भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई, सीएलसी पर 5 लाख रुपए का जुर्माना
कोई झूठा या भ्रामक विज्ञापन न दिया जाए
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने सीकर की करियर लाइन कोचिंग (CLC) पर भ्रामक विज्ञापनों के मामले में 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। आरोप है कि संस्थान ने IIT-JEE/NEET टॉपर्स की तस्वीरें व उपलब्धियां दिखाकर कोर्स संबंधी अहम जानकारी छिपाई और चयन के दावों को साबित करने के पर्याप्त सबूत नहीं दिए।
नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापनों, अनुचित व्यापार प्रथाओं और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन में लिप्त पाए जाने पर सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) के खिलाफ 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाते हुए अंतिम आदेश पारित किया है। यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के उल्लंघन में किसी भी वस्तु या सेवा के संबंध में कोई झूठा या भ्रामक विज्ञापन न दिया जाए।
मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्र की अध्यक्षता वाले सीसीपीए ने करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी), सीकर के खिलाफ आदेश पारित किए हैं। प्राधिकरण ने पाया कि कोचिंग संस्थान ने आईआईटी-जेईई और नीईटी परीक्षाओं में सफल उम्मीदवारों के नाम, फोटो और उपलब्धियों का प्रमुखता से उपयोग करते हुए बड़े-बड़े दावे किए और इन उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई।
सीएलसी ने विज्ञापनों में महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई
सीसीपीए ने सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (सीएलसी) द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइट और समाचार पत्रों में प्रकाशित भ्रामक विज्ञापनों का स्वत: संज्ञान लिया। सीसीपीए ने पाया कि संस्थान ने सफल उम्मीदवारों की तस्वीरें प्रमुखता से प्रदर्शित कीं और साथ ही विभिन्न कक्षा कार्यक्रमों का प्रचार किया, जबकि उम्मीदवारों द्वारा चुने गए वास्तविक पाठ्यक्रमों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई। जांच में पता चला कि संस्थान ने बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद अपने दावों को साबित करने के लिए दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए।
कई छात्र जिनके नाम और तस्वीरें विज्ञापनों में इस्तेमाल की गई थीं, वे केवल परीक्षा श्रृंखला पाठ्यक्रमों में नामांकित थे, जिसे विज्ञापनों में जानबूझकर छिपाया गया था। संस्थान ने एमबीबीएस, आईआईटी और अन्य संस्थानों में 1650 से अधिक सीएलसी छात्रों के अपने दावे के संबंध में विरोधाभासी रुख अपनाया। अपने लिखित बयान में संस्थान ने कहा कि यह आंकड़ा 1996 से संचयी चयन का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि सुनवाई के दौरान उसने दावा किया कि यह आंकड़ा केवल वर्ष 2024 से संबंधित है। प्राधिकरण ने माना कि इस तरह के विरोधाभासी बयानों ने दावे को निराधार और भ्रामक बना दिया है।

Comment List