राज्यसभा में वंदे मातरम् विधेयक पेश होते ही बवाल, विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सदन दिनभर के लिए स्थगित
पेश हुआ राष्ट्र गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक
नई दिल्ली। वंदे मातरम् से संबंधित 'राष्ट्र गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक 2026 ' शुक्रवार को विपक्ष के विरोध और भारी हंगामे के बीच राज्यसभा में पेश किया गया जिसके बाद सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी। दो बार के स्थगन के बाद दो बजे जब कार्यवाही दोबारा शुरू होते ही उप सभापति हरिवंश ने गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को विधेयक पेश करने के लिए कहा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जॉन ब्रिटास ने विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र गान और राष्ट्रीय गीत दोनों को समान संवैधानिक दर्जा हासिल नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समाज का ध्रुवीकरण कर रही है और यह विधेयक के माध्यम से राष्ट्रीयता और देशभक्ति पैदा नहीं कर सकती।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संदोष कुमार पी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्र प्रदर्शन से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है । उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को भारतीयों को एक करना चाहिए, विभाजित नहीं करना चाहिए। सदस्य ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर सहित सभी स्वतंत्रता सेनानी भी यह जानते थे इसलिए वंदे मातरम् को केवल दो पैरा तक सीमित किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझ कर बंकिम चंद्र चटर्जी और रविन्द्रनाथ टैगोर को बांटने की स्थिति पैदा करना चाहती है।
राय ने विपक्ष पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश के पहले राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने स्वयं 24 जनवरी 1950 को कहा था कि वंदे मातरम् को भी राष्ट्र गान की तरह सम्मान दिया जायेगा। इसके बाद सदन ने विपक्ष के विरोध को ध्वनिमत से खारिज करते हुए विधेयक को पेश करने की मंजूरी दे दी। श्री राय ने सदन में चर्चा के लिए विधेयक पेश किया। इस बीच विपक्षी दलों के सदस्य शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा करते रहे। सदन में अव्यवस्था की स्थिति देखते हुए उप सभापति ने सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर सदन की कार्यवाही पहले बारह बजे और फिर दो बजे तक स्थगित की गयी थी।
प्रधान के इस्तीफे तथा नीट के मुद्दे पर चर्चा कराने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के अपने-अपने रूख पर अड़े रहने के कारण उत्पन्न गतिरोध के चलते मानसून सत्र के पिछले पांच दिनों में हंगामे के कारण राज्यसभा में कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका तथा सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गयी। विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़िग है और उसका स्पष्ट कहना है कि इस्तीफे के बिना चर्चा शुरू नहीं होगी वहीं सत्ता पक्ष श्री प्रधान के इस्तीफे पर चुप्पी साधे हुए है और उसका कहना है कि वह नीट परीक्षा लीक और इससे संबंधित आंदोलन के हर मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए तैयार है तथा विपक्ष को भी चर्चा के लिए तैयार होना चाहिए।

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