यूक्रेन-रूस युद्ध: पुतिन ने पहली बार मानी ईंधन संकट की बात, यूक्रेन के हमलों का बड़ा असर
यूक्रेनी हमलों से रूस में ईंधन संकट
मॉस्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार स्वीकार किया है कि यूक्रेन द्वारा तेल अवसंरचना पर लगातार किए जा रहे हमलों के कारण देश को "कुछ हद तक ईंधन की कमी" का सामना करना पड़ रहा है और सरकार ईंधन उत्पादन बढ़ाने तथा तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कदम उठा रही है। पुतिन ने रविवार को अधिकारियों के साथ ईंधन आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा बैठक में कहा कि देश "कठिन दौर" से गुजर रहा है, लेकिन सरकार अपनी सभी सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगी। इस बीच यूक्रेन ने दक्षिणी रूस की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर फिर हमला किया। क्षेत्रीय गवर्नर वेनियामिन कोंद्रात्येव के अनुसार, गिरते मलबे की चपेट में आकर स्लाव्यान्स्क में एक व्यक्ति की मौत हो गई तथा निकटवर्ती गांव में एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया।
करीब 40 लाख टन कच्चे तेल का वार्षिक प्रसंस्करण करने वाली यह रिफाइनरी दक्षिणी रूस की प्रमुख रिफाइनरियों में शामिल है और काला सागर के बंदरगाहों के जरिए निर्यात होने वाले फ्यूल ऑयल, नैफ्था और समुद्री ईंधन का प्रमुख स्रोत है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया कि यूक्रेन की सीमा से लगभग 700 किलोमीटर दूर यारोस्लाव क्षेत्र स्थित एक अन्य रूसी रिफाइनरी पर भी रात के समय हमला किया गया। हालांकि रूसी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। ताजा हमलों के बाद श्री पुतिन ने तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ाने और ईंधन उत्पादन में वृद्धि करने का निर्देश दिया। उन्होंने सरकारी टेलीविजन से कहा कि रूस की रक्षा उद्योग जल्द ही वायु रक्षा प्रणालियों का उत्पादन बढ़ाएगी ताकि यूक्रेनी हमलों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।
उन्होंने कहा कि स्थिति गंभीर नहीं है और अस्थायी ईंधन कमी को दूर करने के लिए रूस अधिक ईंधन आयात करेगा तथा क्षतिग्रस्त तेल प्रतिष्ठानों की मरम्मत का कार्य तेज करेगा। पुतिन ने विशेष रूप से क्रीमिया में ईंधन की कमी को शीघ्र दूर करने का आश्वासन देते हुए कहा कि काला सागर प्रायद्वीप में थल और समुद्री मार्ग से ईंधन की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी और उन्हें विश्वास है कि यह लक्ष्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने यूक्रेन के तेल रिफाइनरियों पर हमलों को रूसी समाज में विभाजन पैदा करने और रूस को अग्रिम मोर्चे पर अपनी सैन्य प्रगति रोकने के लिए मजबूर करने का प्रयास बताया।
पुतिन ने कहा, "हम उन्हें यह मौका नहीं देंगे। हमारी अवसंरचना पर किये गये हमलों का अग्रिम मोर्चे की स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।" रूसी राष्ट्रपति ने पहली बार यह भी खुलासा किया कि यूक्रेन ने दोनों देशों के बीच अग्रिम मोर्चे से दूर गहरे क्षेत्रों पर हमले रोकने का प्रस्ताव दिया था। पुतिन ने दावा किया कि कीव ने यह प्रस्ताव इसलिए दिया क्योंकि रूस की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता अधिक प्रभावी है।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने 2022 में रूस द्वारा एकतरफा विलय किये गये डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया तक ही सक्रिय लड़ाई सीमित रखने का भी प्रस्ताव दिया था। श्री पुतिन ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि यह यूक्रेनी सेना को अन्य क्षेत्रों से अपने सैनिक हटाकर इन चार क्षेत्रों में केंद्रित करने की रणनीतिक चाल थी और रूस इस तरह की किसी व्यवस्था से सहमत नहीं होगा।

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