लिफ्ट तो लगी है लेकिन मेंटीनेंस भगवान भरोसे

आए दिन हो रहे हादसे, फिर भी नहीं ली जा रही सुध

लिफ्ट तो लगी है लेकिन मेंटीनेंस भगवान भरोसे

आवासीय इमारतों में हजारों परिवार रह रहे हैं। वहीं व्यवसायिक इमारतों हॉस्टल, कोचिंग, मॉल, अस्पताल और होटल तक में लिफ्ट लगी हुई हैं। जिनका उपयोग 24 घंटे हो रहा है। शायद ही कोई ऐसा समय हो जब लिफ्ट का उपयोग नहीं होता हो। हालत यह है कि एक के बाद एक लगातार लिफ्ट चलती रहती है। जिससे क्षमता से अधिक समय तक और भार सहने वाली लिफ्ट को समय-समय पर मेंटेनेंस की जरूरत होती है। लेकिन अधिकतर लिफ्ट की समय पर मेंटेनेंस नहीं होने से हादसे हो रहे हैं।

कोटा । स्मार्ट सिटी कोटा शहर में विकास व विस्तार के साथ ही बहुमंजिला इमारतों की बाढ़ सी आ गई है। हर आवासीय व व्यवसायिक इमारतों में लिफ्ट भी लगाई गई है। लेकिन उनकी मेंटेनेंस भगवान भरोसे है। जबकि शहर में आए दिन लिफ्ट में फंसने के हादसे हो रहे हैं। राज्य की राजधानी जयपुर जैसे शहर में तीन दिन पहले एक अपार्टमेंट की लिफ्ट में हादसा हो चुका है। जहां अपार्टमेंट में लिफ्ट के नहीं आने और उसका दरवाजा खुलने पर 11 मंजिल से गिरकर  एक इंजीनियरिंग छात्र की मौत भी हो चुकी है। उस अपार्टमेंट में रहने वालों ने लिफ्ट की नियमित मेंटेनेंस नहीं होने का आरोप लगाया था। जयपुर शहर ही नहीं कोटा में भी पिछले कई सालों में बहुमंजिला इमारतों की बाढ़ सी आ गई है। नए कोटा से लेकर बारां रोड व बूंदी रोड पर और डकनिया स्टेशन से लेकर नदी पार क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में इमारतें बनी हुई हैं। हर इमारत में लिफ्ट भी लगी हुई है। निजी भवनों के अलावा सरकारी कार्यालयों व भवनों में भी लिफ्ट  लगी हुई है। हालांकि निजी इमारतों में लिफ्ट की मेंटेनेंस के नाम पर वहां रहने वालों से मोटी रकम भी वसूल की जा रही है। लेकिन लिफ्ट की मेंटेनेंस समय पर हो रही है या नहीं इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है। आवासीय इमारतों में जहां हजारों परिवार रह रहे हैं। वहीं व्यवसायिक इमारतों हॉस्टल, कोचिंग, मॉल, अस्पताल और होटल तक में लिफ्ट तो लगी हुई हैं। जिनका उपयोग दिनभर और 24 घंटे हो रहा है। शायद ही कोई ऐसा समय हो जब लिफ्ट का उपयोग नहीं होता हो। हालत यह है कि एक के बाद एक लगातार लिफ्ट चलती रहती है। जिससे क्षमता से अधिक समय तक और भार सहने वाली लिफ्ट को समय-समय पर मेंटेनेंस की जरूरत होती है। लेकिन अधिकतर लिफ्ट की समय पर मेंटेनेंस नहीं होने से हादसे हो रहे हैं। 

कांट्रेक्ट के हिसाब से होती है मेंटीनेंस
इधर ओटिस एलिवेटर कम्पनी के प्रतिनिधि से जानकारी करने पर उन्होंने बताया कि इमारत में लिफ्ट लगाते समय एक कांट्रेक्ट किया जाता है। उस कांट्रेक्ट के हिसाब से एक महीना, दो महीना या तीन महीने में मेंटीनेंस करने का प्रावधान है।  नियमित मेंटेनेंस होने से बार-बार बंद होने की समस्या नहीं रहती है। 

निगम-यूआईटी समेत सरकारी जगहों पर भी लिफ्ट
शहर में सिर्फ आवासीय व व्यवसायिक इमारतों में ही नहीं अब  सरकारी कार्यालयों तक में लिफ्ट लगने लगी है। नगर निगम का नया भवन बनने के बाद वर्ष 2012 में यहां लिफ्ट लगाई गई थी। नगर विकास न्यास की नवविस्तारित भवन के बनने पर सवा साल पहले जुलाई 2021 में यहां लिल्ट लगाई गई। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, रेलवे स्टेशन और नए बने एमबीएस व जे.के. लोन असपताल के ओपीडी ब्लॉक में भी लिफ्ट लगाई गई है। 

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हालत यह है कि सरकारी इमारतों व अस्पतालों में लिफ्ट की मेंटेनेंस तो भगवान भरोसे चल रही है। यही कारण है कि गत दिनों मेडिकल कॉलेज अस्पताल की लिफ्ट अचानक बंद होने से उसमें भाजपा के कई नेता फंस गए थे। उससे पहले रेलवे स्टेशन की लिफ्ट में भी कुछ लोगों के फंसने की घटना हो चुकी है। लिफ्ट के  चलते समय अचानक बंद या खराब होने पर उसमें फंसे लोगों से उनकी पीड़ा का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि नगर निगम कार्यालय की लिफ्ट खराब होने से कुछ समय तक बंद रही थी। जिसे बाद  में ठीक कराया गया था। हालांकि उसे काफी समय हो गया है। उसके बाद लिफ्ट की मरम्मत हुई या नहीं इसकी जानकारी नहीं है।  इतना ही नहीं जयपुर में एक इंजीनियरिंग छात्र की लिफ्ट के कारण हुई मौत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 

इनका कहना है
नगर निगम का नया भवन बनने के समय वर्ष 2012 में यहां लिफ्ट लगाई गई थी। उस समय लिफ्ट लगाने वाली कम्पनी को ही उसके मेंटेनेंस का कार्य दिया गया था। कम्पनी से नियमित मेंटेनेंस की थी। वर्तमान में लिफ्ट का काम निगम का बिजली अनुभाग देख रहा है। इस काम को ठेके पर दिया हुआ है। 
- ए.क्यू कुैरशी, एक्सईन,  नगर निगम कोटा दक्षिण 

अलग से कोई विभाग नहीं करता जांच
सरकारी विभाग हो या प्राइवेट इमारत उनमें लगी लिफ्ट की मेंटेनेंस संबधित कम्पनी द्वारा या सोसायट ही करती है। सरकारी विभागों में भी संबंधित विभाग की ही जिम्मेदारी रहती है। नगर निगम या अन्य कोई अलग से ऐसा विभाग नहीं है जो सभी भवनों की लिफ्ट की मेंटेनेंस की जांच करता हो। 
- सचिन यादव, एक्सईएन, नगर निगम कोटा 

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नहीं दिया जवाब
नगर विकास न्यास में लगी लिफ्ट की मेंटेनेंस के बारे में जानने के लिए संबंधित एक्सईएन को फोन किया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। न्यास सचिव राजेश जोशी से जब इस बारे में जानना चाहा तो उन्होंने भी न तो फोन रिसीव किया और न ही मैसेज का जवाब दिया। 

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