कर्नाटक में शासन व्यवस्था सत्ताधारी पार्टी में गुटबाजी के आगे लाचार : आंतरिक सत्ता संघर्षों एवं नेतृत्व अनिश्चितता से जूझ रही सरकार, मोदी ने कहा- सत्ता समीकरण बदलने के लिए पुराने सहयोगियों को धोखा देती है कांग्रेस

ऐसा कोई करीबी नहीं, जिसे कांग्रेस ने धोखा न दिया हो

कर्नाटक में शासन व्यवस्था सत्ताधारी पार्टी में गुटबाजी के आगे लाचार : आंतरिक सत्ता संघर्षों एवं नेतृत्व अनिश्चितता से जूझ रही सरकार, मोदी ने कहा- सत्ता समीकरण बदलने के लिए पुराने सहयोगियों को धोखा देती है कांग्रेस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को “परजीवी पार्टी” बताते हुए कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में अस्थिर शासन, गुटबाजी और अवसरवाद का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस की राजनीति विश्वासघात से चलती है, शासन से नहीं।” वहीं भाजपा-राजग को स्थिरता, विकास और निर्णायक नेतृत्व का प्रतीक बताया।

बेंगलुरु। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए यहां एक जनसभा में स्थिरता बनाम अस्थिरता पर व्यापक चर्चा की और कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु का सीधा उदाहरण देते हुए कांग्रेस की शासन संबंधी विफलताओं एवं आंतरिक विरोधाभासों को उजागर किया। मोदी ने एचएएल हवाई अड्डे पर एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के मतदाता आज समाधान चाहते हैं, खेल नहीं। उन्होंने तर्क दिया कि कई राज्यों में हाल के चुनाव परिणाम भाजपा के नेतृत्व वाले राजग के अंतर्गत राजनीतिक स्थिरता एवं निर्णायक शासन के लिए जनता की स्पष्ट प्राथमिकता को दर्शाते हैं। मोदी ने कर्नाटक पर ध्यान केंद्रित करते हुए कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार लगातार आंतरिक सत्ता संघर्षों एवं नेतृत्व अनिश्चितता से जूझ रही है। उन्होंने कहा, वे यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि मुख्यमंत्री कब तक पद पर रहेंगे, सब कुछ अधर में लटका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में शासन व्यवस्था सत्ताधारी पार्टी में गुटबाजी एवं राजनीतिक सौदेबाजी के आगे लाचार हो गई है।

कर्नाटक से आगे बढ़कर अपने हमले का दायरा बढ़ाते हुए मोदी ने कांग्रेस की आलोचना में केरल और तमिलनाडु को भी शामिल किया और तर्क दिया कि दक्षिणी राज्यों में पार्टी का प्रभाव सुसंगत शासन की तुलना में राजनीतिक अवसरवादिता से ज्यादा चिह्नित होता रहा है। तमिलनाडु का उल्लेख करते हुए उन्होंने कांग्रेस पर सत्ता समीकरण बदलने के लिए अपने पुराने सहयोगियों को बार-बार धोखा देने का आरोप लगाया। अपने भाषण के सबसे तीखे शब्दों का चयन करते हुए मोदी ने कहा, ऐसा कोई करीबी नहीं है, जिसे कांग्रेस ने धोखा न दिया हो। उन्होंने कांग्रेस-द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के संबंधों का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि दशकों तक राजनीति गठबंधन रहने के बावजूद, कांग्रेस का अपने सहयोगियों के खिलाफ राजनीतिक रूप से सुविधाजनक समय पर छोड़ने का इतिहास रहा है।

उन्होंने कहा कि सत्ता में बदलाव आते ही सत्ता की भूखी कांग्रेस ने अपने सहयोगी को धोखा दिया। कांग्रेस को परजीवी पार्टी बताते हुए मोदी ने उस पर आरोप लगाया कि वह सत्ता में रहते हुए गठबंधनों पर निर्भर रहती है जबकि उन्हीं सहयोगियों को कमजोर करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का राजनीतिक व्यवहार शासन या वैचारिक स्थिरता के बजाय विश्वासघात एवं अवसरवादिता से परिभाषित होता है। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने शायद ही किसी करीबी को धोखा न दिया हो। प्रधानमंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस शासित राज्यों में शासन व्यवस्था चरमरा गई है और कहा कि प्रशासनिक गतिरोध एवं आंतरिक संघर्ष बार-बार होने वाले पैटर्न बन गए हैं। उन्होंने पार्टी के प्रशासनिक रिकॉर्ड की आलोचना करते हुए तीखे शब्दों में कहा, जहां भी कांग्रेस सरकार है वहां या तो सरकारी खजाने की लूट हो रही है या लूटे गए पैसे को लेकर झगड़े हो रहे हैं।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास एक सुसंगत शासन मॉडल का अभाव है। श्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस की सत्ता की किताब में शासन का कोई अध्याय ही नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी का राजनीतिक इसकी तुलना भाजपा के नेतृत्व वाले राजग से करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी पार्टी स्थिरता, गति एवं समाधान का प्रतिनिधित्व करती है और तर्क दिया कि पूरे देश के मतदाताओं ने भाजपा को उसके शासन के रिकॉर्ड के कारण बार-बार नया जनादेश दिया है। उन्होंने असम, गुजरात और पुडुचेरी जैसे राज्यों में चुनावी जीत का हवाला देते हुए राजग के पक्ष में राष्ट्रव्यापी रुझान को प्रमाण के रूप में लोगों के सामने प्रस्तुत किया।

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उन्होंने कहा, वैश्विक अस्थिरता वाले माहौल में भारत स्थिरता का मंत्र दे रहा है। उन्होंने सोच समझकर निरंतरता एवं शासन-केंद्रित नेतृत्व का चयन कर रहे हैं। श्री मोदी ने अपने इस भाषण में कर्नाटक को तात्कालिक राजनीतिक पृष्ठभूमि के रूप में प्रस्तुत किया, साथ ही इसके निहितार्थों को राष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित किया। केरल और तमिलनाडु के साथ-साथ कांग्रेस शासित या प्रभावित अन्य राज्यों का हवाला देते हुए मोदी ने विपक्ष के विखंडन एवं शासन की विफलता की एक व्यापक कहानी गढ़ने की कोशिश की, जिसकी तुलना उन्होंने भाजपा के बढ़ते प्रभाव और भारत में स्थिर शासन मॉडल के रूप में की।

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