पति के तलवार से जानलेवा हमले में महिला अधिवक्ता घायल : पीड़िता को महत्वपूर्ण अंगों पर आई गंभीर चोटें, सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
मदद के लिए पुलिस कंट्रोल रूम और भाई को किया फोन
कोर्ट ने महिला वकील मधु राजपूत पर पति द्वारा तलवार से किए गए जानलेवा हमले का स्वत: संज्ञान लिया। गंभीर रूप से घायल पीड़िता को तीन अस्पतालों ने कथित तौर पर भर्ती करने से मना किया, बाद में एम्स में इलाज हुआ। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट तलब कर महिला वरिष्ठ अधिकारी से आपराधिक जांच के आदेश दिए।
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने एक महिला अधिवक्ता पर उसके पति के हाथों हुए जानलेवा हमले की घटना को सोमवार को स्वत: संज्ञान में लिया। न्यायालय ने इन दावों की पड़ताल का भी आदेश दिया कि तीन अस्पतालों ने अधिवक्ता को आपातकालीन उपचार देने से मना कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने नोट किया कि पीड़िता के पति ने उसके ऊपर तलवार से कई बार वार किया, जिससे उसके महत्वपूर्ण अंगों पर गंभीर चोटें आईं। पीड़िता का इलाज दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चल रहा था।
सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत की सहायता कर रहे वकील ने पीठ को बताया कि उस महिला वकील को उसके पति ने बेरहमी से मारा था, जिसके बाद उसने मदद के लिए पुलिस कंट्रोल रूम और अपने भाई को फोन किया था। बताया गया है कि उसे तीन अस्पतालों में ले जाया गया, जिन्होंने कथित तौर पर उसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे भर्ती करने से मना कर दिया। आखिरकार, तड़के करीब छह बजे उसे एम्स में भर्ती किया गया। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की जांच पर एक प्रगति रिपोर्ट मांगी है, जिसमें उन आरोपों की जांच भी शामिल है कि कुछ अस्पतालों ने पीड़ति को आपातकालीन इलाज देने से इनकार कर दिया था।
एडवोकेट मधु राजपूत दिल्ली की अदालतों में वकालत करती हैं। बताया जा रहा है कि रविवार रात उनके पति ने तलवार से उन पर हमला किया। सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को आदेश दिया कि वह इस मामले की आपराधिक जांच किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सौंपें। यह अधिकारी पुलिस अधीक्षक या उप पुलिस अधीक्षक रैंक की कोई महिला अधिकारी हो सकती हैं।

Comment List