International Tiger Day: प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों में उम्रदराज दो बाघिन बहनें

जयपुर जू में हुआ था दोनों का जन्म

International Tiger Day: प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों में उम्रदराज दो बाघिन बहनें

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघिन रानी के शावक मां के होते हुए भी बिन मां के जीना सीख रहे हैं। दोनों शावकों करीब ढाई माह के हो गए हैं।

जयपुर। हर साल 29 जुलाई को इंटरनेशनल टाइगर डे मनाया जाता है। प्रदेश के टाइगर रिजर्वों की बात की जाए तो रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या करीब 75 से 80 के बीच बताई जाती है। वहीं सरिस्का में इनकी संख्या बढ़कर करीब 43 हो गई है। इसके अतिरिक्त प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों में भी इनका संरक्षण हो रहा है। इसका नतीजा यह है कि जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में रह रही बाघिन रंभा और कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क (कैप्टिविटी) में बाघिन महक वर्तमान में सबसे उम्रदराज हैं। कमाल की बात यह है कि चन्दा नामक बाघिन ने साल 2004 में जयपुर जू में दोनों को जन्म दिया था। वहीं दूसरी ओर रणथम्भौर टाइगर रिजर्व से लाए बाघिन टी-79 का नर शावक भी अब करीब एक साल का हो गया है। 

20 साल की हुई महक और रंभा 
जयपुर जू में साल 2004 को जन्मी दोनों बाघिन बहनें रंभा (जयपुर स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क) और महक (कोटा स्थित अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क) वर्तमान में 20 साल की हो गर्इं हैं। अभी इनसे उम्रदराज बाघिनें प्रदेश के किसी भी बायोलॉजिकल पार्क (कैप्टिविटी) में नहीं हैं। इस दौरान रंभा का एक बार सफल प्रजनन भी हुआ था, लेकिन कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में रह रही बाघिन महक में ऐसा नहीं हो पाया। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में रह रही रंभा को रोजाना 8 किलो बफेलो मीट और 2 किलो चिकन डाइट में दिया जा रहा है। अपने आक्रामक रूख और दाहड़ से पर्यटकों को आकर्षित करने वाली यह बाघिन उम्र के इस पड़ाव पर आकर थोड़ी शांत रहने लगी है। रंभा के केयर टेकर गोपाल मीणा का कहना है कि इसे खाने में बोनलेस मीट दिया जा रहा है। 

दो बिना मां जीना सीख रहे तो एक सीख रहा शिकार के गुर 
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघिन रानी के शावक मां के होते हुए भी बिन मां के जीना सीख रहे हैं। दोनों शावकों करीब ढाई माह के हो गए हैं। इन्हें रेस्क्यू सेंटर स्थित नियो नेटेल केयर में रखा गया है। जहां एक बाघ की डमी के साथ दोनों अक्सर खेलते रहते हैं। इनका वजन पहले से बढ़कर करीब 7 किलो हो गया है। वहीं रणथम्भौर टाइगर रिजर्व से 15 सितम्बर, 2023 को यहां लाया गया बाघिन टी-79 का नर शावक मां के बिना शिकार के गुर सीख रहा है। इसे एन्क्लोजर में जिन्दा मुर्गा, खरगोश और बकरा दिया जा रहा है। इनका वो शिकार करना सीख रहा है।

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