए हर सेक्टर में काम कर रही है, चाहे वह सेना हो या अन्य विभाग हो।
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राजस्थान जयपुर

जुलाई 2016 से नियुक्ति नहीं, कैसे हो वीरांगनाओं की सुनवाई

जुलाई 2016 से नियुक्ति नहीं, कैसे हो वीरांगनाओं की सुनवाई   जयपुर। सैन्य विधवाओं और भूतपूर्व सैनिकों के मामलों की सुनवाई के लिए भले ही अलग से सशस्त्र सेना अधिकरण बना हुआ है, लेकिन इसमें पिछले करीब साढ़े पांच साल से न्यायिक सदस्य की नियुक्ति नहीं होने के चलते इनकेअन्य...
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राजस्थान जयपुर

42 साल से अब तक लंबित 5802 मामलों में तो केस नंबर तक नहीं

42 साल से अब तक लंबित 5802 मामलों में तो केस नंबर तक नहीं राज्य सरकार के विभिन्न महकमों के 20,636 मामले ऐसे हैं जो संबंधित अदालत के बजाय किसी अन्य में दर्ज हैं, जबकि 5802 मामले ऐसे हैं जिनके केस नंबर ही सही नहीं हैं। इसके लिए न्याय विभाग राज्य सरकार के विविध विभागों को 1979 से गलतियां दुरुस्त करने के लिए आग्रह कर रहा है, लेकिन मामला वहीं का वहीं है। ऐसे में 42 साल तक के पुराने कई मामलों में ढंग से पैरवी तक नहीं हो सकी। इसकी विभागवार सूची भी जारी की गई, लेकिन फिर भी जानकारी दुरुस्त नहीं हुई।
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