कोरोना का असर : प्राइवेट के बजाय सरकारी विद्यालयों के प्रति बढ़ा बच्चों का रुझान

कोरोना का असर : प्राइवेट के बजाय सरकारी विद्यालयों के प्रति बढ़ा बच्चों का रुझान

असर रिपोर्ट-2021 का सर्वे : अभिभावकों का निजी स्कूलों से मोहभंग

जयपुर। कोरोना के कारण अभिभावकों का निजी स्कूलों के प्रति मोहभंग हो गया है और अब अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले के लिए सरकारी स्कूलों की तरह भाग रहे है। निजी स्कूलों में दाखिले की संख्या 2018 में 32.5 प्रतिशत थी, जो 2021 में 8.1 घटकर 24.4 प्रतिशत तो सरकारी विद्यालयों में  नामांकन 2018 में 59.1% से 9.3 प्रतिशत बढ़कर 2021 में 68.4% हो गया है। इसका मुख्य कारण कोरोना के चलते लोगों के पास जॉब न होना है, जिसके चलते अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर हो रहे है। पिछले तीन साल में छात्रों का रुझान देश के निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों की ओर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (असर-2021) में यह जानकारी सामने आई। यह रिपोर्ट 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है। कुल 76,706 घरों और पांच से 16 साल के 75,234 बच्चों के साथा-साथ प्राथमिक शिक्षा देने वाले 7,299 सरकारी स्कूलों के शिक्षकों या प्रधान शिक्षकों तक यह सर्वेक्षण किया गया। बुधवार को जारी की गई एएसईआर की 16वीं रिपोर्ट में कहा गया, अखिल भारतीय स्तर पर, निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों की ओर स्पष्ट रूप से झुकाव देखा गया है। छह से 14 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में दाखिले की संख्या 2018 में 32.5 प्रतिशत थी जो 2021 में घटकर 24.4 प्रतिशत रह गई।


-यह भी चौकानें वाली बात
रिपोर्ट में कहा गया, यह सभी कक्षाओं और लड़कों तथा लड़कियों के बीच देखा गया। हालांकि निजी स्कूलों में लड़कों का दाखिला कराने की संभावना लड़कियों की तुलना में अब भी अधिक है।


सरकारी स्कूलों में 2018 में औसतन 64.3 प्रतिशत दाखिला हुआ जो पिछले साल बढ़कर 65.8 प्रतिशत हो गया और इस साल यह 70.3 प्रतिशत पर पहुंच गया। वर्ष 2006 से 2014 तक निजी स्कूलों में दाखिले की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गई।निजी स्कूलों में दाखिले की संख्या 2018 में 32.5 प्रतिशत थी, जो 2021 में 8.1 घटकर 24.4 प्रतिशत तो सरकारी विद्यालयों में नामांकन 2018 में 59.1% से 9.3 प्रतिशत बढ़कर 2021 में 68.4% हो गया।

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रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सालों तक 30 प्रतिशत पर टिके रहने के बाद, महामारी के सालों में इसमें उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। कोविड के पहले भी सरकारी स्कूलों में लड़कियों की संख्या लड़कों से ज्यादा थी। रिपोर्ट में कहा गया कि यह समय के साथ जारी है।


-राजस्थान में भी पहुंचा

असर सर्वेक्षण राजस्थान के 33 जिलों के 4691 घरों में 5-16 आयु वर्ग के 5380 बच्चों तक पहुंचा है।

हम आज भी महामारी के बदलते माहोल से नए सामान्य परिस्थितियों की और बढ़ रहे हैं। जहां हमें सरकारी स्कूलों में बढ़ते नामांकन के साथ ही सीखनें के नुकसान में सुधार के लिए पर्याप्त सुविधाएं और संसाधन सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता है। इसके लिए हाइब्रिड शिक्षण गतिविधियों के मिश्रण के साथ वर्तमान में घर पर मिल रहे शिक्षण सहयोग को समायोजित व मजबूत करने के नए तरीके तलाशने की आवश्यकता है। वर्तमान डिजिटल उपकरण एक गंभीर चुनौती है, डिजिटल उपकरणों व इन्टरनेट कनेक्टिविटी की गुणवक्ता व सार्वभौमिक उपलब्धता के लिए हमें सभी बच्चों के लिए अतिरिक्त समाधान तलाशने होंगे। - के.बी. कोठारी, मैनेजिंग ट्रस्टी, असर प्रथम राजस्थान

पिछले तीन सालों में सबसे अधिक बढ़ा नामांकन, हो रहे बंपर एडमिशन
25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 76,706 घरों और पांच से 16 साल के 75,234 बच्चों के बीच हुआ सर्वेक्षण

