पारिवारिक समस्याएं और देश के प्रति कर्तव्य की कहानी

फिल्म समीक्षा राष्ट्र कवच ओम

पारिवारिक समस्याएं और देश के प्रति कर्तव्य की कहानी

जी स्टूडियोज और अहमद खान द्वारा प्रस्तुत, ए पेपर डॉल एंटरटेनमेंट प्रोडक्शन, जी स्टूडियोज, शायरा खान और अहमद खान द्वारा निर्मित, इस फिल्म का निर्देशन कपिल वर्मा ने किया है। फिल्म ‘राष्ट्र कवच ओम’ में एक्टर आदित्य रॉय कपूर अपनी हाई-ऑक्टेन एक्शन-थ्रिलर के लिए लगातार सुर्खियां में रहे हैं।

जी स्टूडियोज और अहमद खान द्वारा प्रस्तुत, ए पेपर डॉल एंटरटेनमेंट प्रोडक्शन, जी स्टूडियोज, शायरा खान और अहमद खान द्वारा निर्मित, इस फिल्म का निर्देशन कपिल वर्मा ने किया है। फिल्म ‘राष्ट्र कवच ओम’ में एक्टर आदित्य रॉय कपूर अपनी हाई-ऑक्टेन एक्शन-थ्रिलर के लिए लगातार सुर्खियां में रहे हैं। 200 करोड़ के बजट में बनी ये फिल्म उस मापदंड में खरी नहीं उतरती, जितना इस फिल्म का हाईप और प्रमोशन हुआ था । इस फिल्म में जैकी श्रॉफ उर्फ देव राठौड़ एक वैज्ञानिक हैं। वह सरकार के साथ मिलकर एक मिशन पर होते हैं, लेकिन उनके अचानक लापता होने की खबर से हंगामा मच जाता है। इसी साइंटिस्ट की तलाश का जिम्मा आदित्य रॉय कपूर को मिलता है, जो पैरा कमांडो के किरदार में है। फिल्म की कहानी में मोड़ तब आता है, जब वैज्ञानिक को देशद्रोही समझ लिया जाता है और ये मामला धीरे-धीरे देशद्रोह तक पहुंच जाता है फिर देश की एजेंसियां उनकी तलाश में लग जाती हैं। आदित्य रॉय कपूर, जैकी श्रॉफ की तलाश में किन-किन दिक्कतों से जूझते हैं, आखिर ये गुत्थी किस तरह सुलझती है। असली देशद्रोही कौन है, उनका मकसद क्या था। यह तो आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा।


फिल्म में सब घटनाक्रम बहुत तेजी से बदलते हैं, इतनी तेजी से की दर्शक असमंजस में पड़ जाता है की ये कैसे हुआ। कहानी ठीक है, लेकिन उसकी पटकथा में इतने ट्विस्ट एंड टर्न भर दिए हैं कि सर ही चकरा जाता है। पारिवारिक समस्याएं और देश के प्रति कर्तव्य के बीच एक्शन से भरी इस फिल्म में आदित्य रॉय कपूर ने काफी मेहनत की है। उन्होंने अपनी चॉकलेट बॉय वाली इमेज से एक रफ टफ कमांडो के किरदार को दिल से जिया है। उनका दर्द लोगों को छूता है। यादशत और अपने बीते कल की कश्मकश में उलझा हुआ कमांडो अपने खून की हर बूंद देश को समर्पित करने वाले किरदार को साकार करता है। फिल्म के डायरेक्टर ने इस फिल्म में जान भरने के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया है, पर कमी साफ झलकती है। पटकथा कमजोर और पुरानी लगती है। जैकी श्रॉफ ने अपनी भूमिका से न्याय किया है, संजना संघी दिल बेचारा के बाद एक रॉ एजेंट की भूमिका में अच्छी लगती हंै, उनकी आदित्य के साथ केमिस्ट्री खूब जमी है। आशुतोष राणा और प्रकाश राज जैसे मंझे हुए कलाकार अपनी छाप छोड़ने में कामयाब हुए हैं। ये एक हार्ड-कोर मास फिल्म है। साउंड ट्रैक बहुत अच्छा है, लेकिन वी एफ एक्स इफेक्ट्स में करने के लिए बहुत कुछ गुंजाइश थी। खैर फिल्म में सब कुछ था मगर उस मुकाम तक पहुंचने में नाकामयाब होती है, जितनी इससे उम्मीद थी।
-दानिश राही

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