रीट पेपर सियासी घमासान : बढ़ने लगा विवाद, सांसद किरोड़ी ने फिर जारी किया चीटिंग का काला चिठ्ठा, किए कई खुलासा

रीट पेपर सियासी घमासान : बढ़ने लगा विवाद, सांसद किरोड़ी ने फिर जारी किया चीटिंग का काला चिठ्ठा, किए कई खुलासा

किरोड़ी मीणा के आरोपों से राजनीतिक हलचल : इस मामले में मंत्री, बड़ा प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल : सीबीआई से मामले की जांच करवाकर रीट परीक्षा दोबारा करवाई जाए

जयपुर। रीट-2021 पेपर आउट होने का विवाद नहीं थम रहा है। 26 सितंबर को हुई परीक्षा के बाद से ही प्रदेश के बेरोजगार युवा, राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और भाजपा विरोध कर रही है। ये सभी मामले की जांच सीबीआई और परीक्षा दोबारा से करवाने की मांग कर रहे हैं। सांसद किरोड़ी ने गुरुवार को प्रेसवार्ता करते हुए एक बार फिर कई खुलासे किए। उन्होनें इस मामले में मंत्रियों, बड़े प्रशासनिक अधिकारियों के शामिल होने के आरोप लगाए है।


तीन माह पहले दिए तथ्य

मीणा ने कहा कि एसओजी ने भजनलाल विश्नोई और राम कृपाल मीणा को गिरफ्तार किया और शिक्षा संकुल से पेपर लीक होना स्वीकार किया है। यह तथ्य मैंने सरकार और एसओजी को करीब तीन महीने पहले ही दे दिए थे कि रामकृपाल मीणा के ब्लैक लिस्टेट कॉलेज को रीट परीक्षा का सेंटर बनाया गया था। शिक्षा संकुल से पेपर लीक का मामला पहले ही उजागर कर चुका हूं। प्रकरण में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली और जिला कॉर्डिनेटर प्रदीप पाराशर की अहम भूमिका है। परीक्षा से पहले 24 सितंबर को जारोली शिक्षा संकुल में आए थे और पाराशर के साथ पार्टी भी की।

बोर्ड अध्यक्ष को सत्ता का संरक्षण
मीणा ने कहा कि बोर्ड अध्यक्ष को सत्ता का संरक्षण मिला है तभी वे तथ्यों का जबाव देने के बजाय मेरा इस्तीफा मांग रहे थे। परीक्षा से पहले पेपर कई लोगों के पास गए है और जोधपुर में तो करीब पांच हजार लोगों के पास पेपर पहुंचा। मंत्री की जान-पहचान वाले एक व्यक्ति की कोलकाता की प्रिंटिंग प्रेस को पेपर छपवाने का टेंडर दिया। यह व्यक्ति खुद अहमदाबाद का निवासी है। वहीं, राजस्थान विवि में एबीवीपी ने तो शिक्षा संकुल में बेरोजगारों ने विरोध किया और राज्य बोर्ड अध्यक्ष से इस्तीफा मांगा है।

रीट पेपर में एसओजी का खुलासा : जयपुर के शिक्षा संकुल में बने स्ट्रांग रूम से पेपर हुआ था लीक : अब तक कुल 35 आरोपितों को कर चुकी है गिरफ्तार

जयपुर। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने खुलासा किया है कि रीट पेपर जयपुर में शिक्षा संकुल में बने संग्रहण केन्द्र से लीक हुआ था। यह 26 सितम्बर को आयोजित रीट की परीक्षा से एक दिन पहले ही 25 सितम्बर को लीक कर दिया गया था। एसओजी के एडीजी अशोक राठौड़ ने बताया कि टीम ने रीट परीक्षा पेपर आउट प्रकरण में मुख्य आरोपी भजनलाल को पूर्व में गिरफ्तार किया था। जब उससे पूछताछ की गई तो सामने आया कि रीट का पेपर उसे उदाराम विश्नोई पुत्र जगराम निवासी रणोदर चितलवाना जालौर ने दिया था।

