आर्थिक तंगी में टूट न जाए ओलंपिक का सपना

अभी से 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी में जुटी है जयपुर की नन्ही गोल्फर शिक्षा जैन

आर्थिक तंगी में टूट न जाए ओलंपिक का सपना
शिक्षा अभी अपने एज ग्रुप में देश में नम्बर दो पर है और उसका लक्ष्य 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। लेकिन पैसे की तंगी में उसका यह सपना कहीं टूट न जाए।

जयपुर। गुलाबी नगर की नन्ही गोल्फर शिक्षा जैन अभी मात्र 12 वर्ष की हैं लेकिन इस छोटी सी उम्र में ही उसने देश-विदेश में अपनी कामयाबी से प्रभावित किया है। शिक्षा अभी अपने एज ग्रुप में देश में नम्बर दो पर है और उसका लक्ष्य 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। लेकिन पैसे की तंगी में उसका यह सपना कहीं टूट न जाए। रामबाग गोल्फ कोर्स पर चल रहे कॉरपोरेट गोल्फ टूर्नामेंट में खेल रही शिक्षा ने नवज्योति से खास बातचीत में बताया कि उसने कैलिफोर्निया में होने वाली एफसीजी कालावे वर्ल्ड चैंपियनशिप समेत कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए क्वालीफाई किया है लेकिन उनका मध्यवर्गीय परिवार इतना खर्च उठाने में सक्षम नहीं है कि उन्हें सभी टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने भेज सके। शिक्षा ने कहा कि ऐसे हालात में वह चुनिंदा टूर्नामेंटों में ही हिस्सा ले पाती है। 

मात्र चार साल में लगाया ट्रॉफियों का अम्बार
शिक्षा ने बताया कि खेलों में उन्होंने शुरुआत बैडमिंटन से की। टेनिस भी खेला लेकिन उनका मन गोल्फ में लगा। सात साल की उम्र में उन्होंने पहली बार गोल्फ कोर्स देखा। ट्रेनिंग शुरू की और फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ढेरों ट्रॉफियां जीतीं। उन्होंने बताया कि वह अब तक बीस से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिताब जीत चुकी है और इतने ही टूर्नामेंटों में सिल्वर या ब्रांज मेडल हासिल किया है। 

कामयाबी का राज 8 से 10 घंटे प्रैक्टिस
शिक्षा ने कहा कि 2028 के ओलंपिक खेलों से पहले वह 2026 में विक्टोरिया (आस्ट्रेलिया) में होने वाले कामनवेल्थ गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं। कामनवेल्थ गेम्स में पहली बार गोल्फ को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि उनका सपना ओलंपिक गोल्ड जीतकर देश में गोल्फ के खेल को शिखर पर पहुंचाना है। शिक्षा ने कोचिंग और फिटनेस पर फोकस को ही अपनी कामयाबी का राज बताया। उन्होंने कहा कि वे रोज 8 से 10 घंटे प्रैक्टिस करती हैं। 

परिवार से ज्यादा खर्च खेल पर 
शिक्षा के पिता सन्नी जैन प्राइवेट टीचर हैं। सन्नी का कहना है कि बेटी के सपने को पूरा करने के लिए वे हरसंभव प्रयास करते हैं। उनके पूरे परिवार से ज्यादा खर्च बेटी के खेल पर रहता है। सन्नी ने कहा कि जयपुर में ज्यादा टूर्नामेंट नहीं होते। ऐसे में रैंकिंग पॉइंट्स के लिए उन्हें दिल्ली, नोएडा, गुड़वांव, चंडीगढ़, बेंगलोर जैसे शहरों में ज्यादा से ज्यादा टूर्नामेंट खेलने होते हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी टूर्नामेंटों के लिए उन्होंने कुछ बड़ी कंपनियों से स्पांसरशिप के लिए प्रयास किए लेकिन बात नहीं बनी। अब उन्होंने केन्द्रीय खेलमंत्री अनुराग ठाकुर और राज्य के खेलमंत्री अशोक चांदना को मेल भेजकर मदद की गुहार लगाई है। 

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Tags: sports golf

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