चीन का टैरिफ फ्रॉड: अमेरिकी कंपनियां को नुकसान, 10.2 लाख करोड़ की चपत
ट्रेड फ्रॉड: अमेरिकी टैरिफ से बचने का 'चीनी जुगाड़'
डोनाल्ड ट्रंप के भारी टैरिफ से बचने के लिए चीनी कंपनियों ने $112 अरब का ट्रेड गैप पैदा कर दिया है। शेल कंपनियों और नकली इंपोर्टर्स के जरिए नियमों को दरकिनार कर सस्ता माल अमेरिका भेजा जा रहा है। इस 'डीडीपी' धोखाधड़ी और टैक्स चोरी से ईमानदारी से काम करने वाली अमेरिकी फर्में भारी घाटे और कॉम्पिटिटिव रिस्क का सामना कर रही हैं।
नई दिल्ली। अमेरिकी टैरिफ के हल्ले के बीच चीन की कंपनियों ने जुगाड़ निकाल लिया है। नकली इंपोटर्स की बाढ़ आ गई है। ये सस्ती शिपिंग का वादा करते हैं। इसने ईमानदारी से काम करने वाली अमेरिकी कंपनियों को नुकसान में खड़ा कर दिया है। एक्सपर्ट्स ने इसे ट्रेड फ्रॉड करार दिया है। ये तेजी से बढ़ा है। इससे नियम मानने वाली अमेरिकी कंपनियां लगातार नुकसान में हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी बिजनेस को वॉट्सऐप मैसेज और ईमेल मिल रहे हैं। इनमें चीन से बहुत सस्ती शिपिंग का वादा किया जा रहा है। इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समय लागू टैरिफ को बायपास करने के तरीके भी शामिल हैं। ये ऑफर्स अक्सर इतने अच्छे लगते हैं कि यकीन करना मुश्किल होता है।
अमेरिकन लॉन मोवर कंपनी के प्रेसिडेंट माइकल केर्सी के लिए यह मुद्दा गंभीर कॉम्पिटिटिव रिस्क है। उनकी फर्म पुश-रील मोवर और गार्डनिंग टूल्स के लिए जानी जाती है। वह नियमों का पालन करती है। पिछले साल चीनी इंपोर्ट पर 45% तक ड्यूटी चुकाई है। लेकिन, उनका मानना है कि कुछ कॉम्पिटिटर उन खर्चों से बच रहे हैं। ट्रेड डेटा बताता है कि अमेरिका को चीन के बताए गए एक्सपोर्ट और पिछले साल यूएस कस्टम ने जो इंपोर्ट के तौर पर रिकॉर्ड किया था, उसके बीच रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर (करीब 10.2 लाख करोड़ रुपए) का अंतर है। एनालिस्ट का कहना है कि इससे पता चलता है कि देश में सामान का एक बड़ा हिस्सा बिना पूरे टैरिफ पेमेंट के आया होगा।
क्यों यह अंतर आंखों में आया?
वैसे तो ऐसे अंतर सालों से हैं। लेकिन, मौजूदा अंतर ट्रंप के पहले ट्रेड वॉर के दौरान देखे गए फर्क से कहीं ज्यादा है। फेडरल रिजर्व रिसर्च ने अनुमान लगाया था कि टैरिफ चोरी इसी तरह के अंतरों का एक बड़ा हिस्सा है। हालांकि, चीन की टैक्स छूट पॉलिसी जैसे फैक्टर भी रिपोर्टिंग में अंतर का कारण हैं। कुछ विज्ञापन चीन से अमेरिकी शिपिंग रेट को
वैसे तो ऐसे अंतर सालों से हैं। लेकिन, मौजूदा अंतर ट्रंप के पहले ट्रेड वॉर के दौरान देखे गए फर्क से कहीं ज्यादा है। फेडरल रिजर्व रिसर्च ने अनुमान लगाया था कि टैरिफ चोरी इसी तरह के अंतरों का एक बड़ा हिस्सा है। हालांकि, चीन की टैक्स छूट पॉलिसी जैसे फैक्टर भी रिपोर्टिंग में अंतर का कारण हैं। कुछ विज्ञापन चीन से अमेरिकी शिपिंग रेट को $0.70 प्रति किलो तक कम बताते हैं। इसमें टैक्स भी शामिल हैं, यह एक बड़ा रेड फ्लैग है। कारण है कि टैरिफ प्रोडक्ट की वैल्यू के आधार पर कैलकुलेट किए जाते हैं, वजन के आधार पर नहीं।
.70 प्रति किलो तक कम बताते हैं। इसमें टैक्स भी शामिल हैं, यह एक बड़ा रेड फ्लैग है। कारण है कि टैरिफ प्रोडक्ट की वैल्यू के आधार पर कैलकुलेट किए जाते हैं, वजन के आधार पर नहीं।धोखाधड़ी कैसे की जाती है?:
एक आम तौर पर बताया जाने वाला तरीका डिलीवर्ड ड्यूटी पेड शिपिंग है। इसमें विदेशी सेलर कस्टम क्लियरेंस और टैरिफ पेमेंट को मैनेज करता है। जबकि डीडीपी लीगल है। धोखाधड़ी तब होती है जब सामान को कम आंका जाता है, गलत क्लासिफाई किया जाता है या ड्यूटी कम करने के लिए शेल कंपनियों के जरिए भेजा जाता है। खरीदारों को शायद पता न हो कि नियम तोड़े गए हैं।
फ्रॉड स्कीम अक्सर नॉन-रेसिडेंट इंपोर्टर्स या शेल फर्मों पर निर्भर करती हैं। ये रिकॉर्ड के इंपोर्टर के तौर पर काम करती हैं। जब अधिकारी जांच करते हैं तो उन्हें अक्सर नकली पते या ऐसी कंपनियां मिलती हैं जो पहले ही बंद हो चुकी हैं। इससे कानून लागू करना मुश्किल हो जाता है। जब विदेशी एक्टर या शेल कंपनियों से डील करते हैं जो जल्दी गायब हो जाती हैं तो एनफोर्समेंट एजेंसियों को अधिकार क्षेत्र की सीमाओं का सामना करना पड़ता है। इस वजह से जांच अक्सर अमेरिकी कंपनियों पर आ जाती है। इसका मतलब है कि कम्प्लायंस चेक और पेनल्टी उन फर्मों पर बहुत ज्यादा असर डाल सकती हैं जो नियमों का पालन करती हैं।

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