अश्विनी वैष्णव का दावा: रेल पटरियों को उन्नत बनाने का 80 प्रतिशत काम पूरा, 50 प्रतिशत मार्ग सेमी हाईस्पीड के लिए तैयार

भारतीय रेल का कायाकल्प: 130 किमी/घंटा की रफ्तार और वैश्विक मानक

अश्विनी वैष्णव का दावा: रेल पटरियों को उन्नत बनाने का 80 प्रतिशत काम पूरा, 50 प्रतिशत मार्ग सेमी हाईस्पीड के लिए तैयार

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 50% रेल नेटवर्क अब सेमी-हाई स्पीड (130 किमी/घंटा) के लिए तैयार है। जापान की तर्ज पर AI और IoT आधारित निगरानी से समयबद्धता में सुधार किया जा रहा है। चेन्नई-बेंगलुरु जैसे नए हाई-स्पीड कॉरिडोर से यात्रा का समय घटेगा और भारतीय रेल का प्रदर्शन अब यूरोपीय देशों के समकक्ष पहुँच गया है।

नई दिल्ली। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय रेल नेटवर्क के 50 प्रतिशत रेल-मार्गों को उन्नत कर सेमी-हाई स्पीट रेलगाड़ी चलाने लायक कर दिया गया है जिस पर रेलगाड़यिां 130 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सुरक्षित दौड़ सकती है। राज्य सभा में प्रश्न काल के दौरान अपने मंत्रालय से संबधित पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए वैष्णव ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में पिछले एक दशक में रेल पटरियों के अपग्रेडेशन (उन्नयन) का काम बहुत गंभीरता से किया जा रहा है। 80 प्रतिशत रेल लाइनों को अपग्रेड कर 110 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए मजबूत और सुरक्षित किया गया है तथा 50 प्रतिशत मार्ग 130 किमी प्रति घंटे की ट्रेनों के लिए उपयुक्त बनाए जा चुके हैं जो सेमी हाई-स्पीड की श्रेणी में आता है।

उन्होंने यात्री ट्रेनों के समय पर परिचालन के रिकार्ड के बारे में एक अनुपूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि इस समय रेलवे की 24 डिवीजनों में गाड़ियों के समय पर चलने का रिकार्ड 90 प्रतिशत, 43 डिवीजनों में 80 प्रतिशत और आठ डिवीजनों में 95 प्रतिशत तक पहुंच गया है। मदुरै, रतलाम, हुबली, अजमेर जैसे कुछ डिवीजनों में समयानुसार परिचालन का स्तर 77 प्रतिशत है।

अश्विनी वैष्ण्व ने कहा, भारतीय रेल का यह प्रदर्शन जर्मनी, फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों के स्तर का है पर हमारी तुलना का आधार जापान होना चाहिए जहां समयबद्ध परिलाचन का एक अपना ही पैमाना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए वहां कुछ विशिष्ट कार्य प्रणालियां हैं जिनमें से कुछ को भारतीय रेल में भी अपनाया जा रहा है।

रेल मंत्री ने कहा कि जापान में मरम्मत और रख रखाव की योजना 26 सप्ताह पहले से लागू की जाती है। भारत में भी पिछले दो-ढाई साल से इसकी शुरुआत की गयी है जिसके परिणाम बहुत अच्छे आ रहे हैं। इसके और व्यापक इस्तेमाल और इसमें महारथ हासिल कर लिये जाने के बाद  स्थिति में निश्चित रूप से बड़ा सुधार दिखेगा।

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उन्होंने कहा कि यात्री ट्रेनों के समय पर आने-जाने को सुनिश्चित करते के लिए भारतीय रेल का मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी वाले औजार और समाधान समावेश जिसमें एआई आधारित निगरानी के अलावा रख रखाव पर जोर है। रेल अवसंरचना की निरंतर निगरानी के लिए इंटरनेट ऑफ दी थिंग्स और एआई का भी प्रयाग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिंगल सेट ट्रेन ( जिसमें इंजन को ट्रेन से अलग नहीं करना पड़ता) से भी समयबद्धता सुधरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल हर रोज 25000 ट्रेनों का परिचालन करती है और इनकी समय सारिणी का प्रबंधन एक जटिल काम है। 

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ट्रेनों की समयबद्धता को लेकर यात्रियों को डैश-बोर्ड (इलेक्ट्रानिक सूचना पट्टिका) की सुविधा दिये जाने के विचार के संबंध में एक अन्य अनुपूरक प्रश्न के जवाब में वैष्णव ने कहा कि रेलवे के नेटवर्क के इष्टतम उपयोग के लिए रेलवे अपनी समय सारिणी पर आईआईटी बांबे और आईआईटी मद्रास के माध्यम से अनुसंधान करा रही है। आईआईटी मुंबई ने कुछ अच्छा काम किया है। रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (सीआरआईएस) भी नेटवर्क के इष्टतम प्रयोग को सुनिश्चित करने में आईटी टूल के विकास में लगा रहता है।

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रेल मंत्री ने कहा कि जापान और दक्षिण कोरिया में यात्रियों के लिए रेल कॉरीडोर अलग कर दिए गये हैं और पुराने मार्गों को मालगाड़ी गलियारों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस बार के बजट में सात हाईस्पीड रेल गलियारों की घोषणा उसी दिशा में शुरुआत है। उन्होंने उदाहरण दिया कि चेन्नई- बेंगलूरू हाईस्पीड गलियारे के चालू हो जाने पर दोनों महानगरों की दूरी घट कर 73 मिनट की रह जाएगी।

एक अन्य प्रश्न के जवाब में रेल मंत्री ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरीडॉर के निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय के एक दल ने हाल में कार्य का निरीक्षण करने के बाद प्रगति पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की पिछली उद्धव ठाकरे सरकार ने इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का काम नहीं किया जबकि गुजरात में समय से जमीन की व्यवस्था होने के चलते वहां के हिस्से में पहले से ही काम तेज चल रहा है। इस रेल-मार्ग पर देश में पहली बार समुद्र के अंदर रेल टनल बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है।

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