सरकार के करीब लोगों को फायदा पहुंचाने वाला बजट : किसानों और महिलाओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं, अखिलेश बोले- शैक्षणिक क्षेत्र के लिए कुछ नहीं किया
बजट में किसानों की अनदेखी की
बड़े राज्य में शिक्षा एवं स्वास्थ्य की हालत यह है कि सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं और सरकारी अस्पतालों की हालत इतनी बदतर है कि ऑपरेशन किसी का करना होता है।
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बजट को घोर निराशावादी करार देते हुए कहा है कि इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों और महिलाओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। यादव ने बजट पेश किये जाने के बाद संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सभी के लिए शिक्षा का समुचित प्रबंध किये बगैर विकसित भारत की परिकल्पना कैसे की जा सकती है। बजट में शैक्षणिक क्षेत्र के लिए कुछ नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, इसके लिए बजट में क्या किया गया है, कोई बताये। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में शिक्षा एवं स्वास्थ्य की हालत यह है कि सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं और सरकारी अस्पतालों की हालत इतनी बदतर है कि ऑपरेशन किसी का करना होता है।
सपा सांसद ने कहा कि बजट में किसानों की अनदेखी की गयी है। आलू किसानों की समस्याओं की ओर देखने वाला कोई नहीं है। गन्ना किसान पहले से ही परेशान हैं। किसानों को राहत पहुंचाने के लिए बजट में कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए रोजगार और उनकी अन्य समस्याओं के निराकरण के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किये गये हैं। सोने-चांदी के दाम इतने बढ़ गये हैं कि अब महिलाओं को पीतल पर सोना चढ़वा कर गहने पहनने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि पांच प्रतिशत साधन संपन्न लोगों के हितों को ध्यान में रखकर यह बजट बनाया गया है। देश के 95 प्रतिशत लोगों के लिए बजट में कुछ नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार शेखी बघारते हुए कहती है कि 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाल दिया गया है, लेकिन वह इन 25 करोड़ लोगों की प्रति व्यक्ति आय नहीं बताती।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के कुछ नजदीकी लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बजट में प्रावधान किये गये हैं। उन लोगों को पहले से ही पता होता है कि बजट में क्या आने वाला है। यह पहले से ही तय कर लिया जाता है कि बजट में किसके लिए क्या करना है। यह पूछे जाने पर कि वह इस बजट को कितने नंबर देंगे, यादव ने कहा कि यह सवाल किसानों से पूछा जाना चाहिए, अब कृषक ही इस बजट और सरकार को नंबर देंगे।

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