ग्रेजुएट बीना सहित महिलाएं 10-12 घंटे आॅटो चलाकर कर रही परिवार के सपने साकार

नारायणी नमो:स्तुते

ग्रेजुएट बीना सहित महिलाएं 10-12 घंटे आॅटो चलाकर कर रही परिवार के सपने साकार

शहर में कई महिलाएं आॅटो चलाकर बना रही अपनी अलग पहचान।

कोटा। दूनिया के तेजी से बदलते स्वरूप में महिलाएं भी हर कदम पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। फिर चाहे बात चांद पर जाने की हो या आॅटो चलाने की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही है। महिलाएं लगभग हर क्षेत्र में अपने आप को मजबूत करने के साथ ही पुरूषों को कढ़ी टक्कर दे रहीं हैं। वहीं कुछ महिलाएं तो बिना किसी की सहायता के अपने घर परिवार को खुद ही अकेले चला रही हैं। हमारे शहर कोटा में भी कई आॅटो टैक्सी चालक महिलाएं भी इसी बात का उदाहरण पेश कर रहीं हैं। जो रोज 10 घण्टे आॅटो चलाकर शहर के लोगों के समक्ष अपनी एक अलग पहचान दर्ज करा रही हैं।

खुद ही की अपनी बेटी की शादी
आॅटो चालक बीना शर्मा पिछले 7 साल से आॅटो चला रहीं हैं। उन्होंने आॅटो चलाना साल 2017 में सीखा था और तब से ही आॅटो उनके मुख्य आय का स्त्रोत है। बीना ग्रेजुएट हैं और कहीं नौकरी नहीं लगने के कारण उन्होंने कोटा आॅटो चालक युनियन द्वारा चलाए गए प्रशिक्षण शिविर में आॅटो चलाने की ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग लेने के बाद बीना ने किस्तों पर आॅटो खरीदकर उसे चलाना शुरू कर दिया। शुरूआत में थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आॅटो चलाती रहीं और बीना आज सारा घर का खर्चा आॅटो से ही चलाती हैं। बीना दिन में करीब 12 घण्टे आॅटो चलाती हैं। आॅटो चलाने के कारण बीना के पति ने उनसे बात करना बंद कर दिया और आज भी उनके पति उनसे अलग रहते हैं। पति के अलग होने के बाद बीना ने ही अपनी बेटी को पढ़ाया और अपने दम पर ही उसकी शादी भी की। बीना का कहना है कि काई छोटा बड़ा नहीं होता है अगर आप उसे दिल से करो तो ये दुनिया की नजर है जो महिला और पुरूष में फर्क करती हैं हमें महिलाओं को आगे लाने के लिए उनके लिए समान अवसर पैदा करने चाहिए।

बच्चों को अच्छे से पढ़ाने का है सपना
विज्ञान नगर निवासी आॅटो चालक रेखा बरौली करीब सात साल से आॅटो चलाकर घर का खर्च उठा रही हैं। सात साल पहले पारिवारिक विवाद के चलते दोनों पति पत्नि अलग हो गए और बच्चों की जिम्मेदारी रेखा ने अपने कंधों पर ले ली। रेखा आॅटो चलाने से पहले एक हॉस्टल में काम किया करती थी वहां मिलने वाली 6000 रुपए की तनख्वा से घर चलाने में मुश्किल तो आ ही रही थी साथ ही बच्चों की पढ़ाई भी ठीक से नहीं हो पा रही थी। साल 2017 में कोटा आॅटो यूनियन के संपर्क में आई तो आॅटो चलाना सीखा और आॅटो से ही अपने घर का खर्च चलाती हैं। रेखा का सपना अपने दोनों बच्चों को अच्छे से पढ़ाना है। रेखा का कहना है कि वो बस अपने बच्चों के भविष्य के लिए ही आॅटो चलाती हैं ताकि उनकी पढ़ाई में कोई कमी ना आए। रेखा एक दिन में 10 घण्टे से भी ज्यादा आॅटो चला लेती हैं और रोज 500 से 1000 रुपए कमा लेती हैं।

नजमा निभा रहीं मां के साथ एक बेटे की जिम्मेदारी
आॅटो चालक नजमा मंसूरी के पति भी अनबन के कारण उनसे अलग हो गए और नजमा अपने मां बाप के साथ रहने लगी जिसके बाद मां बाप और बेटे की जिम्मेदारी उनके उपर आ गई। नजमा इससे पहले कम्प्यूटर आॅपरेटर का काम करती थी, लेकिन नौकरी से आमदनी कम होने के कारण घर चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इसलिए आॅटो चलाने के बारे सोचा और कोटा आॅटो यूनियन से ट्रेनिंग लेकर आॅटो चलाना शुरू कर दिया। नजमा का कहना है कि वो अभी अपने बलबूते घर का खर्चा चलाती हैं और रोज 500 से 1000 रुपए कमा लेती हैं हालांकि कभी कभी कम भी मिल जाते हैं लेकिन घर अच्छे से चल जाता है। नजमा पिछले 7 साल से आॅटो चला रहीं हैं, और अभी महिला आॅटो चालक यूनियन की अध्यक्ष हैं इसके अलावा नजमा महिलाओं को प्रेरित करती रहती हैं ताकि वो अपनें पैरों पर खड़ी हो सकें। नजमा को शुरूआती दौर में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन घर को देखते हुए उन्होंने आॅटो चलाना जारी रखा। 

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ई व्हीकल ने कमजोर किया काम
नजमा का कहना है कि 1 साल पहले आॅटो से अच्छी आमदनी हो जाती थी और घर का खर्च निकलने के साथ साथ थोड़ी बचत भी हो जाती थी। लेकिन जब से ई रिक्शा आए हैं तब से आमदनी में गिरावट आई है क्योंकि ई रिक्शा वाले कम दाम में सवारी को बिठा कर ले जाते हैं जिससे हमारी आमदनी पर असर पड़ रहा है। वहीं पुलिस प्रशासन को भी हमारे लिए थोड़ी रियायत करनी चाहिए ताकि हम सही सं आॅटो चला सके। वहीं नजमा का कहना है कि साथी आॅटो ड्राईवर भी सवारी को छिनने में कोई कसर नहीं छोड़ते और कभी कभी आॅटो स्टैंड पर आॅटो खड़ा करने में भी परेशानी होती है। 

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