जैसलमेर में 300 मकानों पर तोड़फोड़ का साया, हाईकोर्ट ने लगाई रोक
चुनिंदा लोगों को ही नोटिस देकर कार्रवाई की जा रही
राजस्थान हाईकोर्ट ने जैसलमेर में कथित अवैध निर्माणों पर बड़ी राहत देते हुए फिलहाल ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी है। सैकड़ों परिवारों ने कार्रवाई को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कलेक्टर को 8 अप्रैल को तलब कर पुनर्वास योजना का पूरा रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं, मामले को गंभीर माना है।
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जैसलमेर शहर में कथित अवैध निमार्णों को लेकर बड़ी राहत देते फिलहाल किसी भी मकान या भवन को ध्वस्त करने पर रोक लगा दी है। जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ के समक्ष अमरदीन खान सहित अन्य की ओर से सैकड़ों परिवारों ने अपने घरों पर मंडरा रहे ध्वस्तीकरण के खतरे को चुनौती दी थी। मामले में याचिकाकतार्ओं की ओर से अधिवक्ता सीएस कोटवानी ने बताया कि जैसलमेर के प्रतिबंधित क्षेत्र में 300 से 400 से अधिक मकान वर्षों से बने हैं, जिनमें लोग निवास कर रहे हैं। उनका कहना था कि ये निर्माण संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेकर किए गए थे, लेकिन अब चुनिंदा लोगों को ही नोटिस देकर कार्रवाई की जा रही है, जो कि मनमानी है।
वहीं, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध निमार्णों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी अवैध निर्माणकतार्ओं को नोटिस दिए गए हैं, लेकिन केवल उन्हीं मामलों में ध्वस्तीकरण आदेश पारित किए गए हैं, जहां प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने कलेक्टर जैसलमेर को 8 अप्रैल 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्हें प्रभावित 300-400 परिवारों के पुनर्वास के रिकॉर्ड के साथ पेश हो।

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