अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा: अल-कायदा, लश्कर और जैश जैसे गुट सक्रिय, पाकिस्तान पंद्रह आतंकी संगठनों का गढ़
आतंकवाद का केंद्र पाकिस्तान: अमेरिकी रिपोर्ट (CRS) का बड़ा खुलासा
अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट ने पाकिस्तान को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे 15 आतंकी संगठनों का सुरक्षित ठिकाना बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में आतंकवाद से मौतें 4,001 तक पहुँच गईं। कट्टरपंथी मदरसे और सीमा पार सक्रिय विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) वैश्विक सुरक्षा के लिए अब भी गंभीर खतरा बने हुए हैं।
न्यूयॉर्क। अमेरिका की कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की एक नई रिपोर्ट में पाकिस्तान को एक बार फिर विभिन्न आतंकवादी संगठनों के प्रमुख ठिकाने के रूप में चिन्हित किया गया है, जिसमें वैश्विक स्तर पर सक्रिय अल-कायदा से लेकर भारत-केंद्रित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान 1980 के दशक से सक्रिय अनेक सशस्त्र गैर-राज्य तत्वों के लिए संचालन का आधार बना हुआ है। इन्हें व्यापक रूप से वैश्विक, अफगानिस्तान-केंद्रित, भारत और कश्मीर केंद्रित, घरेलू तथा सांप्रदायिक (एंटी-शिया) संगठन सहित पांच श्रेणियों में बांटा गया है।
12 संगठन एफटीओ घोषित
पहचाने गए 15 संगठनों में से 12 को अमेरिकी कानून के तहत विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) घोषित किया गया है, जिनमें अधिकांश इस्लामी उग्रवादी विचारधारा से प्रेरित हैं। सीआरएस के अनुसार, एलईटी और जेईएम जैसे कई भारत विरोधी संगठन अब भी सक्रिय हैं और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर क्षेत्रों से संचालित होते हैं। इन संगठनों का संबंध 2008 के मुंबई आतंकी हमलों और 2001 में भारतीय संसद पर हमले जैसे बड़े हमलों से जोड़ा गया है।
पाक खुद भी पीड़ित
रिपोर्ट में कहा गया है कि गंभीर घरेलू आतंकवाद का सामना करने के बावजूद पाकिस्तान इन नेटवर्कों को समाप्त करने में संघर्ष कर रहा है। आतंकवाद से संबंधित मौतों की संख्या 2019 में 365 से बढ़कर 2025 में 4,001 तक पहुंच गई है, जो एक दशक में सबसे अधिक है। यह हिंसा मुख्य रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान, खासकर अफगानिस्तान सीमा के आसपास केंद्रित है।
मदरसों में दिया जा रहा कट्टरपंथ को बढ़ावा
रिपोर्ट में कुछ मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा को भी कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाला बताया गया है। वहीं, पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है और भारत पर अपने पश्चिमी प्रांतों में विद्रोही गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप लगाता है। भारत इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।

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