तीरंदाजी प्रतियोगिता में मनमानी, टैलेंड का पिछड़ रहा लक्ष्य

जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता

तीरंदाजी प्रतियोगिता में मनमानी, टैलेंड का पिछड़ रहा लक्ष्य

संस्थान से गए हुए काफी बच्चे ऐसे थे जो राज्य स्तरीय प्रतियोगिता खेल सकते थे।

कोटा। राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है जिसमें अनेक प्रकार के खेल जैसे बेडमिन्टन, बॉक्सिंग, तैराकी और बॉस्केटबॉल आदि का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन विभागीय अव्यवस्था के कारण खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गत दिनों हुई तीरंदाजी प्रतियोगिता में तो मनमानी का स्तर यह था कि बच्चें के तीन-तीन हजार के तीर टूट रहे थे और आयोजक थे कि अपनी मनमानी पर उतरे थे। दरअसल प्रतियोगिता ऐसे स्थान पर थी जहां टार्गेटके पीछे दीवार थी। दीवार से टकराकर महंगे तीर टूट रहे थे। जब कि तीरंदाजी के लिए टार्गेट के पीछे खाली स्थान होना चाहिए जिससे तीर कितनी भी दूरी पर जाकर गिर सके। 

3 हजार का है एक तीर
प्रतियोगी लक्ष्यराज(परिवर्तित नाम) ने बताया कि इस प्रतियोगिता में तीर और बाण उनके अपने थे जो उन्हें खुद ही ले जाने थे। एक तीर की कीमत करीब 3 हजार रुपए थी और बच्चों के ऐसे तीन से चार तीर खराब हो गए। लक्ष्यराज का कहना है कि इसकि जिम्मेदारी लेने वाला भी कोई नहीं है जो नुकसान कि भरपाई कर सके। 

9,10 व 11 सितम्बर को हुआ था आयोजन
कोटा जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता के तहत हुई अन्डर 17 तीरंदाजी प्रतियोगिता में यह अनियमिताएं पाई गई। प्रथम चरण कि तीरंदाजी प्रतियोगिताओं का आयोजन शिक्षा विभाग द्वारा 9,10 व 11 सितम्बर को  एक निजी स्कूल में किया गया था जहां खिलाड़ीयों को इन अनियमितताओं के चलते निराश होना पड़ा। श्री पंचमुखी आर्चरी अकादमी के कोच बृजपाल सिंह सोलंकी का कहना है कि उनके  करीब बीस बच्चों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया था जहां बच्चों को काफी परेशानीं का सामना करना पड़ा। बच्चों का कहना है कि जब वो आयोजन स्थल पर गए तो पाया कि बटर जिसे निशाना भी कहा जाता है उसके पीछे बफर के तौर पर कम से कम 20 मीटर कि खाली जगह रखनी होती है ताकि अगर कोई तीर निशाने से चूक भी जाए तो कहीं टकराए नहीं और खराब ना हो लेकिन आयोजन स्थल पर ऐसा कुछ नहीं था। निशाने को दीवार से कुछ फीट दूरी पर ही लगाया गया था। आगे बच्चों ने बताया कि बफर नहीं होने के कारण उनके तीर निशाना चूकने पर दीवार से टकराकर टूट गए और  वो प्रतियोगिता में आगे नहीं खेल पाए। 

प्रभारी ने झाड़ा पल्ला
इस मामले को लेकर जब तीरंदाजी प्रतियोगिता प्रभारी संगीता शर्मा से कोच बृजपाल सिंह ने बात कि तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। प्रभारी शर्मा ने कहा कि जैसा विभाग ने व्यवस्था की है में उसी में प्रतियोगिता करा सकती हूं। अगर आपको कोई समस्या है तो आप विभाग में शिकायत कर सकते हो यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया। 

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नियमों के चलते राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से चूके
कोच बृजपाल सिंह सोलंकी का कहना है कि संस्थान से गए हुए काफी बच्चे ऐसे थे जो राज्य स्तरीय प्रतियोगिता खेल सकते थे। मगर प्रशासन के नियमों व अनियमिताओं के चलते चूक गए। सिंह ने बताया कि अनियमिताओं से कई बच्चे तीर टूट जाने के कारण राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई होने से चूक गए क्योंकि प्रशासन ने तीर के टूट जाने कि अवस्था में प्रतिभागियों के लिए किसी प्रकार के नियम नहीं बनाए हैं।

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