यह है मुख्य तथ्य
    नामांकन की स्थिति  : 6 -14 आयु वर्ग के बच्चों का सरकारी विद्यालयों में नामांकन 2018 में 59.1% से बढ़कर 2021 में 68.4% हो गया है।
राजस्थान में 6-14 आयु वर्ग केअनामांकित बच्चों के अनुपात में बदलाव: 2018 में अनामांकितबच्चों का अनुपात 3.4% था, जो कि 2020 में बढ़कर 6.6% हो गया था। लेकिन अभी अनामांकित बच्चों के प्रतिशत में थोडा सुधार देखने को मिला है और  2021 मेंयह अनुपात 4.5% पर आ गया है।
    ट्यूशन लेने वाले बच्चों में वृद्धि : राष्ट्रीय स्तर पर, 2018 में, 30% से कम बच्चे निजी ट्यूशन कक्षाएं लेते थे। 2021 में यह अनुपात बढ़कर लगभग 40% हो गया है। यह अनुपात दोनों लड़के और लड़कियों, सभी कक्षाओं और दोनों सरकारी और निजी स्कूलों में जाने वाले बच्चों के लिए बढ़ा है।
-राजस्थान के लिए यह आंकड़ा 2018 में 5.1% था जो 2021 में बढ़कर 15.3% हो गया है यह10.2% बढ़ा है। ट्यूशन लेने वाले बच्चों की संख्या में बड़ा बदलवा देखने को मिला है।
-ट्यूशन में सबसे अधिक वृद्धि आर्थिक रूप से वंचित वर्ग में
आर्थिक स्थिति के लिए माता-पिता की शिक्षा के स्तर को प्रॉक्सी मानते हुए, कम पढ़े-लिखे(प्राथमिक शिक्षा या कम) माता-पिता के बच्चों में ट्यूशन लेने के अनुपात में 12.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि अधिक पढ़े-लिखे (कक्षा 9 या अधिक) माता-पिता के बच्चों में यह वृद्धि 7.2 प्रतिशत की है।
-राष्ट्रीय स्तर पर 2018 की तुलना में लगभग दुगने घरों में स्मार्टफोन उपलब्ध
स्मार्टफोन की उपलब्धि 2018 में 36.5% से बढ़कर 2021 में 67.6% हो गई है, लेकिन सरकारी विद्यालय जाने वाले बच्चों की अपेक्षा (63.7%) निजी विद्यालय के ज्यादा बच्चों के पास स्मार्टफोन उबलब्ध हैं (79%)।

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-राजस्थान में स्मार्टफोन उपलब्ध
स्मार्टफोन की उपलब्धि 2018 में 39.7% से बढ़कर 2021 में 66.6% हो गई है।
-राजस्थान में स्मार्टफोन होने के बाद भी बच्चों के उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं है।
-पिछले एक वर्ष में घर पर बच्चों को पढ़ाई में मिलने वाला सहयोग कम हुआ है:घर पर पढ़नेमें सहयोग मिलने वाले नामांकित बच्चों का अनुपात2020 में तीन चौथाई से घटकर 2021 में दो तिहाई हो गया है।सहयोग में सबसे ज्यादा गिरावट उच्च कक्षा (कक्षा 9 या अधिक) के बच्चों के लिए आई है।
-राजस्थान में भीबच्चों को पढाई में घर पर मिलने वाले सहयोगमें कमी आई है 2020 में 62.4% बच्चों को घर पर पढाई में सहयोग मिल रहा था, लेकिन 2021 में 52.4% बच्चों को ही घर पर पढ़ाई में सहयोग मिल रहा है।
-दोनों सरकारी और निजी विद्यालय जाने वाले बच्चों में, जिन बच्चों के विद्यालय खुल गए है, उनको घर से कम सहयोग मिल रहा है। उदाहरण के लिए, जो निजी विद्यालय नहीं खुले है, उनमें जाने वाले 75.6% बच्चों को पढ़ने में सहयोग मिलता है। इसकी तुलना में खुले हुए निजी विद्यालयों में जाने वाले 70.4% बच्चों को यह मदद मिलती है।


-राष्ट्रीय स्तर पर लगभग सभी बच्चों के पास पाठ्यपुस्तकें है
लगभग सभी नामांकित बच्चों के पास अपनी वर्तमान कक्षा की पाठ्यपुस्तकें हैं (91.9%)। दोनों सरकारी और निजी विद्यालयों के बच्चों के लिए यह अनुपात पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ गया है।
राजस्थान में भी लगभग 90% बच्चों के पास अपनी वर्तमान कक्षा की पाठ्यपुस्तकें है 2021 में निजी विद्यालयों के 82.6% व सरकारी स्कूलों के 91.9% बच्चों के पास अपनी वर्तमान कक्षा की पाठ्यपुस्तकें हैे। यहां निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन बेहतर दिखाई दे रहा है।


अतिरिक्त शैक्षिक सामग्री की प्राप्ति में थोड़ी बढ़ोतरी

जिन नामांकित बच्चों के विद्यालय नहीं खुले हैं, उनमें से 39.8% बच्चों को सर्वेक्षण के पिछले सप्ताह में अपने शिक्षक द्वारा किसी प्रकार की शैक्षिक सामग्री या गतिविधियां (पाठ्यपुस्तकों के अलावा) प्राप्त हुई। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, जब यह अनुपात 35.6% था।

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-राजस्थान में 2021 सर्वेक्षण के दौरान बच्चे द्वारा घर पर की जा रही लर्निंग गतिविधियां
61% बच्चे घर पर अपनी पाठ्यपुस्तक व वर्कशीट से पढ़ाई कर रहे है, 8.4% बच्चे टी.वी. या रेडियो पर और 16.8% बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई द्वारा प्राप्त गतिविधियों को करते पाए गए।
 

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