बस्तर हेरिटेज मैराथन: आत्मसमर्पित नक्सलियों ने केन्या के धावकों संग लगाई दौड़, वन मंत्री केदार कश्यप ने हरी झंडी दिखाकर दौड़ को किया रवाना
बस्तर हेरिटेज मैराथन: हिंसा छोड़ विकास की दौड़ में शामिल युवा
जगदलपुर में 'बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026' ने इतिहास रच दिया। आत्मसमर्पित नक्सली युवाओं ने केन्याई धावकों के साथ कदम से कदम मिलाकर शांति का संदेश दिया। ₹25 लाख की इनामी राशि वाले इस भव्य आयोजन को लालबाग मैदान से हरी झंडी दिखाई गई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर अब खेलों और पर्यटन का नया केंद्र बन रहा है।
जगदलपुर। ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ में रविवार सुबह एक अनूठी तस्वीर देखने को मिली, जब हाल ही में सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले एक युवा नक्सली ने केन्या के पेशेवर धावकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दौड़ लगाई। यह आयोजन राज्य के सबसे बड़े रनिंग इवेंट के रूप में जगदलपुर के लालबाग मैदान से शुरू हुआ, जहां वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप और विधायक किरण देव ने हरी झंडी दिखाकर दौड़ को रवाना किया।
मैराथन में देश-विदेश के हजारों धावकों के बीच आत्मसमर्पित युवक की भागीदारी ने सबका ध्यान खींचा। वह केन्या के धावकों के साथ ‘फन रन’ श्रेणी में दौड़ा और बस्तर में बदलते हालात का संदेश दिया। इस अवसर पर महापौर संजय पांडेय, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी., कलेक्टर आकाश छिकारा सहित तमाम अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
‘बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ की थीम पर आयोजित इस मैराथन का मार्ग जगदलपुर से चित्रकोट जलप्रपात तक रखा गया था। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे फिटनेस और विरासत का उत्सव बताते हुए कहा कि बस्तर अब हिंसा की धरती नहीं, खेलों और पर्यटन की धरती बन रहा है। मैराथन में 42 किमी, 21 किमी, 10 किमी और 5 किमी फन रन श्रेणियां रखी गईं।
प्रतिभागियों के लिए 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई, जबकि बस्तर संभाग के सातों जिलों के धावकों का पंजीकरण निःशुल्क रखा गया। पूरे मार्ग पर सुरक्षा, मेडिकल और रिफ्रेशमेंट की विशेष व्यवस्था की गई थी। केन्या के धावकों ने भी यहां की संस्कृति और आतिथ्य की सराहना की। यह आयोजन बस्तर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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