चीन ने कृत्रिम सूर्य में 1300 से अधिक सेकेंड तक प्लाज्मा प्रवाह बनाये रखकर रचा इतिहास, कार्बन उत्सर्जन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रमुख उपकरण

चीन के ‘कृत्रिम सूर्य’ ने रचा इतिहास

चीन ने कृत्रिम सूर्य में 1300 से अधिक सेकेंड तक प्लाज्मा प्रवाह बनाये रखकर रचा इतिहास, कार्बन उत्सर्जन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रमुख उपकरण

चीन के एचएच70 टोकामक ने 1,337 सेकंड तक स्थिर प्लाज्मा प्रवाह बनाए रखा, एआई और सुपरकंडक्टिंग तकनीक से संलयन ऊर्जा को सस्ती व व्यवहार्य बनाने की दिशा में बड़ी सफलता मिली।

शंघाई। चीन के शंघाई शहर में स्थित स्टार्टअप एनर्जी सिंगुलैरिटी ने घोषणा की है कि उसके एचएच70 उच्च तापमान सुपरकंडक्टिंग (एचटीएस) टोकामक (कृत्रिम सूर्य) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस नाभिकीय संलयन उपकरण ने 1,337 सेकंड तक निरंतर, लंबी अवधि के प्लाज्मा प्रवाह को बनाए रखने में सफलता हासिल की है।

सूर्य की नकल करने वाले परमाणु संलयन यंत्र को हमारी उर्जा जरूरतों को पूरा करने और कार्बन उत्सर्जन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रमुख उपकरण के तौर पर देखा जाता है।

चीन की पहली निजी संलयन ऊर्जा कंपनी के रूप में 2021 में स्थापित एनर्जी सिंगुलैरिटी ने जून 2024 में दुनिया के पहले एचटीएस टोकामक एचएच70 का निर्माण और संचालन पूरा किया था। इस उपकरण ने अब तक 5,755 प्रयोग किए हैं, जिसमें नवीनतम दौर ने हजार-सेकंड से अधिक तक उर्जा के स्थिर प्रवाह को प्राप्त किया है। इस स्तर तक स्थिर प्रवाह को प्राप्त करना एक शानदार उपलब्धि है क्योंकि प्लाज्मा बहुत गर्म होने के साथ ही बहुत अस्थिर होता है। 

उल्लेखनीय है कि टोकामक से स्थाई उर्जा या बिजली प्राप्त करना तभी संभव है जब प्लाज्मा का प्रवाह लगातार स्थिर बना रहे। कंपनी के अनुसार, यह उपलब्धि एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित प्लाज्मा नियंत्रण प्रणाली के निरंतर अनुकूलन से संभव हुई है।

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एनर्जी सिंगुलैरिटी के सह-संस्थापक डोंग गे ने कहा, यह सफलता केवल समय के बारे में नहीं है, बल्कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह दर्शाती है कि एचटीएस और एआई नियंत्रण प्रौद्योगिकियों का गहरा एकीकरण इंजीनियरिंग स्तर पर व्यवहार्य हो गया है। यह भविष्य के संलयन बिजली संयंत्रों के कम लागत और उच्च दक्षता वाले निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है।

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डोंग ने कहा कि हमारा लक्ष्य संलयन ऊर्जा से बिजली की लागत को थर्मल पावर (तापीय ऊर्जा) के बराबर या उससे भी कम करना है। वर्तमान में, चीन सक्रिय रूप से खुद को संलयन ऊर्जा के लिए एक वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है और एचटीएस टोकामक एवं लेजर फ्यूजन सहित कई तकनीकों में लगातार प्रयोग कर रहा है।

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