इसरो ने विकसित की सी-32 क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणाली, उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत  की अंतरिक्ष कार्यक्रम में महत्वपूर्ण उपलब्धि : नारायणन

अन्वेषण क्षमताओं को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है

इसरो ने विकसित की सी-32 क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणाली, उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत  की अंतरिक्ष कार्यक्रम में महत्वपूर्ण उपलब्धि :  नारायणन

क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित सी-32 चरण मानव सहित अंतरिक्ष अभियान और अन्वेषण क्षमताओं को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 

तिरुवनंतपुमरम। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सी-32 क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणाली को सफलतापूर्वक विकसित किया है, जिससे उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत  की अंतरिक्ष कार्यक्रम में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह उपलब्धि ऐसे समय में हुई है, जबकि इसरो ने स्पेसएक्स के साथ अंतरिक्ष में दो उपग्रहों को जोडऩे और अलग करने की प्रौद्योगिकी का सफल प्रदर्शन करते हुए अमेरिका, रूस और चीन की श्रेणी में अपना स्थान बना लिया है। इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने शनिवार को क्रायोजोनिक प्रौद्योगिकी सी-32 के विकास में सफलता की घोषणा करते हुए बताया कि 20 टन के बल वाले क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित सी-32 चरण मानव सहित अंतरिक्ष अभियान और अन्वेषण क्षमताओं को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 

इसरो ने लम्बी उडान के लिए डिजाइन की गई इस प्रणाली का एक स्वदेशी नोजल सुरक्षा तंत्र का उपयोग कर इसका सफलतापूर्वक परीक्षण किया है और इससे लम्बी अवधि तक परीक्षण करना संभव हुआ। यह प्रणाली भविष्य में भारी-भरकम उपग्रहों को अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है। नारायणन ने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारी यात्रा में महत्वपूर्ण है। एक समय भारत को क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रौद्योगिकी देने से इंकार कर दिया था, लेकिन आज हमने सी-32 सहित क्रायोजेनिक रॉकेट के तीन चरणों का सफलतापूर्वक विकास और परीक्षण कर यह साबित कर दिया है और यह अंतरिक्ष अन्वेषण की सीमाओं को नयी ऊंचाई तक ले जाने की हमारी क्षमता को दर्शाता है।

इससे पहले भारत ने इसी साल अंतरिक्ष में दो उपग्रहों प्रक्षेपित कर  उन्हें अंतरिक्ष में परस्पर जोडऩे (डॉङ्क्षकग) और अलग करने (अनडॉकिंग) की जटिल प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन कर दुनिया के विरले देशा में अपना स्थान बनाया है। यह प्रौद्योगिकी भी मानव सहित अंतरिक्ष मिशन के लिए महत्वपूर्ण है। नारायणन ने कहा कि यह उपलब्धि भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, जिसमें प्रस्तावित गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम भी शामिल है तथा यह अंतरिक्ष यात्रा करने वाले राष्ट्र के रूप में हमारी स्थिति को और भी मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इसरो के वैज्ञानिकों, औद्योगिक साझेदारों और शैक्षणिक सहयोगियों के समर्पित प्रयासों से भारत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेतृत्व करने की दिशा में अपने लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के ²ष्टिकोण के अनुरूप है।

Tags: isro

Post Comment

Comment List

Latest News

टीकाराम जूली का फिर भाजपा पर हमला : एलपीजी किल्लत की चुनौती से निपटने की सरकार के पास कोई योजना नहीं, संकट को स्वीकार नहीं कर रही सरकार टीकाराम जूली का फिर भाजपा पर हमला : एलपीजी किल्लत की चुनौती से निपटने की सरकार के पास कोई योजना नहीं, संकट को स्वीकार नहीं कर रही सरकार
मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच गैस सिलेंडर संकट को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा।...
राज्यसभा में उठी फसल बीमा की राशि के भुगतान की समय सीमा तय करने की मांग, राजीव शुक्ला बोले-बीमा के नाम पर किसानों का हो रहा शोषण
मिडिल ईस्ट में तनाव बीच सईद इरावानी का बड़ा बयान: होर्मुज में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना ईरान का निहित अधिकार
अश्विनी वैष्णव का दावा: रेल पटरियों को उन्नत बनाने का 80 प्रतिशत काम पूरा, 50 प्रतिशत मार्ग सेमी हाईस्पीड के लिए तैयार
जयपुर में कालिका पेट्रोलिंग की कार्रवाई : युवती का पीछा कर मारपीट करने वाला मनचला गिरफ्तार, महिलाओं से निर्भया हेल्पलाइन नंबर सेव करने की अपील
'पीएनजी में शिफ्ट हों...', मिडिल ईस्ट तनाव के बीच एलपीजी की कमी, केंद्र सरकार ने दी पीएनजी अपनाने की सलाह
इसरो ने 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ क्रायोजेनिक इंजन सीई—20 का सफल परीक्षण किया, भविष्य के मिशनों में 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ सीई20 इंजनों को इस्तेमाल करने की योजना