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टीम ने उदाराम को गिरफ्तार कर लिया। जब टीम ने उदाराम से पूछताछ शुरू की तो उसने खुलासा कि उसे यह पेपर रामकृपाल मीणा पुत्र नोनदाराम निवासी जगन्नाथपुरी शिव शक्ति पब्लिक स्कूल, कॉलेज त्रिवेणी नगर गोपालपुरा बाईपास ने शिक्षा संकुल जयपुर में स्थित पेपर संग्रहण केन्द्र से परीक्षा से पूर्व 25 सितम्बर को ही निकालकर दिया था। एसओजी की टीम उदाराम और रामकृपाल मीणा से पूछताछ कर रही है। इसके अलावा इस प्रकरण से जुड़े अन्य गिरोह के सदस्यों एवं लाभार्थियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। बताया जा रहा है कि पेपर लीक करने का सौदा सवा करोड़ रुपए में तय हुआ था। एसओजी की टीम गुरुवार को अजमेर में आरपीएससी बोर्ड पहुंची और जांच कर रिकॉर्ड के बारे में जानकारी जुटाई।

एसओजी ने बोर्ड अध्यक्ष जारोली से की पूछताछ
अजमेर।  एसओजी की टीम गुरुवार को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सिविल लाइन्स स्थित रीट कार्यालय पहुंची। इससे हड़कंप मच गया। बोर्ड अध्यक्ष डी.पी. जालोरी से पूछताछ की और परीक्षा से जुड़े दस्तावेज साथ ले गई। इस बीच, जारोली ने कहा कि पेपर लीक में कोई बोर्ड कर्मचारी लिप्त मिला, तो वे खुद इस्तीफा दे देंगे। टीम ने बोर्ड अध्यक्ष से रीट के प्रश्न-पत्र की बुकलेट कहां-कहां कितनी-कितनी भेजी गई और कितनी अतिरिक्त थी, जैसे मुद्दों पर जानकारी ली।


कुछ दस्तावेजों को जब्त किया। इस बारे में बोर्ड प्रशासन ने भी एसओजी को पत्र दिया। जालोरी ने बताया कि बोर्ड की जिम्मेदारी प्रश्न-पत्र जिलों की ट्रेजरी तक पहुंचाने की थी। उसके बाद परीक्षा आयोजन अध्यक्ष ही प्रश्न-पत्र केन्द्र तक पहुंचाते हैं। अध्यक्ष कलक्टर होते हैं। इसमें पुलिस अधीक्षक व अन्य अधिकारीगण भी इस प्रक्रिया में शामिल होते हैं।  बोर्ड स्तर पर रीट को लेकर पूरी तरह गोपनीयता रखी गई थी। इसलिए बोर्ड के स्तर पर चूक होने की संभावना नहीं है।  उन्होंने कहा कि अगर प्रश्न-पत्र लीक मामले में बोर्ड के किसी कर्मचारी की लिप्तता मिलती है, तो वह खुद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कहा कि एसओजी की अब तक की जांच में बोर्ड के किसी भी कर्मचारी की मिलीभगत सामने नहीं आई है।


पहले भी आ चुकी है एसओजी

बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि पहले भी एसओजी की टीम रीट कार्यालय में जांच करने आई थी। उस दौरान भी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद उनसे संबंधित दस्तावेज की जांच कर उन्हें ले गई थी। एसओजी की टीम ने मामले में मीडिया से बातचीत नहीं की। उन्होंने जांच को पूरी तरह गोपनीय रखा। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में यह सामने आया था कि रीट प्रश्न-पत्र जयपुर में लीक हुआ है। परीक्षार्थी को जो प्रश्न-पत्र दिया गया था। वो एक शिक्षण संस्था के संचालक द्वारा दिया गया था।




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