बिटकॉइन मामला: कांग्रेस नेता नलपाद को ईडी का समन, कर्नाटक के मंत्री ने कार्रवाई को बताया 'राजनीति से प्रेरित'
सियासी बवाल शुरू
बेंगलुरु। कथित बिटकॉइन घोटाले से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कांग्रेस नेता मोहम्मद हारिस नलपाद को समन भेजे जाने से बुधवार को कर्नाटक में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। राज्य के मंत्री यू टी खादर ने इस कार्रवाई के समय पर सवाल उठाते हुए इसे 'राजनीति से प्रेरित' करार दिया है। प्रवर्तन निदेशालय ने मोहम्मद हारिस नलपाद और उनके भाई उमर फारूक नलपाद को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत पूछताछ के लिए 11 जून को बेंगलुरु स्थित अपने कार्यालय में पेश होने के लिए समन जारी किया है। यह जांच कुख्यात हैकर कृष्ण रमेश उर्फ श्रीकी से जुड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटाले से संबंधित है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री खादर ने सतर्क रुख अपनाया और कहा कि हालांकि वे इस समन पर अपनी आपत्ति जताते हैं, लेकिन जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाना चाहिए। उन्होंने संवााददाताओं से कहा, "यह नोटिस राजनीति से प्रेरित प्रतीत होता है, लेकिन मुझे मामले के सभी तथ्यों की पूरी जानकारी नहीं है। किसी भी जांच एजेंसी के कामकाज पर टिप्पणी करना हमारे लिए उचित नहीं होगा। एजेंसी कानून के मुताबिक अपनी जांच करेगी। मैं अभी इस मुद्दे का अध्ययन कर रहा हूं।"
यह समन इस हाई-प्रोफाइल बिटकॉइन घोटाला जांच में नया घटनाक्रम है, जिसने कई प्रभावशाली व्यक्तियों के कथित संबंधों के कारण कर्नाटक में समय-समय पर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ाई है। ईडी की जांच मुख्य रूप से वेबसाइटों को हैक करने, डिजिटल संपत्तियों (बिटकॉइन) की चोरी करने और इस अवैध गतिविधि से अर्जित धन को वैध बनाने (लांड्रिंग) के आरोपों पर केंद्रित है। नलपाद भाइयों से इससे पहले कर्नाटक पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने भी पूछताछ की थी।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय एजेंसी ने अप्रैल में कर्नाटक में कई स्थानों पर छापेमारी की थी, जिसमें नलपाद भाइयों के परिसर भी शामिल थे। तब ईडी ने आरोप लगाया था कि मोहम्मद हारिस नलपाद और उमर फारूक नलपाद हैकर श्रीकी के करीबी सहयोगी थे और इस अपराध की कमाई के लाभार्थियों में शामिल थे। हालांकि, नलपाद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

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