सड़कों पर अतिक्रमण का जाल : प्रशासन रोड कट पर कर रहा फोकस, रोड कट बंद करने से बढ़ा जाम

अवैध कब्जे आमजन के लिए परेशानी का कारण बन रहे

सड़कों पर अतिक्रमण का जाल : प्रशासन रोड कट पर कर रहा फोकस, रोड कट बंद करने से बढ़ा जाम

यातायात व्यवस्था बदहाल है। सड़कों पर 50% से ज्यादा अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग से जाम आम हो गया है। प्रशासन रोड कट बंद करने में व्यस्त है, लेकिन अतिक्रमण हटाने में नाकाम साबित हो रहा है। पीक ऑवर्स में वाहन फंस रहे हैं, एंबुलेंस तक प्रभावित हैं, जबकि सुधार के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।

जयपुर। शहर में यातायात व्यवस्था को लेकर यातायात पुलिस, जयपुर विकास प्राधिकरण एवं नगर निगम बड़े बड़े दावे कर वाह-वाही लूटने में लगा हुए है लेकिन शहर की अधिकांश सड़कों पर 50 प्रतिशत से अधिक अतिक्रमण है जिससे यातायात व्यवस्था चरमराई हुई है। प्रशासन राहत के नाम पर रोड कट बंद करने पर फोकस कर रहा है और ट्रेफिक लाइटें पर वाहन चालक पीक ऑवर्स में तो एक दो बार में भी नहीं निकल पाते है। शहर की यातायात व्यवस्था इन दिनों अव्यवस्था का शिकार होती नजर रही है। एक ओर प्रशासन रोड कट को व्यवस्थित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर बढ़ते अतिक्रमण ने ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। हालात यह हैं कि शहर के प्रमुख बाजारों और व्यस्त मार्गो पर जगह-जगह खड़े वाहन और अवैध कब्जे आमजन के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं।

शहर के कई इलाकों में सड़क किनारे दुकानदारों द्वारा सामान फैलाकर अतिक्रमण कर लिया जाता है जिससे सड़कें संकरी हो रही है। इसके अलावा बिना निर्धारित पार्किग के वाहन खड़े रहने से जाम की स्थिति बनी रहती है। प्रशासन द्वारा रोड कट को बंद या व्यवस्थित करने की कार्रवाई जरूर की जा रही है, लेकिन अतिक्रमणों पर ठोस कार्रवाई का अभाव साफ  नजर आता है। नगर निगम एवं जेडीए की सतर्कता शाखा रोजाना अस्थाई अतिक्रमणों के नाम पर कार्रवाई तो करता है लेकिन हालात ढ़ाक के तीन पात है और दस्ते के निकलते ही थडी ठेले फिर से सड़कों पर जम जाते है।

यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रोड कट को बंद करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक सड़कों को अतिक्रमण मुक्त नहीं किया जाएगा और पार्किग व्यवस्था को सख्ती से लागू नहीं किया जाएगा, तब तक ट्रैफिक सुधार की उम्मीद अधूरी रहेगी। दैनिक रूप से आॅफिस जाने वाले लोग, स्कूल बसें और एंबुलेंस तक जाम में फंसकर परेशान हो रही हैं। कई बार आपातकालीन सेवाओं को भी समय पर रास्ता नहीं मिल पाता, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। शहर के प्रमुख बाजारों में अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किग सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। हालांकि शहर की यातायात जाम से मुक्ति दिलाने के लिए ट्रेफिक कंट्रोल बोर्ड की हर माह बैठक आयोजित कर खानापूर्ति कर जा रही है। -रिक्शा को जोन बार संचालन के निर्देश के बाद भी हालात जस के तस बने हुए है। हालांकि अधिकारी यातायात व्यवस्था सुधार को लेकर बड़े-बड़े दावे तो कर रहे है लेकिन यह कागजी कार्रवाई तक सीमित है।

 

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Tags: road

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