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Read More... इसरो भेजेगा पीएसएलवी-सी62 मिशन : पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल की होगी 64वीं उड़ान, यह मिशन उपग्रहों को कक्षा में करेगा स्थापित
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यह मिशन प्राथमिक पेलोड के रूप में ईओएस-एन1 को ले जाएगा, जो रणनीतिक उद्देश्यों के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक अर्थ ऑब्जर्वेशन इमेजिंग सेटेलाइट है। एस. सोमनाथ ने कहा, इसरो का अगली पीढ़ी का प्रक्षेपण वाहन 'सूर्या' को मिलेगी नई पहचान, जानें कैसे?
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इसरो का नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल 'सूर्या' (NGLV) पुन: उपयोग योग्य तकनीक से लैस होगा। ₹8,240 करोड़ की लागत से बनने वाला यह रॉकेट 30 टन भार ले जाने में सक्षम होगा। इसरो ने एसएसएलवी के उन्नत तीसरे चरण का सफल स्थैतिक परीक्षण किया
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इसरो ने SSLV के तीसरे चरण (SS3) के उन्नत संस्करण का स्थैतिक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। इस नए डिजाइन से रॉकेट की पेलोड क्षमता 90 किलोग्राम बढ़ गई है, जिससे छोटे उपग्रह प्रक्षेपण और प्रभावी होंगे। ब्लूबर्ड-6 सफलता की कहानी में भारतीय मूल के दो लोगों का खास योगदान, इसरो का चौकाने वाला खुलासा
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इसरो (ISRO) ने बुधवार को अपने शक्तिशाली रॉकेट LVM3-M6 के जरिए अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile के उपग्रह ब्लूबर्ड 6 को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित किया। इसरो के एलवीएम3एम6 रॉकेट ने भरी उड़ान, अमेरिका के सबसे भारी ब्लूबर्ड-6 उपग्रह को सफलतापूर्वक एलईओ में किया स्थापित
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सटीक रूप से 520 किमी की वृत्ताकार निचली पृथ्वी कक्षा में स्थापित हो गया। इसरो ने घोषणा की, एलवीएम3एम6 ब्लू बर्ड ब्लॉक 2 मिशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। ISRO के एलवीएम-3 प्रक्षेपण की उलटी गिनती शुरू, बुधवार को होगा लॉन्च
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इसरो का एलवीएम3-एम6 रॉकेट बुधवार सुबह श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित होगा। यह 6.5 टन का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह एलईओ में स्थापित करेगा, जो अब तक का सबसे भारी वाणिज्यिक पेलोड है। श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा ISRO का 6.5 टन वजनी ब्लू-बर्ड-6, भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा
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15 दिसंबर सोमवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो श्रीहरिकोटा से अपना सबसे भारी अमेरिकी कॉमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट, 6.5 टन वजनी ब्लू-बर्ड-6 लॉन्च करने वाला है सेना के लिए इसरो की तैयारी : अनुपयोगी सैटेलाइट्स को नष्ट करने की तैयारी में जुटा इसरो और जापान, 26 हजार करोड़ की लागत से बन रहा स्पेस बेस्ड सर्विलांस-3 सिस्टम
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निजी क्षेत्रों में भी काम शुरू हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले एक सैटेलाइट बनाने में तीन साल लगते थे, लेकिन अब एक साल में नौ सैटेलाइट तैयार हो रहे हैं। इसरो ने विकसित की सी-32 क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणाली, उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की अंतरिक्ष कार्यक्रम में महत्वपूर्ण उपलब्धि : नारायणन
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क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित सी-32 चरण मानव सहित अंतरिक्ष अभियान और अन्वेषण क्षमताओं को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसरो ने सफलतापूर्वक पूरा किया अपना पहला स्पैडेक्स मिशन, इस तकनीक को हासिल करने वाला चौथा देश बना भारत
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इसरो के अधिकारियों ने टीम को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। स्पाडेक्स मिशन पूरा होने के करीब, स्वायत्त डॉकिंग क्षमता का प्रदर्शन करना मिशन का उद्देश्य : इसरो
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स्पोडेक्स पर इसरो के मिशन नियंत्रण द्वारा बारीकी से निगरानी की गई है और वैज्ञानिक एक सफल डॉकिंग प्राप्त करने के बारे में आशावादी हैं। इसरो का स्पेडेक्स मिशन लॉन्च, दोनों स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में जोड़ेगा
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चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा। मिशन की कामयाबी पर ही भारत का चंद्रयान-4 मिशन निर्भर है। चंद्रयान-4 मिशन को 2028 में लॉन्च किया जा सकता है। 