शोध में बड़ी सफलता, समुद्री जीव में मिला त्वचा कैंसर के इलाज का नया सुराग
त्वचा कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने की रखता है क्षमता
वॉशिंगटन। अंटार्कटिका के बर्फीले समुद्र में रहने वाले एक दुर्लभ समुद्री जीव ने त्वचा कैंसर के इलाज की दिशा में नई उम्मीद जगाई है। अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा, डेजर्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट और स्क्रिप्स इंस्टीट्यूशन ऑफ ओशनोग्राफी के वैज्ञानिकों के संयुक्त अध्ययन में एक ऐसी खोज सामने आई है, जो भविष्य में कैंसररोधी दवाओं के विकास में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने सी स्क्वर्ट (एस्किडियन) नामक समुद्री जीव में मौजूद बैक्टीरिया की पहचान की है। ये बैक्टीरिया एक विशेष विषैला रासायनिक यौगिक बनाते हैं, जो स्वस्थ मानव कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना केवल मेलानोमा, यानी त्वचा कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने की क्षमता रखता है।
अध्ययन के सह-नेता और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा के रसायन विज्ञान के प्रोफेसर बिल बेकर के अनुसार, कैंसर की दवा विकसित करने में सबसे बड़ी चुनौती ऐसी दवा तैयार करना है, जो कैंसरग्रस्त कोशिकाओं पर असर करे, लेकिन सामान्य कोशिकाओं को सुरक्षित रखे। उनका कहना है कि इस खोज की सबसे बड़ी विशेषता यही चयनात्मक क्षमता है। मेलानोमा त्वचा कैंसर का सबसे घातक प्रकार माना जाता है और इससे हर वर्ष दुनिया भर में लगभग 57 हजार लोगों की मौत होती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि प्रभावी उपचार नहीं मिलने पर वर्ष 2040 तक यह आंकड़ा 96 हजार तक पहुंच सकता है।
शोध के लिए वैज्ञानिकों ने छह सप्ताह तक अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ के नीचे करीब 80 फीट की गहराई तक गोताखोरी कर नमूने एकत्र किए। अब प्रयोगशाला में इन जीवों के डीएनए और रासायनिक संरचना का अध्ययन किया जा रहा है। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज को दवा के रूप में विकसित करने में अभी कई वर्षों का शोध और परीक्षण बाकी है, लेकिन यह खोज भविष्य में कैंसर उपचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।

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